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जब क्लास बंक करके सरेआम ये काम कर रहा था एक्टर तब दादी ने पकड़ा था रंगे हाथ, मिली थी ऐसी सजा

First Published Oct 6, 2020, 9:24 AM IST
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मुंबई. बॉलीवुड में चरित्र कलाकारों की भूमिका उस समय से हो रही है, जबसे फिल्मों की शुरुआत हुई है। हमेशा से फिल्मों के लीड एक्टर के इर्द-गिर्द घूमते कुछ ऐसे चेहरे रहे हैं, जो फिल्म में एक अहमियत तो रखते ही हैं साथ ही फैंस का ढेर सारा प्यार भी पाते हैं। कैरेक्टर एक्टर्स की हिंदी सिनेमा जगत में कमी नहीं है, मगर मौजूदा समय में अगर कोई इसका सबसे बड़ा चेहरा है तो निसंदेह संजय मिश्रा का नाम लिया जाता है। उनके बारे में ये सारी बातें उनके बर्थडे के मौके पर बता रहे हैं।

अपनी एक्टिंग और कॉमेडी के लिए जाने जाने वाले संजय मिश्रा का जन्म  6 अक्टूबर 1963 को बिहार के दरभंगा में हुआ था। सपोर्टिंग रोल के तौर पर उन्होंने खूब वाहवाही लूटी। ऐसे में उनके बर्थडे के मौके पर आइए जानते उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें।

अपनी एक्टिंग और कॉमेडी के लिए जाने जाने वाले संजय मिश्रा का जन्म  6 अक्टूबर 1963 को बिहार के दरभंगा में हुआ था। सपोर्टिंग रोल के तौर पर उन्होंने खूब वाहवाही लूटी। ऐसे में उनके बर्थडे के मौके पर आइए जानते उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें।

बताया जाता है कि बचपन में संजय मिश्रा बड़े शरारती थे और उन्हें पढ़ना-लिखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। वो घर से स्कूल के लिए निकलते थे मगर रोज कोई ना कोई बहाना बना कर वापस आ जाते थे। एक बार वो स्कूल से बंक मार कर पान बना रहे थे उनकी दादी ने उन्हें देख लिया। 

बताया जाता है कि बचपन में संजय मिश्रा बड़े शरारती थे और उन्हें पढ़ना-लिखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। वो घर से स्कूल के लिए निकलते थे मगर रोज कोई ना कोई बहाना बना कर वापस आ जाते थे। एक बार वो स्कूल से बंक मार कर पान बना रहे थे उनकी दादी ने उन्हें देख लिया। 

संजय मिश्रा की दादी ने उनको तो डांटा ही साथ ही उन्होंने पान वाले की भी क्लास लगा दी और उसकी गुमटी उस जगह से हटवा दी। इसी तरह वो हमेशा क्लास में बंक मारा करते थे।

संजय मिश्रा की दादी ने उनको तो डांटा ही साथ ही उन्होंने पान वाले की भी क्लास लगा दी और उसकी गुमटी उस जगह से हटवा दी। इसी तरह वो हमेशा क्लास में बंक मारा करते थे।

संजय मिश्रा ने अपने जीवन में ये बहुत पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें कोई कुछ नहीं सिखाएगा। वो खुद अपने आप से सीखेंगे जो कुछ भी सीखेंगे। इसलिए, पढ़ाई तो क्या नौकरी में भी उनका मन नहीं लगा। यहां तक कि एनएसडी से भी उन्हें उनके रवैये के चलते निकाल दिया गया था।

संजय मिश्रा ने अपने जीवन में ये बहुत पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें कोई कुछ नहीं सिखाएगा। वो खुद अपने आप से सीखेंगे जो कुछ भी सीखेंगे। इसलिए, पढ़ाई तो क्या नौकरी में भी उनका मन नहीं लगा। यहां तक कि एनएसडी से भी उन्हें उनके रवैये के चलते निकाल दिया गया था।

एक वक्त ऐसा भी था जब संजय मिश्रा के पिता उनसे काफी नाउम्मीद हो गए थे। फिर ऐसा वक्त आया जब संजय मिश्रा को फिल्मों में काम मिलने लगा। मगर, संजय मिश्रा को इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करने के लिए बहुत लंबा वक्त लगा। संजय मिश्रा ने साल 1995 में फिल्म 'ओ डॉर्लिंग ये है इंडिया' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। 

एक वक्त ऐसा भी था जब संजय मिश्रा के पिता उनसे काफी नाउम्मीद हो गए थे। फिर ऐसा वक्त आया जब संजय मिश्रा को फिल्मों में काम मिलने लगा। मगर, संजय मिश्रा को इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करने के लिए बहुत लंबा वक्त लगा। संजय मिश्रा ने साल 1995 में फिल्म 'ओ डॉर्लिंग ये है इंडिया' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। 

इसके बाद उन्होंने 'वजूद', 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी', 'अलबेला', 'साथिया', 'चरस', 'गोलमाल', 'टशन', 'सी कंपनी' और 'फंस गए रे ओबामा' जैसी फिल्मों में काम किया। मगर उन्हें असली पहचान मिली फिल्म 'आंखों देखी से।' उन्हें पहचान 'अंग्रेजी में कहते हैं', 'कड़वी हवा', 'अनारकली ऑफ आरह', 'मसान', 'न्यूटन', 'कामयाब', 'तानाजी', 'जबरिया जोड़ी' जैसी फिल्मों से मिली। इन फिल्मों में संजय मिश्रा की एक्टिंग को खूब पसंद किया गया है। 

इसके बाद उन्होंने 'वजूद', 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी', 'अलबेला', 'साथिया', 'चरस', 'गोलमाल', 'टशन', 'सी कंपनी' और 'फंस गए रे ओबामा' जैसी फिल्मों में काम किया। मगर उन्हें असली पहचान मिली फिल्म 'आंखों देखी से।' उन्हें पहचान 'अंग्रेजी में कहते हैं', 'कड़वी हवा', 'अनारकली ऑफ आरह', 'मसान', 'न्यूटन', 'कामयाब', 'तानाजी', 'जबरिया जोड़ी' जैसी फिल्मों से मिली। इन फिल्मों में संजय मिश्रा की एक्टिंग को खूब पसंद किया गया है। 

फोटो सोर्स- गूगल।

फोटो सोर्स- गूगल।

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