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फटे-पुराने टायरों को देखकर IT प्रोफेशनल लड़की को आया गजब आइडिया, फुटवियर बनाकर बन गई लखपति

First Published Dec 30, 2020, 12:04 PM IST
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कबाड़ भी बड़े काम आता है। कैसे? पुणे की रहने वालीं 28 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल पूजा आप्टे बादामीकर से सीखिए! ये बस, ट्रक, हवाई जहाज आदि के फटे-पुराने टायरों से डिजाइनर फुटवियर बनाती हैं। आज इनका सालाना टर्न ओवर 7 लाख रुपए को पार कर चुका है। ये हर महीने 200 पीस फुटवियर बनाती हैं। इनका यह इनोवेशन न सिर्फ करियर में एक मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ताज्जुब होगा कि पुणे यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग करने के बाद 4 साल तक जॉब करने वालीं पूजा को यह आइडिया अफ्रीकी देश की एक आदिवासी जाति के हुनर को देखकर आया। यह जनजाति टायरों को काटकर अपने लिए जूते-चप्पल बनाती है। इसे देखकर पूजा ने टायर स्क्रैब को अप साइकिलिंग(क्रियेटिव) और रिसाइकिलिंग करके फुटवियर बनाने की सोची। पढ़िए आगे की कहानी...

पूजा ने 4 साल तक एक आईटी कंपनी में काम किया। इसके साथ ही दिल्ली की टेरी यूनिवर्सिटी से रिन्युएबल एनर्जी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। यहीं पर उन्हें अप साइकिलिंग और रीसाइकिलिंग के बारे में पता चला। पूजा बताती हैं कि सिर्फ प्लास्टिक ही नहीं, टायर स्क्रैब भी पर्यावरण के खतरनाक होते हैं। बता दें कि दुनियाभर में हर साल 100 करोड़ स्क्रैप टायर निकलते हैं। इनमें से 0.1 प्रतिशत ही रीयूज या रिसाइकिल हो पाते हैं।

पूजा ने 4 साल तक एक आईटी कंपनी में काम किया। इसके साथ ही दिल्ली की टेरी यूनिवर्सिटी से रिन्युएबल एनर्जी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। यहीं पर उन्हें अप साइकिलिंग और रीसाइकिलिंग के बारे में पता चला। पूजा बताती हैं कि सिर्फ प्लास्टिक ही नहीं, टायर स्क्रैब भी पर्यावरण के खतरनाक होते हैं। बता दें कि दुनियाभर में हर साल 100 करोड़ स्क्रैप टायर निकलते हैं। इनमें से 0.1 प्रतिशत ही रीयूज या रिसाइकिल हो पाते हैं।

पूजा को रिसर्च के दौरान अफ्रीकी देश में रहने वाले वाली एक जनजाति के बारे में पता चला। ये लोग फटे-पुराने टायर से अपने लिए जूते-चप्पल बना रहे थे। यही से पूजा को प्रेरणा मिली। उन्होंने सबसे पहले दो डिजाइन तैयार करके  'स्टार्टअप इंडिया’ में प्रेजेंट किए।

पूजा को रिसर्च के दौरान अफ्रीकी देश में रहने वाले वाली एक जनजाति के बारे में पता चला। ये लोग फटे-पुराने टायर से अपने लिए जूते-चप्पल बना रहे थे। यही से पूजा को प्रेरणा मिली। उन्होंने सबसे पहले दो डिजाइन तैयार करके  'स्टार्टअप इंडिया’ में प्रेजेंट किए।

पूजा को इस दिशा में बेहतर काम के लिए 2018 में अपकमिंग वुमन एंटरप्रेन्योर श्रेणी में 50,000 रुपए का पुरस्कार भी मिला था। पूजा  Nemital नाम से ब्रांड चलाती हैं। वे 35 तरह के प्रोडक्ट्स बनाती हैं। इन्हें ऑनलाइन बेचती हैं।

पूजा को इस दिशा में बेहतर काम के लिए 2018 में अपकमिंग वुमन एंटरप्रेन्योर श्रेणी में 50,000 रुपए का पुरस्कार भी मिला था। पूजा  Nemital नाम से ब्रांड चलाती हैं। वे 35 तरह के प्रोडक्ट्स बनाती हैं। इन्हें ऑनलाइन बेचती हैं।

पूजा ने अप्रैल, 2019 में अपना प्रोडक्ट लॉन्च किया था। पुणे में इनका खुद का एक छोटा-सा फुटवियर वेयर हाउस है। पूजा जब नौकरी करती थीं, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ऐसा भी कुछ करेंगी।
 

पूजा ने अप्रैल, 2019 में अपना प्रोडक्ट लॉन्च किया था। पुणे में इनका खुद का एक छोटा-सा फुटवियर वेयर हाउस है। पूजा जब नौकरी करती थीं, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ऐसा भी कुछ करेंगी।
 

पूजा ने अपने स्टार्टअप पर एक लाख रुपए की पूंजी निवेश की थी। आज ये सालभर में 7 लाख रुपए का बिजनेस कर रही हैं। पूजा कहती हैं कि आने वाले समय में उनका बिजनेस और बढ़ेगा।

पूजा ने अपने स्टार्टअप पर एक लाख रुपए की पूंजी निवेश की थी। आज ये सालभर में 7 लाख रुपए का बिजनेस कर रही हैं। पूजा कहती हैं कि आने वाले समय में उनका बिजनेस और बढ़ेगा।

पूजा बताती हैं कि 2021 में वे अपना नया प्रोडक्ट लॉन्च करेंगी। अब उनका प्रयास अपने फुटवियर ब्रांड को एक्सपोर्ट करने का है।

पूजा बताती हैं कि 2021 में वे अपना नया प्रोडक्ट लॉन्च करेंगी। अब उनका प्रयास अपने फुटवियर ब्रांड को एक्सपोर्ट करने का है।

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