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पिता की मौत के बाद बेहद गरीबी में बीता बुमराह का बचपन, आज मिलती है इतने करोड़ की सैलरी

First Published Mar 4, 2021, 11:55 AM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क: भारत और इंग्लैंड के बीच आखिरी टेस्ट मैच 4 मार्च से शुरू हो गया। इस मैच से पहले ही क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह ने शादी की वजह से अपना नाम वापस ले लिया था। जल्द दूल्हा बनने जा रहे बुमराह आज भारत के सफल क्रिकेटर्स में से एक हैं। लेकिन इनके सफलता की कहानी  संघर्ष से भरी है। बुमराह के पास कभी जूते तक खरीदने के पैसे नहीं थे  लेकिन आज अपने परिवार को अच्छी जिंदगी दे रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे मेहनत कर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए बुमराह... 

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज बल्लेबाज बुमराह अपने धारदार गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अभी तक के करियर में 19 टेस्ट, 67 वनडे और 50 ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेले हैं। अब 27 के हो चुके बुमराह ने मात्र 14 साल की उम्र में ही क्रिकेटर बनने का फैसला कर लिया था। 
 

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज बल्लेबाज बुमराह अपने धारदार गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अभी तक के करियर में 19 टेस्ट, 67 वनडे और 50 ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेले हैं। अब 27 के हो चुके बुमराह ने मात्र 14 साल की उम्र में ही क्रिकेटर बनने का फैसला कर लिया था। 
 

टीम इंडिया को वर्ल्ड कप दिलाने वाले कोच जॉन राइट ने ही बुमराह के टैलेंट को पहचान कर उन्हें मुंबई इंडियंस में जगह दी थी। इसके बाद बुमराह ने पीछे नहीं देखा। अपने जबरदस्त प्रदर्शन से आज वो टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ियों में एक हैं। 

टीम इंडिया को वर्ल्ड कप दिलाने वाले कोच जॉन राइट ने ही बुमराह के टैलेंट को पहचान कर उन्हें मुंबई इंडियंस में जगह दी थी। इसके बाद बुमराह ने पीछे नहीं देखा। अपने जबरदस्त प्रदर्शन से आज वो टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ियों में एक हैं। 

एक इंटरव्यू में बुमराह ने अपनी लाइफ के स्ट्रगल को लोगों के साथ शेयर किया था। इसमें उन्होंने बताया था कि मात्र 5 साल की उम्र में सिर से पिता का साया हट जाने के बाद उन्हें कितनी परेशानी हुई थी। उनकी मां और बड़ी बहन ने उन्हें पालकर बड़ा किया। 
 

एक इंटरव्यू में बुमराह ने अपनी लाइफ के स्ट्रगल को लोगों के साथ शेयर किया था। इसमें उन्होंने बताया था कि मात्र 5 साल की उम्र में सिर से पिता का साया हट जाने के बाद उन्हें कितनी परेशानी हुई थी। उनकी मां और बड़ी बहन ने उन्हें पालकर बड़ा किया। 
 

किसी समय में बुमराह के पास सिर्फ एक जोड़ी कपड़े थे। साथ ही एक जूते का पेयर था। वो इसी को धोते और फिर सुखाकर पहनते थे। उनके पास दूसरा सेट खरीदने के पैसे नहीं थे। संघर्ष की ऐसी कहानियां प्रेरणा देती है लेकिन जब खुद पर बीतती है तब तकलीफ होती है। 
 

किसी समय में बुमराह के पास सिर्फ एक जोड़ी कपड़े थे। साथ ही एक जूते का पेयर था। वो इसी को धोते और फिर सुखाकर पहनते थे। उनके पास दूसरा सेट खरीदने के पैसे नहीं थे। संघर्ष की ऐसी कहानियां प्रेरणा देती है लेकिन जब खुद पर बीतती है तब तकलीफ होती है। 
 

बुमराह को पहली बार मैच खेलते देखते हुए उनकी मां रो पड़ी थीं। अपने बेटे को बड़े संघर्ष से पालने के बाद जब मैदान पर खेलते देखा था तब उन्हें अपने पति की याद आ गई थी। 

बुमराह को पहली बार मैच खेलते देखते हुए उनकी मां रो पड़ी थीं। अपने बेटे को बड़े संघर्ष से पालने के बाद जब मैदान पर खेलते देखा था तब उन्हें अपने पति की याद आ गई थी। 

बुमराह अपने संघर्ष के समय को याद करते हुए बताते हैं कि उस समय एक-एक पैसे के लिए वो मोहताज थे। लेकिन उन्होंने  मेहनत करना नहीं छोड़ा। कभी मेहनत करने से मुंह नहीं मोड़ा। सब सोए रहते थे तभी बुमराह प्रैक्टिस पर निकल जाते थे। 

बुमराह अपने संघर्ष के समय को याद करते हुए बताते हैं कि उस समय एक-एक पैसे के लिए वो मोहताज थे। लेकिन उन्होंने  मेहनत करना नहीं छोड़ा। कभी मेहनत करने से मुंह नहीं मोड़ा। सब सोए रहते थे तभी बुमराह प्रैक्टिस पर निकल जाते थे। 

कभी पैसों की कमी देखने वाले बुमराह आज 14 करोड़ रूपये सैलरी पाते हैं। उन्हें बीसीसआई की तरफ से 7 करोड़ तो मुंबई इंडियंस की भी तरफ से 7 करोड़ रूपए सैलरी मिलती है।  
 

कभी पैसों की कमी देखने वाले बुमराह आज 14 करोड़ रूपये सैलरी पाते हैं। उन्हें बीसीसआई की तरफ से 7 करोड़ तो मुंबई इंडियंस की भी तरफ से 7 करोड़ रूपए सैलरी मिलती है।  
 

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