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पुराने दोस्त केजरीवाल पर लगातार भड़ास निकाल रहे कविवर कुमार विश्वास आखिर किसके साथ हैं?

First Published Feb 4, 2020, 6:56 PM IST
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नई दिल्ली। 70 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अब अंतिम प्रक्रिया की ओर है। सभी पक्ष खुलते जा रहे हैं। जो दल चुनाव लड़ रहे हैं वो अपने एजेंडा पर खुलकर बोल रहे हैं, बयानबाजियां कर रहे हैं। और जो पार्टियां नहीं लड़ रही हैं, चुनाव की तारीख नजदीक आते-आते अपना रुख साफ करती जा रही हैं। मगर दिल्ली में कुमार विश्वास जैसे कवि/ नेता भी दिलचस्प किरदार हैं, जिनके पक्ष को लेकर लोगों की दिलचस्पी है।
 

कुमार विश्वास कवि के रूप में मशहूर हैं। ऐसा मानने में कोई गुरेज नहीं करना चाहिए कि एक कवि की लोकप्रियता में राजनीति ने शोहरत का और इजाफा कर दिया। कुमार विश्वास, इंडिया अगेन्स्ट करप्शन मूवमेंट में अन्ना हजारे के प्रमुख सिपहसालारों में थे। विश्वास उसी कतार में थे जहां अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, मनीष सीसोदिया और तमाम दूसरे चेहरे थे। बाद में आप के गठन, चुनाव में उतरने और दो बार सरकार बनने के बाद विवाद की वजह से कई नेता केजरीवाल से दूर जाने लगे। विश्वास साथ रहे। उन्हें केजरीवाल का विश्वस्त और करीबी बताया जाने लगा।

कुमार विश्वास कवि के रूप में मशहूर हैं। ऐसा मानने में कोई गुरेज नहीं करना चाहिए कि एक कवि की लोकप्रियता में राजनीति ने शोहरत का और इजाफा कर दिया। कुमार विश्वास, इंडिया अगेन्स्ट करप्शन मूवमेंट में अन्ना हजारे के प्रमुख सिपहसालारों में थे। विश्वास उसी कतार में थे जहां अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, मनीष सीसोदिया और तमाम दूसरे चेहरे थे। बाद में आप के गठन, चुनाव में उतरने और दो बार सरकार बनने के बाद विवाद की वजह से कई नेता केजरीवाल से दूर जाने लगे। विश्वास साथ रहे। उन्हें केजरीवाल का विश्वस्त और करीबी बताया जाने लगा।

मगर वक्त के साथ दोनों का भाई जैसा रिश्ता नाजुक होता गया। विवाद की खबरों के बीच केजरीवाल ने कई बार सार्वजनिक रूप से कवि को अपना भाई करार दिया। पर एक ऐसा दिन भी आ ही गया जब असंतुष्ट विश्वास ने केजरीवाल से अलग लाइन ले ली। आप संस्थापकों में शामिल रहे केजरीवाल पार्टी से अलग हो गए और तब से अब तक किसी राजनीतिक मंच पर नहीं दिखे हैं।

मगर वक्त के साथ दोनों का भाई जैसा रिश्ता नाजुक होता गया। विवाद की खबरों के बीच केजरीवाल ने कई बार सार्वजनिक रूप से कवि को अपना भाई करार दिया। पर एक ऐसा दिन भी आ ही गया जब असंतुष्ट विश्वास ने केजरीवाल से अलग लाइन ले ली। आप संस्थापकों में शामिल रहे केजरीवाल पार्टी से अलग हो गए और तब से अब तक किसी राजनीतिक मंच पर नहीं दिखे हैं।

अब दिल्ली में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और तमाम लोग यह जानने में दिलचस्पी ले रहे हैं कि पिछली बार आप के स्टार प्रचारक रहे कविवर कुमार विश्वास आखिर इस बार किसके साथ हैं? कुमार विश्वास ने जब से आप छोड़ा, पानी पी-पीकर केजरीवाल को कोस रहे हैं। लगभग हर बड़े बयान पर केजरीवाल की सोशल मीडिया में खिंचाई भी कर रहे हैं। अब सवाल है कि कविवर आखिर साथ किसका दे रहे हैं।

अब दिल्ली में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और तमाम लोग यह जानने में दिलचस्पी ले रहे हैं कि पिछली बार आप के स्टार प्रचारक रहे कविवर कुमार विश्वास आखिर इस बार किसके साथ हैं? कुमार विश्वास ने जब से आप छोड़ा, पानी पी-पीकर केजरीवाल को कोस रहे हैं। लगभग हर बड़े बयान पर केजरीवाल की सोशल मीडिया में खिंचाई भी कर रहे हैं। अब सवाल है कि कविवर आखिर साथ किसका दे रहे हैं।

कुमार विश्वास दिल्ली चुनाव में किसके साथ हैं, इसपर साफ-साफ तो कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि अब तक कविवर ने दिल्ली में किसी पार्टी का सपोर्ट नहीं किया है। कविवर की ओर से किसी को सपोर्ट नहीं करने और विरोध वाले ट्वीट से एक हद तक उनके पक्ष का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि ये सिर्फ अनुमान भर हैं। कविवर के मजाकिया ट्वीट्स पर किसी तरह का दावा नहीं कर सकते हैं।

