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दिल्ली चुनाव में सबसे गरीब उम्मीदवार है ये युवा नेता, मात्र इतने हजार रु. लेकर उतर गया मैदान में
नई दिल्ली. राजधानी में विधानसभा चुनाव की धूम है। राजनीतिक पार्टियां अपने धिुरंधरों को मौदान में उतार चुकी हैं। सभी नामांकन भरे जा चुके हैं। इस बीच दिल्ली चुनाव में करोड़पति उम्मीदवार भी हैं। इसमें आम आदमी पार्टी के धर्मपाल लाकरा 292 करोड़ की संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार बने हुए हैं। इसी बीच दिल्ली की जंग जीतने में एक सबसे गरीब उम्मीदवार भी है। ये हैं कांग्रेस नेता और विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) के पूर्व अध्यक्ष रॉकी तुसीद। रॉकी तुसीद दिल्ली चुनाव में एक सबसे युवा प्रत्याशी हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं रॉकी तुसीद और उनका फैमिली बैकग्राउंड और संपत्ति से हर छोटी बड़ी अनसुनी बातें...।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव की सियासी जंग में यूथ कांग्रेस के कई नेताओं को उतारा गया है। पिछले चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने के कारण इस बार कांग्रेस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इसी में कांग्रेस के युवा नेता रॉकी तुसीद ने दिल्ली की राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया था।
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हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले तुसीद इस विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) से सक्रिय एवं चुनावी राजनीति में कदम रखा है। तुसीद 2017 में डुसू अध्यक्ष चुने गए थे।
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तुसीद शिवाजी कॉलेज से है, वह एमए (बौद्ध अध्ययन) के छात्र रहे हैं। वह पश्चिमी दिल्ली NSUI के प्रेसिडेंट और एग्जिक्यूटिव काउंसलर DUSUहैं इसके अलावा वह कला ईकाई के अध्यक्ष रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा और भाजपा के आरपी सिंह के खिलाफ खड़ा किया है।
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नामांकन में तुसीद ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक दिल्ली चुनाव में कांग्रेस का ये प्रत्याशी सबसे गरीब उम्मीदवार बताया गया है। छात्र राजनीति से प्रदेश की राजनीति में कदम रखने वाले रॉकी के पास कुल 55,000 रुपये की चल संपत्ति है, लेकिन उनके नाम अब तक कोई भी वाहन नहीं है।
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नामांकन के लिए दिए गए शपथ पत्र में तुसीद ने खुद को समाजसेवी बताया। वहीं उन पर कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, जबकि अचल संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं है। उनके जुड़वां भाई नीतीश तुशीर भी राजनीति में हैं।
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इससे पहले सितंबर 2017 में भी तुसीद ने नामांकन भरा था लेकिन चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया गया था क्योंकि उन्होंने एक छात्र की पिटाई के मामले में अपने खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया था। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत दी।
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वर्ष 2018 में उच्च न्यायालय ने डुसू अध्यक्ष के तौर पर उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में इसी अदालत ने फैसले पर रोक लगा दी।
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