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जावेद अख्तर ने मस्जिदें बंद करने के लिए किया फतवे का सपोर्ट, भड़के लोगों ने लगा दी क्लास

First Published Mar 31, 2020, 4:31 PM IST
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मुंबई। देशभर में चल रहे 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच जावेद अख्तर मंगलवार को उस वक्त सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए, जब उन्होंने मस्जिदें बंद करने के लिए फतवे का समर्थन कर दिया। जावेद अख्तर ने सोमवार को एक ट्वीट करते हुए लिखा कि मस्जिदें बंद करने के लिए मैं फतवा जारी करने की मांग का सपोर्ट करता हूं। इसके बाद तो भड़के लोगों ने जावेद अख्तर की क्लास लगा दी। 
 

जावेद अख्तर ने ट्वीट में लिखा, 'अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद ने दारुल उलूम देवबंद से एक फतवा जारी कर कोरोना संकट के रहने तक सभी मस्जिदों को बंद करने का आदेश देने के लिए कहा है। मैं उनकी मांग का पूरी तरह से सपोर्ट करता हूं। अगर काबा और मदीना की मस्जिदें बंद हो सकती हैं, तो भारतीय मस्जिदें क्यों नहीं?'

जावेद अख्तर ने ट्वीट में लिखा, 'अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद ने दारुल उलूम देवबंद से एक फतवा जारी कर कोरोना संकट के रहने तक सभी मस्जिदों को बंद करने का आदेश देने के लिए कहा है। मैं उनकी मांग का पूरी तरह से सपोर्ट करता हूं। अगर काबा और मदीना की मस्जिदें बंद हो सकती हैं, तो भारतीय मस्जिदें क्यों नहीं?'

जावेद अख्तर का ट्वीट देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भड़क उठे। एक यूजर ने कहा- 'आखिर ऐसा क्यों है कि भारत की सभी मस्जिदों को बंद करने के लिए हमें फतवे की जरूरत पड़ती है और सरकार का अनुरोध या आदेश पर्याप्त नहीं है?'

जावेद अख्तर का ट्वीट देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भड़क उठे। एक यूजर ने कहा- 'आखिर ऐसा क्यों है कि भारत की सभी मस्जिदों को बंद करने के लिए हमें फतवे की जरूरत पड़ती है और सरकार का अनुरोध या आदेश पर्याप्त नहीं है?'

एक और यूजर ने कमेंट करते हुए पूछा, 'फतवा क्यों, क्या हम मध्यकाल में जी रहे हैं? क्यों आप सिर्फ देश के कानूनों का पालन नहीं कर सकते?'

एक और यूजर ने कमेंट करते हुए पूछा, 'फतवा क्यों, क्या हम मध्यकाल में जी रहे हैं? क्यों आप सिर्फ देश के कानूनों का पालन नहीं कर सकते?'

एक और शख्स ने लिखा- साब जी, भारतीय नागरिक सरकारी आदेशों का पालन करते है, ये किस रेगिस्तान के 1400 साल पुराने पत्थर युग के फतवो पे पहुच गए, एकाद फतवा कोरोना पे ही निकाल दो, 5 क्या 10 नमाज़ अदा कर दो, शायद वायरस मान जाए।

एक और शख्स ने लिखा- साब जी, भारतीय नागरिक सरकारी आदेशों का पालन करते है, ये किस रेगिस्तान के 1400 साल पुराने पत्थर युग के फतवो पे पहुच गए, एकाद फतवा कोरोना पे ही निकाल दो, 5 क्या 10 नमाज़ अदा कर दो, शायद वायरस मान जाए।

एक शख्स ने लिखा- जावेद साब ये कहना चाहते है कि उनकी जमात सरकार के कहने पे नही पर फतवो पे चलेगी...।

एक शख्स ने लिखा- जावेद साब ये कहना चाहते है कि उनकी जमात सरकार के कहने पे नही पर फतवो पे चलेगी...।

एक शख्स ने जावेद अख्तर को जवाब देते हुए लिखा- यह तो ये तथाकथित नास्तिक महोदय भी मानते हैं कि इनके मजहब के लोग देश के प्रधानमंत्री, कानून से ऊपर अपने मुल्ले मौलानाओं को मानते हैं। जब देश के बाकी लोग प्रधानमंत्री की अपील पर अपने घरों में बैठे है इन लोगों को ऐसा करने के लिए फतवे का इंतजार है।

एक शख्स ने जावेद अख्तर को जवाब देते हुए लिखा- यह तो ये तथाकथित नास्तिक महोदय भी मानते हैं कि इनके मजहब के लोग देश के प्रधानमंत्री, कानून से ऊपर अपने मुल्ले मौलानाओं को मानते हैं। जब देश के बाकी लोग प्रधानमंत्री की अपील पर अपने घरों में बैठे है इन लोगों को ऐसा करने के लिए फतवे का इंतजार है।

एक यूजर ने कमेंट करते हुए पूछा, 'फतवा क्यों, सरकार ने पहले ही तालाबंदी के आदेश दे दिए थे। क्या सरकार का आदेश लोगों के लिए मान्य नहीं है?'

एक यूजर ने कमेंट करते हुए पूछा, 'फतवा क्यों, सरकार ने पहले ही तालाबंदी के आदेश दे दिए थे। क्या सरकार का आदेश लोगों के लिए मान्य नहीं है?'

इस पर जावेद अख्तर ने जवाब देते हुए लिखा, 'कुछ सामान्य बुद्धि और धैर्य रखो भाई, क्या आप ये नहीं देखना चाहते कि वे इस अनुरोध पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। कम से कम मैं तो ये जानने के लिए उत्सुक हूं।'

इस पर जावेद अख्तर ने जवाब देते हुए लिखा, 'कुछ सामान्य बुद्धि और धैर्य रखो भाई, क्या आप ये नहीं देखना चाहते कि वे इस अनुरोध पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। कम से कम मैं तो ये जानने के लिए उत्सुक हूं।'

बता दें कि जावेद अख्तर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर भी विरोध जता चुके हैं।

बता दें कि जावेद अख्तर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर भी विरोध जता चुके हैं।

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