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IND vs AUS: पिता मजदूर-मां बेचती थी मुर्गियां, आज बेटे ने टेस्ट डेब्यू करते ही रचा इतिहास

First Published Jan 15, 2021, 2:29 PM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क : इंडिया-ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS) सीरीज में एक नेट गेंदबाज के रूप में एंट्री करने वाले टी नटराजन ने इस पूरे दौरे में कई कारनामे कर दिखाए। उन्हें ना सिर्फ टी 20 और वनडे बल्कि टेस्ट में भी डेब्यू का मौका भी मिला है। इसके साथ ही नटराजन (T Natarajan) किसी एक दौरे पर तीनों फॉर्मेट में डेब्यू करने वाले इंडिया के पहले खिलाड़ी बने है। साथ ही वह इंडिया की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 300वें खिलाड़ी हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि पिछले साल आईपीएल स्टार के रूप में चमका ये सितारे आने वाले क्रिकेट का भविष्य हैं। लेकिन अगर उनके अबतक के सफर पर नजर डालें, तो उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। आइए आज आपको बताते हैं इस खिलाड़ी की फर्श से अर्श तक की कहानी..

ऐसे लोग सबके लिए प्रेरणास्रोत होते है, जो गरीबी और बेबसी से निकलकर मेहनत और लगन से अपने सपनों को साकार करते हैं। उन्हीं में से एक है थंगरासू नटराजन, जिन्होंने न केवल अपनी यॉर्कर गेंद से सभी को प्रभावित किया बल्कि एक इतिहास भी रच दिया।

ऐसे लोग सबके लिए प्रेरणास्रोत होते है, जो गरीबी और बेबसी से निकलकर मेहनत और लगन से अपने सपनों को साकार करते हैं। उन्हीं में से एक है थंगरासू नटराजन, जिन्होंने न केवल अपनी यॉर्कर गेंद से सभी को प्रभावित किया बल्कि एक इतिहास भी रच दिया।

दरअसल, टी नटराजन ऑस्ट्रेलिया दौरे में पहले ऐसे खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने एक सीरीज में तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया हो। इसके साथ ही वो  इंडिया की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 300वें खिलाड़ी बने हैं।

दरअसल, टी नटराजन ऑस्ट्रेलिया दौरे में पहले ऐसे खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने एक सीरीज में तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया हो। इसके साथ ही वो  इंडिया की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 300वें खिलाड़ी बने हैं।

महज 44 दिन के अंदर नटराजन ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेल लिया है। उनसे आगे न्यूजीलैंड के पीटर इनग्राम हैं, जिन्होंने सबसे कम 12 दिन के अंदर तीनों प्रारूपों में मैच खेला था।

महज 44 दिन के अंदर नटराजन ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेल लिया है। उनसे आगे न्यूजीलैंड के पीटर इनग्राम हैं, जिन्होंने सबसे कम 12 दिन के अंदर तीनों प्रारूपों में मैच खेला था।

बता दें कि इस पूरी सीरीज में भारत के कई खिलाड़ी चोटिल हो गए हैं। सिडनी टेस्ट में चोटिल होने के बाद रविचंद्रन अश्विन और हनुमा विहारी चौथे टेस्ट से बाहर हैं जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी चोट के कारण यह टेस्ट नहीं खेल सके। इस कारण नटराजन को टीम में आने का मौका मिला। 

बता दें कि इस पूरी सीरीज में भारत के कई खिलाड़ी चोटिल हो गए हैं। सिडनी टेस्ट में चोटिल होने के बाद रविचंद्रन अश्विन और हनुमा विहारी चौथे टेस्ट से बाहर हैं जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी चोट के कारण यह टेस्ट नहीं खेल सके। इस कारण नटराजन को टीम में आने का मौका मिला। 

सिर्फ 4 महीने में इस खिलाड़ी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। सिर्फ खेल में ही नहीं बल्कि परिवार में भी लक्ष्मी का आगमन हुआ है। जी हां, पिछले साल नवंबर में आईपीएल के दौरान ही नटराजन पिता बने हैं।

सिर्फ 4 महीने में इस खिलाड़ी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। सिर्फ खेल में ही नहीं बल्कि परिवार में भी लक्ष्मी का आगमन हुआ है। जी हां, पिछले साल नवंबर में आईपीएल के दौरान ही नटराजन पिता बने हैं।

पिता बनने के बाद उनकी किस्मत और मेहनत ने रंग दिखाया और तमिलनाडू के छोटे से कस्बे से आए 29 साल के इस खिलाड़ी ने इंटरनेशल क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ दी।

पिता बनने के बाद उनकी किस्मत और मेहनत ने रंग दिखाया और तमिलनाडू के छोटे से कस्बे से आए 29 साल के इस खिलाड़ी ने इंटरनेशल क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ दी।

कहते है ना अगर सच्ची मेहनत और लगन से कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। ये बात नटराजन ने सच साबित करके दिखाई, क्योंकि एक समय ऐसा था जब उनके पास बॉल खरीदने के पैसे तक नहीं थे। 

कहते है ना अगर सच्ची मेहनत और लगन से कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। ये बात नटराजन ने सच साबित करके दिखाई, क्योंकि एक समय ऐसा था जब उनके पास बॉल खरीदने के पैसे तक नहीं थे। 

नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर थे और उनकी मां सड़क के किनारे मुर्गियां बेचा करती थी। लेकिन इस खिलाड़ी की कड़ी मेहनत और लगन से ना सिर्फ उनके माता पिता को आगे कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ी, बल्कि उनकी बहनों को अच्छी शिक्षा भी मिली।

नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर थे और उनकी मां सड़क के किनारे मुर्गियां बेचा करती थी। लेकिन इस खिलाड़ी की कड़ी मेहनत और लगन से ना सिर्फ उनके माता पिता को आगे कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ी, बल्कि उनकी बहनों को अच्छी शिक्षा भी मिली।

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