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2 बेटियों और 1 बेटे के पिता हैं एआर रहमान, बचपन में ही सिर से उठ गया था पिता का साया तो ऐसे संभाला घर

First Published Jan 6, 2021, 9:00 AM IST
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मुंबई। ऑस्कर अवॉर्ड जीत म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान (AR Rehman) 54 साल के हो गए हैं। 6 जनवरी, 1967 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे रहमान का असली नाम दिलीप कुमार है। आज भले ही रहमान एक गाने को कम्पोज करने के बदले करोड़ों में फीस लेते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब वो पाई-पाई के लिए मोहताज थे। दरअसल, मिडल क्लास तमिल मुदलियार फैमिली में जन्मे रहमान के पिता आरके शेखर, तमिल और मलयालम फिल्मों के कम्पोजर थे। रहमान जब 9 साल के थे तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। ऐसे वक्त में फैमिली की सारी जिम्मेदारी रहमान के नाजुक कंधों पर आ गई थी। ऐसी है रहमान की फैमिली...
 

रहमान के बारे में तो लोग काफी कुछ जानते हैं लेकिन उनकी फैमिली के बारे में कम ही लोगों को पता है। रहमान की पत्नी का नाम सायरा बानो है। रहमान ने 12 मार्च, 1995 को सायरा से शादी की थी। शादी के वक्त रहमान की उम्र 27 जबकि सायरा की 21 साल थी। उनकी दो बेटियां खतीजा और रहीमा हैं, जबकि बेटे का नाम अमीन है।

रहमान के बारे में तो लोग काफी कुछ जानते हैं लेकिन उनकी फैमिली के बारे में कम ही लोगों को पता है। रहमान की पत्नी का नाम सायरा बानो है। रहमान ने 12 मार्च, 1995 को सायरा से शादी की थी। शादी के वक्त रहमान की उम्र 27 जबकि सायरा की 21 साल थी। उनकी दो बेटियां खतीजा और रहीमा हैं, जबकि बेटे का नाम अमीन है।

एआर रहमान कभी इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। इसके बावजूद आज उन्हें ही नहीं, बल्कि शायद ही किसी को अफसोस होगा कि उनका यह ख्वाब साकार नहीं हो सका। अगर हो जाता तो वे 'मद्रास के मोजार्ट' नहीं कहलाते, जैसा कि कभी टाइम मैगजीन ने उन्हें संबोधित किया था। बता दें कि मोजार्ट क्लासिक युग के ख्यात संगीतकार थे।

एआर रहमान कभी इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। इसके बावजूद आज उन्हें ही नहीं, बल्कि शायद ही किसी को अफसोस होगा कि उनका यह ख्वाब साकार नहीं हो सका। अगर हो जाता तो वे 'मद्रास के मोजार्ट' नहीं कहलाते, जैसा कि कभी टाइम मैगजीन ने उन्हें संबोधित किया था। बता दें कि मोजार्ट क्लासिक युग के ख्यात संगीतकार थे।

आज करोड़ों में खेलने वाले रहमान को अब भी वे 50 रुपए याद आते हैं, जो उन्हें रिकॉर्ड प्लेयर को ऑपरेट करने के बदले पहली बार मिले थे। 1992 में मणिरत्नम के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'रोजा' से रहमान का जो फिल्मी करियर शुरू हुआ, वह आसमान की बुलंदी को छूता हुआ 'स्लमडॉग मिलेनियर' तक पहुंचा। इसके लिए वे दो ऑस्कर जीतने में सफल रहे।

आज करोड़ों में खेलने वाले रहमान को अब भी वे 50 रुपए याद आते हैं, जो उन्हें रिकॉर्ड प्लेयर को ऑपरेट करने के बदले पहली बार मिले थे। 1992 में मणिरत्नम के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'रोजा' से रहमान का जो फिल्मी करियर शुरू हुआ, वह आसमान की बुलंदी को छूता हुआ 'स्लमडॉग मिलेनियर' तक पहुंचा। इसके लिए वे दो ऑस्कर जीतने में सफल रहे।

कम उम्र में ही पिता की मौत के बाद रहमान के घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। ऐसे में वो अपने पिता के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को किराए से देकर अपना घर चलाते थे। बाद में इस काम की कमान उनकी मां करीमा बेगम ने अपने हाथ में ले ली थी। चूंकि रहमान एक बेहतर की-बोर्ड प्लेयर थे। साथ ही वो कई मौकों पर म्यूजिक बैंड का बंदोबस्त भी करा देते थे। 

