14 साल बाद पासपोर्ट के दामों में 67% की अचानक बढ़ोतरी ने सबको चौंका दिया है! क्या सिर्फ महंगाई वजह है या इसके पीछे ई-पासपोर्ट और नई सेवाओं का बड़ा प्लान? केंद्र सरकार ने संसद में बताया पूरा कारण।

Passport Fee Hike: भारत में 1 जुलाई, 2026 से विदेश यात्रा करने वालों की जेब पर एक बड़ा बोझ बढ़ गया है। सरकार ने अचानक पासपोर्ट नियमों में संशोधन करते हुए इसकी फीस में सीधे 67 प्रतिशत का तगड़ा इजाफा कर दिया है। 14 साल के लंबे इंतजार के बाद हुए इस बड़े फैसले ने आम जनता को हैरान कर दिया है कि आखिर सरकार को रातों-रात ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा?

ऐतिहासिक वृद्धि का सच: आखिर क्यों महंगी हुई विदेश यात्रा?

लोकसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में इस रहस्य से पर्दा उठाया। सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बड़ा संशोधन करते हुए 36 पेज वाले सामान्य नए पासपोर्ट की आवेदन फीस को ₹1,500 से बढ़ाकर सीधे ₹2,500 कर दिया है। सरकार का तर्क है कि पिछले 14 सालों में पासपोर्ट सर्विस डिलीवरी की लागत और इनपुट कॉस्ट में अत्यधिक बढ़ोतरी हो चुकी थी, जिसके कारण फीस का ढांचा बदलना बेहद जरूरी हो गया था।

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अपग्रेडेशन का खर्च या सुरक्षा की गारंटी? फीस बढ़ने के 3 मुख्य कारण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि बिना सोचे-समझे नहीं की गई है, बल्कि इसके पीछे कामकाज की समीक्षा और तकनीकी बदलाव शामिल हैं:

  1. ई-पासपोर्ट तकनीक: देश में अत्याधुनिक ई-पासपोर्ट व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे सुरक्षा और क्वालिटी पहले से कई गुना बेहतर होगी।
  2. PSP वर्शन 2.0: पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम को अपग्रेड करके वर्शन 2.0 पर ले जाया गया है, जिससे सेवाओं की क्षमता और गति में सुधार हुआ है।
  3. बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट: पिछले 14 वर्षों में सर्विस डिलीवरी से जुड़े प्रशासनिक और तकनीकी इनपुट खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

पहले कब-कब बढ़ी थी पासपोर्ट फीस?

सरकार के मुताबिक, पासपोर्ट फीस में इससे पहले 1971, 1980, 1993, 2002 और 2012 में संशोधन किया गया था। बढ़ोतरी का रिकॉर्ड भी अलग-अलग रहा-

  • 1971: 67%
  • 1980: 100%
  • 1993: 500%
  • 2002: 233%
  • 2012: 50%
  • 2026: 67%

कानूनी आधार और सरकार का तर्क

सरकार ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट आवेदन शुल्क पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 5(1) और पासपोर्ट नियम, 1980 के नियम 8 के तहत तय किए जाते हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि बढ़ी हुई फीस का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि सुरक्षित, तेज़ और आधुनिक पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में 14 साल बाद हुई यह बढ़ोतरी अब आम आवेदकों की जेब पर असर डालेगी, लेकिन सरकार इसे बेहतर सेवा के लिए ज़रूरी कदम बता रही है।

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