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ऑस्ट्रेलिया में कंगारुओं को धूल चटाने के बाद मंदिर पहुंचा ये खिलाड़ी, किया बड़ा दान

First Published Feb 1, 2021, 3:06 PM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क : इंडिया-ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS) सीरीज में एक नेट गेंदबाज के रूप में एंट्री करने वाले टी नटराजन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में कई कारनामे कर दिखाए। उन्हें ना सिर्फ टी 20 और वनडे बल्कि टेस्ट में भी डेब्यू का मौका भी मिला है। इसके साथ ही नटराजन (T Natarajan) किसी एक दौरे पर तीनों फॉर्मेट में डेब्यू करने वाले इंडिया के पहले खिलाड़ी बने है। अपनी जीत के बाद भारत लौटे कर नटराजन तमिलनाडु के पलानी मुरुगन मंदिर (palani murugan temple) में मथ्था टेकने पहुंचे और अपने बाल दान किए। सोशल मीडिया पर नटराजन ने तस्वीर शेयर की है जिसमें वो मंदिर के दर्शन करते हुए दिखे हैं और साथ ही उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया है।

थंगरासू नटराजन, जिन्होंने न केवल अपनी यॉर्कर गेंद से सभी को प्रभावित किया बल्कि एक इतिहास भी रच दिया। दरअसल, नटराजन ऑस्ट्रेलिया दौरे में पहले ऐसे खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने एक सीरीज में तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया हो। 

थंगरासू नटराजन, जिन्होंने न केवल अपनी यॉर्कर गेंद से सभी को प्रभावित किया बल्कि एक इतिहास भी रच दिया। दरअसल, नटराजन ऑस्ट्रेलिया दौरे में पहले ऐसे खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने एक सीरीज में तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया हो। 

शांत और सरल स्वभाव वाले नटराजन के लिए ये किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं था। नेट गेंदबाज के रूप में ऑस्ट्रेलिया जाने वाले नट्टू ने कभी भी सोचा नहीं होगा कि एक ही दौरे में उन्हें इतना बड़ा कारनामा करने का मौका मिलेगा। 

शांत और सरल स्वभाव वाले नटराजन के लिए ये किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं था। नेट गेंदबाज के रूप में ऑस्ट्रेलिया जाने वाले नट्टू ने कभी भी सोचा नहीं होगा कि एक ही दौरे में उन्हें इतना बड़ा कारनामा करने का मौका मिलेगा। 

अपनी इसी मन्नत के पूरा होने के बाद टी नटराजन तमिलनाडु के पलानी मुरुगन मंदिर पहुंचे। सोशल मीडिया पर मंदिर के बाहर खड़े होकर उन्होंने अपनी फोटो शेयर की और लिखा कि 'अच्छा महसूस कर रहा हूं।'

अपनी इसी मन्नत के पूरा होने के बाद टी नटराजन तमिलनाडु के पलानी मुरुगन मंदिर पहुंचे। सोशल मीडिया पर मंदिर के बाहर खड़े होकर उन्होंने अपनी फोटो शेयर की और लिखा कि 'अच्छा महसूस कर रहा हूं।'

बता दें कि महज 44 दिन के अंदर नटराजन ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेल लिया है। उनसे आगे न्यूजीलैंड के पीटर इनग्राम हैं, जिन्होंने सबसे कम 12 दिन के अंदर तीनों फॉर्मेट में मैच खेला था।

बता दें कि महज 44 दिन के अंदर नटराजन ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेल लिया है। उनसे आगे न्यूजीलैंड के पीटर इनग्राम हैं, जिन्होंने सबसे कम 12 दिन के अंदर तीनों फॉर्मेट में मैच खेला था।

बता दें कि इस पूरी सीरीज में भारत के कई खिलाड़ी चोटिल हो गए थे। सिडनी टेस्ट में चोटिल होने के बाद रविचंद्रन अश्विन और हनुमा विहारी चौथे टेस्ट से बाहर हो गए थे, जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी चोट के कारण टेस्ट नहीं खेल सके। इस कारण नटराजन को टीम में आने का मौका मिला।

बता दें कि इस पूरी सीरीज में भारत के कई खिलाड़ी चोटिल हो गए थे। सिडनी टेस्ट में चोटिल होने के बाद रविचंद्रन अश्विन और हनुमा विहारी चौथे टेस्ट से बाहर हो गए थे, जबकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी चोट के कारण टेस्ट नहीं खेल सके। इस कारण नटराजन को टीम में आने का मौका मिला।

सिर्फ 4 महीने में इस खिलाड़ी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। सिर्फ खेल में ही नहीं बल्कि परिवार में भी लक्ष्मी का आगमन हुआ है। जी हां, पिछले साल नवंबर में आईपीएल के दौरान ही नटराजन पिता बने हैं।

सिर्फ 4 महीने में इस खिलाड़ी की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। सिर्फ खेल में ही नहीं बल्कि परिवार में भी लक्ष्मी का आगमन हुआ है। जी हां, पिछले साल नवंबर में आईपीएल के दौरान ही नटराजन पिता बने हैं।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने पहले वनडे मैच में उन्होंने 2 विकेट लिए थे। इसके बाद 3 टी-20 मैचों की सीरीज में नटराजन ने 6 विकेट चटकाए। वहीं 2 टेस्ट मैचों में उन्होंने 3 विकेट अपने नाम किए। बुमराह, शमी और अश्विन के न होने के बाद भी नटराजन ने भारतीय गेंदबाजी को कमजोर नहीं होने दिया।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने पहले वनडे मैच में उन्होंने 2 विकेट लिए थे। इसके बाद 3 टी-20 मैचों की सीरीज में नटराजन ने 6 विकेट चटकाए। वहीं 2 टेस्ट मैचों में उन्होंने 3 विकेट अपने नाम किए। बुमराह, शमी और अश्विन के न होने के बाद भी नटराजन ने भारतीय गेंदबाजी को कमजोर नहीं होने दिया।

कहते है ना अगर सच्ची मेहनत और लगन से कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। ये बात नटराजन ने सच साबित करके दिखाई, क्योंकि एक समय ऐसा था जब उनके पास बॉल खरीदने के पैसे तक नहीं थे। नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर थे और उनकी मां सड़क के किनारे मुर्गियां बेचा करती थी।

कहते है ना अगर सच्ची मेहनत और लगन से कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। ये बात नटराजन ने सच साबित करके दिखाई, क्योंकि एक समय ऐसा था जब उनके पास बॉल खरीदने के पैसे तक नहीं थे। नटराजन के पिता दिहाड़ी मजदूर थे और उनकी मां सड़क के किनारे मुर्गियां बेचा करती थी।

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