शाह को मात देने और तीसरी बार सीएम बनने केजरीवाल ने बनाई थी 6 धांसू स्ट्रेटजी
नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के मंगलवार को नतीजे आए। इसमें आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत हुई। इस जीत का सेहरा पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिर पर बंध रहा है। इसी के साथ केजरीवाल का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है। अब यह कहा जा रहा है कि केजरीवाल की स्ट्रेटजी के सामने अमित शाह और भाजपा की रणनीति फेल हो गई। आईए जानते हैं कि किस प्लान के साथ केजरीवाल ने लगातार तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाई।
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1- 'फ्री' वाला प्लान सफल: आप सरकार ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले 200 यूनिट फ्री बिजली, इसके बाद पानी का बिल माफ, फिर महिलाओं के लिए बसों और मेट्रो में फ्री यात्रा का ऐलान किया। इसके चलते चुनाव ऐलान के बाद भाजपा और कांग्रेस भी इस 'फ्री' वाले चुनाव में कूंदना पड़ा। भाजपा ने जहां बिजली फ्री को जारी रखने का वादा किया तो कांग्रेस ने 100 यूनिट और फ्री देने का ऐलान किया। हालांकि, जनता ने आप के वादों पर भरोसा किया।
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2- कैंपेन स्ट्रेटजी: दिल्ली में चुनाव से पहले ही केजरीवाल ने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर का हाथ थामा। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने नवंबर में रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इसे डोर टू डोर कैंपेन से लोगों तक पहुंचाया गया। इसके बाद पार्टी ने 'लगे रहो केजरीवाल' सॉन्ग जारी किया। इसे करीब 8000 इवेंट में बजाया गया और दिल्ली की जनता में यह खूब फेमस हुआ।
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3- विकास के मुद्दे पर लड़ा चुनाव: अरविंद केजरीवाल और आप ने यह चुनाव पूरी तरह से विकास के मुद्दे पर लड़ा। आप ने चुनाव से पहले रिपोर्ट कार्ड और घोषणा पत्र की जगह गारंटी कार्ड जारी किया। इसमें उन्होंने बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा का वादा किया।
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4- शाहीन बाग पर नहीं बोले केजरीवाल: केजरीवाल इस चुनाव में काफी सधे हुए नजर आए। भाजपा द्वारा लगातार शाहीनबाग को लेकर उकसाने के बावजूद केजरीवाल ने शाहीन बाग को लेकर कोई राय नहीं रखी। वहीं, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक बार शाहीनबाग में नागरिकता कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन का समर्थन किया था।
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5- राष्ट्रवाद के मुद्दे पर नहीं जाने दिया चुनाव: भाजपा ने यह चुनाव धारा 370, नागरिकता कानून, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा। भाजपा लगातार इन मुद्दों को लेकर केजरीवाल को चुनौती देते रही। साथ ही भाजपा के नेताओं ने केजरीवाल को आतंकवादी तक कह दिया, इसके बावजूद केजरीवाल अपने मुद्दों पर डटे रहे और इस चुनाव को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर नहीं जाने दिया।
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6- नए चेहरों को दिया मौका: दिल्ली विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे में भी केजरीवाल की रणनीति दिखी। इस बार करीब 23 नए चेहरों को मौका दिया गया। इसके अलावा पार्टी ने लोकसभा चुनाव में लड़े तीन उम्मीदवारों राघव चड्डा, दिलीप पांडे और अतिशी को भी मैदान में उतारा।
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