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गोबर भी बेकार नहीं, इससे जुड़ी चीजें बना सकती हैं आपको काम-धंधे में आत्मनिर्भर, देखें कुछ आइडिया
आमतौर पर जिनके पास कुछ अलग तरह के आइडियाज नहीं होते, उनके बारे में लोग कहते हैं कि 'दिमाग में क्या गोबर भरा है?' लेकिन गोबर भी कोई बेकार चीज नहीं हैं। अगर आपके पास गोबर को लेकर आइडियाज हैं, तो आप कमाई कर सकते हैं। वो कैसे? पहले जानते हैं नई खबर। आपने गांवों के कच्चे घरों को गोबर से लीपते-पोतते देखा होगा। धीरे-धीरे यह ग्रामीण संस्कृति होटलों आदि में दिखाई देने लगी। अब खादी इंडिया ने गाय के गोबर से बना प्राकृतिक पेंट लॉन्च किया है। यानी यह केमिकल से बने पेंट से बेहतर है। यह आपके घर को प्राकृतिक रूप से शुद्ध रखेगा। आइए जानते हैं गोबर कैसे कमाई का जरिया बनता जा रहा है।

पहले जानते हैं गोबर से बने पेंट के बारे में...
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को गाय के गोबर से बना प्राकृतिक पेंट लॉन्च किया। खादी इंडिया का यह प्रोडक्ट एंटीबैक्टीरियल, ईको फ्रेंडली और एंटी फंगल है।
गाय के गोबर से बना एक लीटर का यह डिस्टेंपर 120 रुपए में बिकेगा, जबकि इमल्शन की कीमत होगी 225 रुपए। केमिकल पेंट की तुलना में यह सस्ता और बेहतर है। इससे किसानों का आय बढ़ेगी।
जल प्रदूषण को रोकने धीरे-धीरे प्लास्टर आफ पेरिस या अन्य केमिकल युक्त चीजों के मिश्रण से बने पदार्थों की बनीं मूर्तियों पर रोक लगाई जा रही है। नवरात्रि और गणेशोत्सव पर अब गोबर से निर्मित गणेश मूर्तियों की डिमांड बढ़ रही है।
यह भी बता दें कि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने गोबर निर्मित दीयों और मूर्तियों को बढ़ावा देने इसी दीवाली पर 33 करोड़ गोबर के दीये जलाए थे। आयोग के चेयरमैन डॉ. वल्लभ भाई कथीरिया ने यह जानकारी दी थी।
कई होटलों में गोबर के कंडों पर रोटियां बनाकर खिलाने का प्रचलन बढ़ रहा है। इन पर बना भोजन स्वादिष्ट, पाचक होता है। यानी जिनके लोगों के पास गाय-भैंस आदि हैं, वे गोबर के उपले(कंडे या गोहरे) बेचकर कमाई कर रहे हैं।
इस समय आर्गेनिक खेती का प्रचलन भी बढ़ा है। फसलों में केमिकल के उपयोग के चलते खाद्य पदार्थों जहरीले होते जा रहे हैं। इन्हें खाने से कैंसर सहित तमाम तरह के घातक रोग बढ़ रहे हैं। इसी के चलते अब आर्गेनिक खेती पर जोर दिया जा रहा है। इसमें गोबर की खाद की महत्व होता है। खाद बेचकर किसान अच्छा पैसा कमा रहे हैं। या अपने ही खेतों में यह खाद इस्तेमाल करके बचत कर रहे हैं।
आपको पता है कि गोबर कीटाणुनाशक होता है। इसमें 86 प्रतिशत तक द्रव्य होता है। इसमें खनिज की मात्रा कम होती है। फास्फोरस, चूना, पोटाश, मैग्जीन, लोहा, सिलिन, एल्युमिनियम, गंधक आदि अधिक मात्रा में होते हैं। इसके अलावा आयोडीन आदि भी होता है। ये चीजें हवा में घुलकर वातावरण को शुद्ध करती हैं। यही वजह है कि हवन में कंडों का इस्तेमाल किया जाता है।
हवन आदि के लिए गोबर के कंडों की काफी डिमांड रहती है। यही एक कारण है कि अब ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर भी आपको कंडे बिकते दिख जाएंगे। वो भी शानदार पैकिंग के साथ। इससे किसानो की आय बढ़ी है।
आमतौर पर गोबर 5 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। चूंकि शहरों में अब गोबर आसानी से नहीं मिलता, ऐसे में गांववाले इससे अच्छी कमाई करने लगे हैं। गोबर गैस के उपयोग से बिजली पैदा करना काफी पुराना मामला हो गया है। यह भी कमाई करने का एक जरिया है।
जल प्रदूषण को रोकने धीरे-धीरे प्लास्टर आफ पेरिस या अन्य केमिकल युक्त चीजों के मिश्रण से बने पदार्थों की बनीं मूर्तियों पर रोक लगाई जा रही है। नवरात्रि और गणेशोत्सव पर अब गोबर से निर्मित गणेश मूर्तियों की डिमांड बढ़ रही है।
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