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18 साल के करियर में 41 से ज्यादा ट्रांसफर, मामूली लड़की से दबंग IPS अफसर बनने की कहानी है दिलचस्प

First Published Feb 21, 2020, 10:42 AM IST
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कर्नाटक.एक साधारण परिवार में बेटी का जन्म हुआ तो पिता ने सपना देखा कि मेरी ये बच्ची कुछ बड़ा करके हमारा नाम रोशन करेगी। वो उसे पलकों पर बैठाते थे। बचपन से ही बेटी को पढ़-लिखकर देश की सेवा करने के शिक्षा और संस्कार दिए। पिता ने मात्र 8 साल की उम्र से ही बेटी को सिखाना शुरू कर दिया कि उसे एक दिन पुलिस में जाकर देश और समाज की सेवा करनी है। ये कहानी है कर्नाटक के एक दूरसंचार इंजीनियर की बेटी IPS डी रूपा की। डी रूपा के नाम कर्नाटक की पहली महिला आईपीएस अफसर का खिताब है। कर्नाटक पुलिस में रूपा इंस्पेक्टर जनरल यानी आइजी रही हैं। IPS सक्सेज स्टोरी में आज हम आपको इस तेज-तर्रार लेडी दबंग के संघर्ष और चुनौतियों की कहानी सुना रहे हैं.....

रूपा एक साधारण परिवार में जन्मी थीं। उनके पिता जे एस दिवाकर एक दूरसंचार विभाग में इंजीनियर थे और माता हेमावती डाक विभाग में काम करती थीं। फिलहाल उनके माता-पिता दोनों सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं।  उनकी एक छोटी बहन है, जिनका नाम रोहिणी है। वो भी एक आईआरएस अधिकारी हैं और चेन्नई में आयकर के संयुक्त आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।

रूपा एक साधारण परिवार में जन्मी थीं। उनके पिता जे एस दिवाकर एक दूरसंचार विभाग में इंजीनियर थे और माता हेमावती डाक विभाग में काम करती थीं। फिलहाल उनके माता-पिता दोनों सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं। उनकी एक छोटी बहन है, जिनका नाम रोहिणी है। वो भी एक आईआरएस अधिकारी हैं और चेन्नई में आयकर के संयुक्त आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।

खाकी में रहने वाली डी रूपा अच्छी भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्ष 2000 बैच की आईपीएस डी रूपा अपने करियर में कई चर्चित कार्रवाइयों के लिए जानीं जातीं हैं। उन्होंने आईएएस मुनीश मौदगिल (Munish Moudgil) से शादी की है। कई बार नेताओं से टकराव के कारण डी रूपा को अब तक 18 वर्ष के करियर में 41 से अधिक बार ट्रांसफर झेलने पड़े हैं। वे कर्नाटक की ऐसी आईजी रही हैं कि लोग उनके नाम से कांपते हैं। राजनेताओं को भी वो जेल की हवा खिलाने पहुंच गई हैं।

खाकी में रहने वाली डी रूपा अच्छी भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्ष 2000 बैच की आईपीएस डी रूपा अपने करियर में कई चर्चित कार्रवाइयों के लिए जानीं जातीं हैं। उन्होंने आईएएस मुनीश मौदगिल (Munish Moudgil) से शादी की है। कई बार नेताओं से टकराव के कारण डी रूपा को अब तक 18 वर्ष के करियर में 41 से अधिक बार ट्रांसफर झेलने पड़े हैं। वे कर्नाटक की ऐसी आईजी रही हैं कि लोग उनके नाम से कांपते हैं। राजनेताओं को भी वो जेल की हवा खिलाने पहुंच गई हैं।

उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में बात करते हुए बताया कि,  “मेरे पिता ने मुझे एक सपना दिया था जब मैं मुश्किल से आठ साल की थी। उन्होंने कहा कि बेटी तुम्हें आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनना चाहिए। उन्होंने मुझे समझाया कि एक प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा क्या है? उस छोटी सी उम्र में मैं मुझे ज्यादा कुछ समझ नहीं आया था लेकिन आईपीएस मेरे दिमाग में बस गया था। ”

उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में बात करते हुए बताया कि, “मेरे पिता ने मुझे एक सपना दिया था जब मैं मुश्किल से आठ साल की थी। उन्होंने कहा कि बेटी तुम्हें आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनना चाहिए। उन्होंने मुझे समझाया कि एक प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा क्या है? उस छोटी सी उम्र में मैं मुझे ज्यादा कुछ समझ नहीं आया था लेकिन आईपीएस मेरे दिमाग में बस गया था। ”

रूपा ने छोटी उम्र से ही खाकी वर्दी पहन ली थी। रूपा सिर्फ 24 वर्ष की थीं, जब वह 2000 में पुलिस बल में शामिल हुईं। उन्होंने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा 43 अंकों के अखिल भारतीय रैंक के साथ पास की और IPS प्रशिक्षण में अपने बैच में 5 वें स्थान पर रहीं।

रूपा ने छोटी उम्र से ही खाकी वर्दी पहन ली थी। रूपा सिर्फ 24 वर्ष की थीं, जब वह 2000 में पुलिस बल में शामिल हुईं। उन्होंने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा 43 अंकों के अखिल भारतीय रैंक के साथ पास की और IPS प्रशिक्षण में अपने बैच में 5 वें स्थान पर रहीं।

वह एक अच्छी निशानेबाज हैं और एनसीसी कैडेट के रूप में शूटिंग प्रतियोगिता के दौरान और राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आईपीएस प्रशिक्षण के दौरान अपने कौशल का प्रदर्शन किया है। रूपा के नाम कई ऐसी चुनौतियां दर्ज हैं जिन्हें उन्होंने बखूबी निभाया है।

वह एक अच्छी निशानेबाज हैं और एनसीसी कैडेट के रूप में शूटिंग प्रतियोगिता के दौरान और राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आईपीएस प्रशिक्षण के दौरान अपने कौशल का प्रदर्शन किया है। रूपा के नाम कई ऐसी चुनौतियां दर्ज हैं जिन्हें उन्होंने बखूबी निभाया है।

उन्होंने सूबे में होम गार्ड्स और सिविल डिफेंस की कमान संभाली है। इसके पहले वह डीआइजी (जेल) के पद पर थीं, तब वह सुर्खियों में रहीं थीं, जब जयललिता की करीबी और भ्रष्टाचार में कर्नाटक की जेल में बंद तमिलनाडु की एआईएडीएमके नेता शशिकला को अंदर मिलने वाली वीआइपी सुविधाओं का भंडाफोड़ किया था। डी रूपा ही वह आईपीएस हैं, जो 2004 में एक वारंट को तामील कराने के लिए कर्नाटक से उमा भारती को गिरफ्तार करने एमपी के लिए निकल पड़ीं थी। वो भी जब उमा भारती मुख्यमंत्री थीं।

उन्होंने सूबे में होम गार्ड्स और सिविल डिफेंस की कमान संभाली है। इसके पहले वह डीआइजी (जेल) के पद पर थीं, तब वह सुर्खियों में रहीं थीं, जब जयललिता की करीबी और भ्रष्टाचार में कर्नाटक की जेल में बंद तमिलनाडु की एआईएडीएमके नेता शशिकला को अंदर मिलने वाली वीआइपी सुविधाओं का भंडाफोड़ किया था। डी रूपा ही वह आईपीएस हैं, जो 2004 में एक वारंट को तामील कराने के लिए कर्नाटक से उमा भारती को गिरफ्तार करने एमपी के लिए निकल पड़ीं थी। वो भी जब उमा भारती मुख्यमंत्री थीं।

