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- 3 साल की उम्र में हुआ बाल विवाह बड़ी होकर वो बन गई 'पुलिसवाली दीदी', कैंसर को हरा आज कर रही लोगों की सेवा
3 साल की उम्र में हुआ बाल विवाह बड़ी होकर वो बन गई 'पुलिसवाली दीदी', कैंसर को हरा आज कर रही लोगों की सेवा
करियर डेस्क. इन दिनों सोशल मीडिया पर राजस्थान की एक "पुलिस वाली दीदी" कहानी काफी वायरल हो रही है। बाल विवाह की शिकार इस महिला अफसर का नाम सुनीता है। वो राजस्थान में पली-बढ़ी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, त्याग और पूर्ण निष्ठा के साथ इतना बड़ा लक्ष्य हासिल किया। सुनीता ने कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी मात दी है। आइए जानते हैं पुलिस वाली दीदी की सक्सेज स्टोरी (Success Story) और उनका संघर्ष-

सुनीता ने अपनी कहानी ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे पर साझा की है। वो बताती हैं कि, मैं मुश्किल से 3 साल की थी जब मेरी शादी पास के गांव के एक लड़के से कर दी गई। हमारे समुदाय में, बाल विवाह बहुत आम बात है। फिर मुझे 18 साल का होने के बाद मुझे ससुराल भेज दिया जाएगा। शादी का मतलब समझने के लिए मैं बहुत छोटी थी। तो मुझे बस पढ़ाई-लिखाई में ही मन लगता है। फिर जब मैं 5 साल की हुई तो मेरे गांव को पहला स्कूल खोला गया। मैंने स्कूल जाने की जिद करने की। फिर मैं पापा से बोली कि, ‘मुझे ऑफिसर बनना है। स्कूल भेजो मुझे।‘ पापा ने स्कूल में एडमिशन करवा दिया। हमारे पास बिजली नहीं थी, इसलिए मैं पूरी रात लालटेन लैंप के साथ पढ़ाई करती थी। स्कूल के बाद, मैं घर के कामों और खेती में भी सहयोग करकी थी। मैं हमेशा क्लास में फर्स्ट आती थी।
फिर आगे की पढ़ाई करने मैं पड़ोसी गांव में स्कूल जाने लगी। इसके लिए मुझे रोजाना 6 किमी पैदल चलना पड़ता था। मेरे पड़ोसी मुझे चिढ़ाते थे। ‘इतना पढ़के क्या करोगी? ससुराल ही तो जाना है, पढ़ी लिखी बहू को कोई पसंद नहीं करता। लेकिन मैंने 10वीं तक कड़ी मेहनत से पढ़ाई की। और आगे की पढ़ाई करने शहर चली गई। फिर साल 2011 में मैंने पुलिस कांस्टेबल के लिए की भर्ती में आवेदन किया। और 50 लोगों में से, मैं लिखित परीक्षा पास करने वाली इकलौती लड़की थी। इसके बाद ये बात मैं पापा को बताने में घबरा रही थी लेकिन उन्होंने खुशी और हैरानी से कहा ‘ तेरा अधिकारी बनने का सपना पूरा होना ही चाहिए।'
9 महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद, मुझे अपने गांव से पहली महिला पुलिस कांस्टेबल नियुक्त किया गया। मैं 19. साल की थी। मुझे अच्छा लगता है जब लोगों ने मुझे सलाम किया और कहा, 'पुलिस साहिबा आ रही हैं।' लेकिन कुछ महीनों बाद, मुझे पेट में दर्द होने लगा। डॉक्टरों ने मुझसे कहा-आपको स्टेज 2 अंडाशय कैंसर है। इतना संघर्ष करने के बाद, जब मैं अपना सपना जी रही थी तब अचानक मेरी जिंदगी टूटकर बिखर गई। 2013 में मुझे कैंसर हो गया और अगले 6 महीने भयानक थे। मैंने 6 कीमो सेशन झेले। अपने लंबे-घने खूबसूरत बाल भी खो दिए। मेरा वजन घटकर 35 किलो ही रह गया था।
पिताजी ने मेरे इलाज पर 4 लाख खर्च किये। पड़ोसी ताने मारते थे कि बेटी पे इतना पैसा क्यों खर्च कर रहे हो? दूसर लोग मुझे गंजी बुलाते थे। मैंने खुद को चार दीवारों में समेट लिया था। फिर से काम शुरू करने के बाद भी, मैं अपने सिर को ढकने के लिए टोपी पहनने लगी। फिर मैंने पड़ोस में एक संगीत शिक्षक की क्लास ज्वाइन की। यहां मैंने हारमोनियम बजाना शुरू किया-इससे मुझे मेरा दिमाग भटकाने में मदद मिली। मैं ड्रिपेस होने से बच गई।
कुछ महीनों बाद, जब मेरे पति और मैं एक साथ रहना शुरू कर रहे थे, तब मैंने उन्हें अपने बारे में बताया। ओवेरियन कैंसर का मतलब था कि मां बनने की संभावनाएं कम थीं-फिर भी उन्होंने कहा, चाहे जो भी हो मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं । मैं जैसी भी थी मेरे पति ने वैसा ही मुझे स्वीकार किया और यही मेरे लिए काफी था। उसके बाद, मैंने अपना जीवन सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। ड्यूटी के बाद मैं स्थानीय स्कूलों में घूमती और बच्चों को पढ़ाती थी। यहां बच्चों को मैंने इव टीजिंग, यौन शोषण, गुड-बैट टच आदि के बारे में बताया। बच्चे मुझे ‘पुलिसवाली दीदी’ कहने लगे।
पिछले 3 सालों में, मैंने 1000 से अधिक बच्चों को शिक्षित किया है। पुलिस कमिश्नर ने मुझे इसके लिए सम्मानित किया। अब मेरे बाल वापस बड़े हो गए हैं! अभी भी, मैं अक्सर अपने पुराने गंजे फोटो को देखती हूं तो लगता है एक बुरे वक्त को हराकर मैं कितनी दूर आ गई हूं और कितनी दूर जाना बाकी है…पुलिसवाली दीदी!”
सुनीता ने अपने जीवन में कैंसर के साथ-साथ बाल विवाह और महिला के प्रति निम्न सोच जैसी कई कुरीतियों को मात दी। आज लोग उनके जज्बे को सैल्यूट कर रहे हैं।
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