कुमार विश्वास दिल्ली चुनाव में किसके साथ हैं, इसपर साफ-साफ तो कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि अब तक कविवर ने दिल्ली में किसी पार्टी का सपोर्ट नहीं किया है। कविवर की ओर से किसी को सपोर्ट नहीं करने और विरोध वाले ट्वीट से एक हद तक उनके पक्ष का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि ये सिर्फ अनुमान भर हैं। कविवर के मजाकिया ट्वीट्स पर किसी तरह का दावा नहीं कर सकते हैं।

वैसे कुमार विश्वास उन तमाम मुद्दों (मोदी सरकार के) का साथ दे रहे हैं जिनमें से कुछ पर उनके दोस्त पुराने दोस्त केजरीवाल को आपत्ति है। और केजरीवाल जिन मुद्दों को उठा रहे हैं उस पर कविवर भयानक किस्म का विरोध कर रहे हैं। जैसे- नागरिकता कानून का मसला ही ले लीजिए। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार का विरोध किया है। मगर कविवार नागरिकता कानून के लिए मोदी शाह को शाबासी दे रहे हैं।

वैसे कुमार विश्वास उन तमाम मुद्दों (मोदी सरकार के) का साथ दे रहे हैं जिनमें से कुछ पर उनके दोस्त पुराने दोस्त केजरीवाल को आपत्ति है। और केजरीवाल जिन मुद्दों को उठा रहे हैं उस पर कविवर भयानक किस्म का विरोध कर रहे हैं। जैसे- नागरिकता कानून का मसला ही ले लीजिए। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार का विरोध किया है। मगर कविवार नागरिकता कानून के लिए मोदी शाह को शाबासी दे रहे हैं।

पाकिस्तान में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पर केजरीवाल ने साबू मांगा, पर कुमार विश्वास कई मर्तबा मोदी सरकार की तारीफ कर चुके हैं। कश्मीर में धारा 370 हटाने पर भी कविवर ने मुक्त कंठ से सरकार की प्रशंसा की है। जबकि शाहीन बाग प्रोटेस्ट का केजरीवाल ने सपोर्ट किया था जिस पर कविवर ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। दिल्ली में आप सरकार के विकास के दावों पर भी कुमार विश्वास ने तीखी नाराजगी जाहिर की है।

पाकिस्तान में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पर केजरीवाल ने साबू मांगा, पर कुमार विश्वास कई मर्तबा मोदी सरकार की तारीफ कर चुके हैं। कश्मीर में धारा 370 हटाने पर भी कविवर ने मुक्त कंठ से सरकार की प्रशंसा की है। जबकि शाहीन बाग प्रोटेस्ट का केजरीवाल ने सपोर्ट किया था जिस पर कविवर ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। दिल्ली में आप सरकार के विकास के दावों पर भी कुमार विश्वास ने तीखी नाराजगी जाहिर की है।

अब तक कई ट्वीट्स में कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथ ले चुके हैं। बालकोट में एयर स्ट्राइक, राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक और नागरिकता कानून के मसले पर कुमार विश्वास सार्वजनिक मंचों से मोदी सरकार की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि महात्मा गांधी पर बीजेपी सांसद अनंत हेगड़े के बयान पर कड़ी आपत्ति भी जता चुके हैं।

अब तक कई ट्वीट्स में कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथ ले चुके हैं। बालकोट में एयर स्ट्राइक, राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक और नागरिकता कानून के मसले पर कुमार विश्वास सार्वजनिक मंचों से मोदी सरकार की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि महात्मा गांधी पर बीजेपी सांसद अनंत हेगड़े के बयान पर कड़ी आपत्ति भी जता चुके हैं।

वैसे आप से बाहर आने के बाद कुमार विश्वास ने किसी पार्टी का दामन नहीं थामा है, मगर दिल्ली चुनाव के दौरान उनके ट्वीट्स में इस बात की गवाही है कि वो केजरीवाल की हार का इंतजार कर रहे हैं। कविवर ने कुछ कहा तो नहीं है मगर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली में आप को हराने वाली पार्टी के साथ उनकी संवेदनाएं होंगी। दिल्ली में 8 फरवरी को चुनाव हैं। मतगणना 11 फरवरी को की जाएगी।

वैसे आप से बाहर आने के बाद कुमार विश्वास ने किसी पार्टी का दामन नहीं थामा है, मगर दिल्ली चुनाव के दौरान उनके ट्वीट्स में इस बात की गवाही है कि वो केजरीवाल की हार का इंतजार कर रहे हैं। कविवर ने कुछ कहा तो नहीं है मगर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली में आप को हराने वाली पार्टी के साथ उनकी संवेदनाएं होंगी। दिल्ली में 8 फरवरी को चुनाव हैं। मतगणना 11 फरवरी को की जाएगी।

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