हालांकि डी रूपा के पहुंचते से पहले तक उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब डी रूपा कर्नाटक के धारवाड़ जिले की पुलिस अधीक्षक(एसपी) थीं। दरअसल, जब 2003 के चुनाव में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो हालांकि डी रूपा के पहुंचते से पहले तक उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब डी रूपा कर्नाटक के धारवाड़ जिले की पुलिस अधीक्षक(एसपी) थीं। दरअसल, जब 2003 के चुनाव में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो उनके खिलाफ दस साल पुराने मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था।  उनके खिलाफ दस साल पुराने मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था।

हालांकि डी रूपा के पहुंचते से पहले तक उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब डी रूपा कर्नाटक के धारवाड़ जिले की पुलिस अधीक्षक(एसपी) थीं। दरअसल, जब 2003 के चुनाव में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो हालांकि डी रूपा के पहुंचते से पहले तक उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब डी रूपा कर्नाटक के धारवाड़ जिले की पुलिस अधीक्षक(एसपी) थीं। दरअसल, जब 2003 के चुनाव में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो उनके खिलाफ दस साल पुराने मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। उनके खिलाफ दस साल पुराने मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बेहद करीबी शशिकला ने उनके निधन के बाद पार्टी की कमान अपने हाथ में ले थी। हालांकि बाद में भ्रष्टाचार के केस में जेल जाना पड़ा। इस वक्त भी कर्नाटक की जेल में बंद हैं, जब डी रुपा डीआइजी जेल के पद पर रहीं तो 2017 में उन्होंने एआईएडीएमके नेता शशिकला को जेल में वीवीआइपी सुविधाएं मिलने का खुलासा किया था। डी रूपा की रिपोर्ट ने खलबली मचा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जेल के अधिकारियों ने दो करोड़ रुपये लेकर जेल के अंदर शशिकला के लिए किचेन बनवाई थी। इस खुलासे के बाद लेडी दबंग की चर्चा पूरे देश में हुई थी।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बेहद करीबी शशिकला ने उनके निधन के बाद पार्टी की कमान अपने हाथ में ले थी। हालांकि बाद में भ्रष्टाचार के केस में जेल जाना पड़ा। इस वक्त भी कर्नाटक की जेल में बंद हैं, जब डी रुपा डीआइजी जेल के पद पर रहीं तो 2017 में उन्होंने एआईएडीएमके नेता शशिकला को जेल में वीवीआइपी सुविधाएं मिलने का खुलासा किया था। डी रूपा की रिपोर्ट ने खलबली मचा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जेल के अधिकारियों ने दो करोड़ रुपये लेकर जेल के अंदर शशिकला के लिए किचेन बनवाई थी। इस खुलासे के बाद लेडी दबंग की चर्चा पूरे देश में हुई थी।

इतनी ही नहीं कर्नाटक की तेजतर्रार आइपीएस अफसरों में शुमार हैं रूपा फील्ड ही नहीं सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती हैं। जरूरी सम-सामयिक मुद्दों पर ट्वीट और पोस्ट लिखतीं रहतीं हैं। उनकी फैन फॉलोइंग भी लाखों में है। सोशल मीडिया पर वो सेल्फी आदि भी पोस्ट करती हैं। सिविल सेवा और पुलिस में जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए कर्नाटक की इस आईपीएस का संघर्ष और काम के लिए जुनून एक प्रेरणा है।

इतनी ही नहीं कर्नाटक की तेजतर्रार आइपीएस अफसरों में शुमार हैं रूपा फील्ड ही नहीं सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती हैं। जरूरी सम-सामयिक मुद्दों पर ट्वीट और पोस्ट लिखतीं रहतीं हैं। उनकी फैन फॉलोइंग भी लाखों में है। सोशल मीडिया पर वो सेल्फी आदि भी पोस्ट करती हैं। सिविल सेवा और पुलिस में जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए कर्नाटक की इस आईपीएस का संघर्ष और काम के लिए जुनून एक प्रेरणा है।

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