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अकेले गांव की पहरेदारी कर रही 23 साल की सरपंच, लॉकडाउन में बाहर निकलने वालों पर पड़ेगी 'लाठी'

First Published Apr 4, 2020, 4:51 PM IST
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हैदराबाद. कोरोना वायरस के खतरे को रोकने के लिए सरकार ने 21 दिनों के लॉक डाउन का ऐलान किया है। पूरे देश पर महामारी का खतरा मंडरा रहा है। लॉकडाउन के लिए शहरों में पुलिस तैनात है तो गांवों के बाहर ही पहरेदार बैठा दिए गए हैं। शहर पूरी तरह बंद हैं तो गावों में भी लोग लॉकडाउन का पालन करें इसके लिए सरपंच सामने आए हैं। इस बीच कई खबरें हौंसला बढ़ाने वाली भी है। एक युवा महिला सरपंच अपने गांव को कोरोना से बचाने के लिए खुद लाठी लेकर उतर आयी है। वो गांव के बाहर लाठी लेकर बैठ गयी है ताकि न कोई बाहर से आ पाये और ना ही कोई गांव से बाहर जा पाये।

महिला सरंपच का नाम है अखिला यादव।  मात्र 23 साल की ये युवा सरपंच बीएससी ग्रेजुएट हैं। अखिला अपने गांव के मुहाने पर हाथ में एक डंडा लेकर खड़ी हैं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। वो गांव के अन्दर बेवजह आने वालों को रोकने के लिए पहरा दे रही हैं। कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की शुरुआत में ही अखिला सावधान हो गई थीं और अपने गांव के बाहर बैरिकेड लगा दिए थे।

महिला सरंपच का नाम है अखिला यादव। मात्र 23 साल की ये युवा सरपंच बीएससी ग्रेजुएट हैं। अखिला अपने गांव के मुहाने पर हाथ में एक डंडा लेकर खड़ी हैं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। वो गांव के अन्दर बेवजह आने वालों को रोकने के लिए पहरा दे रही हैं। कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की शुरुआत में ही अखिला सावधान हो गई थीं और अपने गांव के बाहर बैरिकेड लगा दिए थे।

अखिला तेलंगाना के जिले नालगोंडा के मदंपुरम गांव की सरपंच हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, अखिला ने बताया कि लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में लोग आवाजाही कर रहे थे। उन्हें रोकने के लिए वो सुबह से लेकर दोपहर तक अपने गांव के बाहर एक छड़ी लेकर खड़ी रहती थीं। दोपहर में थोड़ा ब्रेक लेकर फिर वापस लौटती थीं फिर शाम तक वहीं रहती थीं।

अखिला तेलंगाना के जिले नालगोंडा के मदंपुरम गांव की सरपंच हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, अखिला ने बताया कि लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में लोग आवाजाही कर रहे थे। उन्हें रोकने के लिए वो सुबह से लेकर दोपहर तक अपने गांव के बाहर एक छड़ी लेकर खड़ी रहती थीं। दोपहर में थोड़ा ब्रेक लेकर फिर वापस लौटती थीं फिर शाम तक वहीं रहती थीं।

इंटरव्यू में अखिला ने बताया,  ‘पहले लोग लॉकडाउन को सीरियसली नहीं ले रहे थे, मैंने दूसरे गांव से लोगों को यहां पर बिना वजह आते देखा। इसलिए मैं गांव के अन्दर आने के रास्ते एक पर बैरिकेड लगाकर बैठ गई। मैं उनसे बाहर घूमने की वजह पूछती थी। ये भी कि वो गांव में क्यों आ रहे हैं? अगर उनके पास कोई अच्छी वजह होती थी, तो उन्हें अन्दर आने दिया जाता था, वरना मैं उनसे लौट जाने को कहती थी।

इंटरव्यू में अखिला ने बताया, ‘पहले लोग लॉकडाउन को सीरियसली नहीं ले रहे थे, मैंने दूसरे गांव से लोगों को यहां पर बिना वजह आते देखा। इसलिए मैं गांव के अन्दर आने के रास्ते एक पर बैरिकेड लगाकर बैठ गई। मैं उनसे बाहर घूमने की वजह पूछती थी। ये भी कि वो गांव में क्यों आ रहे हैं? अगर उनके पास कोई अच्छी वजह होती थी, तो उन्हें अन्दर आने दिया जाता था, वरना मैं उनसे लौट जाने को कहती थी।

अब लोगों को जानकारी हो गई है, और लॉकडाउन का भी सख्ती से पालन किया जा रहा है. तो अखिला ने बैरिकेड हटवा लिए हैं लेकिन गांव का राउंड अभी भी लगा रही हैं। अखिला का कहना है कि इसी समय ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है। गांव में एक व्यक्ति को भी इन्फेक्शन हुआ तो कई लोगों तक फ़ैल जाएगा।

अब लोगों को जानकारी हो गई है, और लॉकडाउन का भी सख्ती से पालन किया जा रहा है. तो अखिला ने बैरिकेड हटवा लिए हैं लेकिन गांव का राउंड अभी भी लगा रही हैं। अखिला का कहना है कि इसी समय ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है। गांव में एक व्यक्ति को भी इन्फेक्शन हुआ तो कई लोगों तक फ़ैल जाएगा।

अखिला गांव में यू हीं गांव में कोई नया व्यक्ति या नया वाहन देखती हैं तो पूछती ज़रूर हैं। गांव में 2000 के करीब मास्क बांटे गए हैं। अखिला खुद भी घरों के दरवाजों पर जाकर लोगों को जानकारी दे रही हैं। एक युवा पढ़ी-लिखी सरपंच से लोग ऐसी ही उम्मीद रखते हैं। अखिला खुद ये सुनिश्चित कर रही है कि कोई बाहर से आकर गांव में कोरोना वायरस न फैला जाये।

अखिला गांव में यू हीं गांव में कोई नया व्यक्ति या नया वाहन देखती हैं तो पूछती ज़रूर हैं। गांव में 2000 के करीब मास्क बांटे गए हैं। अखिला खुद भी घरों के दरवाजों पर जाकर लोगों को जानकारी दे रही हैं। एक युवा पढ़ी-लिखी सरपंच से लोग ऐसी ही उम्मीद रखते हैं। अखिला खुद ये सुनिश्चित कर रही है कि कोई बाहर से आकर गांव में कोरोना वायरस न फैला जाये।

गांव के लोगों ने बड़े भरोसे के साथ युवा अखिला को अपना सरपंच चुना था। मुसीबत की इस घड़ी में अखिला गांव को बचाने की जिम्मेवारी निभाने के लिए खुद आगे आयी हैं। गौरतलब है कि 22 मार्च से 31 मार्च तक लॉकडाउन का एलान करने वाले तेलंगाना में सरकार ने मंगलवार को घोषणा की है कि लॉकडाउन के दौरान पूरे सूबे में शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू रहेगा। तेलंगाना में रोजाना कोरोना के नये मामले सामने आ रहे हैं।

गांव के लोगों ने बड़े भरोसे के साथ युवा अखिला को अपना सरपंच चुना था। मुसीबत की इस घड़ी में अखिला गांव को बचाने की जिम्मेवारी निभाने के लिए खुद आगे आयी हैं। गौरतलब है कि 22 मार्च से 31 मार्च तक लॉकडाउन का एलान करने वाले तेलंगाना में सरकार ने मंगलवार को घोषणा की है कि लॉकडाउन के दौरान पूरे सूबे में शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू रहेगा। तेलंगाना में रोजाना कोरोना के नये मामले सामने आ रहे हैं।

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