कम उम्र में ही पिता की मौत के बाद रहमान के घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। ऐसे में वो अपने पिता के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स को किराए से देकर अपना घर चलाते थे। बाद में इस काम की कमान उनकी मां करीमा बेगम ने अपने हाथ में ले ली थी। चूंकि रहमान एक बेहतर की-बोर्ड प्लेयर थे। साथ ही वो कई मौकों पर म्यूजिक बैंड का बंदोबस्त भी करा देते थे। 

घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ ही रहमान पढ़ाई भी करते थे। लेकिन स्कूल और काम के बीच तालमेल बिठाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। यही वजह है कि स्कूल में अटेंडेंस कम होने के चलते 15 साल की उम्र में ही रहमान को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी।

घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ ही रहमान पढ़ाई भी करते थे। लेकिन स्कूल और काम के बीच तालमेल बिठाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। यही वजह है कि स्कूल में अटेंडेंस कम होने के चलते 15 साल की उम्र में ही रहमान को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी।

रहमान का जन्म एक हिंदू फैमिली में हुआ था लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर अल्ला रक्खा रहमान रख लिया। कहा जाता है कि 1989 में रहमान की छोटी बहन काफी बीमार पड़ गई थी। डॉक्टरों ने उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। इसके बाद रहमान ने अपनी बहन के लिए मस्जिदों में दुआएं मांगी और जल्द ही उनकी दुआ रंग लाई और बहन ठीक हो गई। इस चमत्कार को देख रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया था। हालांकि एआर रहमान की बायोग्राफी 'द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक' में बताया गया है कि एक ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदला था।

रहमान का जन्म एक हिंदू फैमिली में हुआ था लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर अल्ला रक्खा रहमान रख लिया। कहा जाता है कि 1989 में रहमान की छोटी बहन काफी बीमार पड़ गई थी। डॉक्टरों ने उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। इसके बाद रहमान ने अपनी बहन के लिए मस्जिदों में दुआएं मांगी और जल्द ही उनकी दुआ रंग लाई और बहन ठीक हो गई। इस चमत्कार को देख रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया था। हालांकि एआर रहमान की बायोग्राफी 'द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक' में बताया गया है कि एक ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदला था।

वहीं एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अपना नाम अच्छा नहीं लगता था। एक दिन जब उनकी मां बहन की कुंडली दिखाने ज्योतिष के पास गई तो उस ज्योतिष ने ही उन्हें नाम बदलने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने अपना नाम दिलीप से बदलकर एआर रहमान रख लिया।

वहीं एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अपना नाम अच्छा नहीं लगता था। एक दिन जब उनकी मां बहन की कुंडली दिखाने ज्योतिष के पास गई तो उस ज्योतिष ने ही उन्हें नाम बदलने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने अपना नाम दिलीप से बदलकर एआर रहमान रख लिया।

दिलचस्प बात ये है कि रहमान और उनके बेटे अमीन का बर्थडे एक ही दिन आता है। रहमान के भले ही दुनियाभर में करोड़ों फैंस हैं, लेकिन उनकी बेटी खतीजा को स्कूल में पापा का ऑटोग्राफ देना पसंद नहीं आता है।

दिलचस्प बात ये है कि रहमान और उनके बेटे अमीन का बर्थडे एक ही दिन आता है। रहमान के भले ही दुनियाभर में करोड़ों फैंस हैं, लेकिन उनकी बेटी खतीजा को स्कूल में पापा का ऑटोग्राफ देना पसंद नहीं आता है।

रहमान हमेशा रात 12 बजे के बाद ही रिकॉर्डिग करते हैं। हालांकि लता मंगेशकर के लिए उन्होंने अपना नियम बदला था और उनके साथ सुबह रिकॉर्डिग की थी। लता मंगशेकर का मानना है कि सुबह उनकी आवाज में ताजगी होती है इसलिए रहमान ने उनके साथ सुबह रिकॉर्डिग की थी।

रहमान हमेशा रात 12 बजे के बाद ही रिकॉर्डिग करते हैं। हालांकि लता मंगेशकर के लिए उन्होंने अपना नियम बदला था और उनके साथ सुबह रिकॉर्डिग की थी। लता मंगशेकर का मानना है कि सुबह उनकी आवाज में ताजगी होती है इसलिए रहमान ने उनके साथ सुबह रिकॉर्डिग की थी।

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