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FACT CHECK: क्यों मुंबई में मजदूरों को बताया जा रहा 'दूसरा तब्लीगी जमात वायरस'? जानें सच

नई दिल्ली. मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को हजारों की तादाद में मजदूर जमा हुए थे। ये सभी प्रवासी मजदूर थे जो अपने घर जाने के लिए ट्रेन चलने के इंतजार में स्टेशन पर जमा हुए थे। क्योंकि 21 दिन का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खुलना था ऐसे में सभी स्टेशन पर घर जाने के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंच गए। बिहार, यूपी, बंगाल और झारखंड के ये मजदूर हर हाल में अपने घर जाना चाहते थे। बांद्रा में उमड़ी प्रवासी मजदूरों की भीड़ पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इन्हें निश्चिंत रहने का भरोसा दिया। सीएम ठाकरे ने कहा- जो भी बाहरी राज्यों के मजदूर यहां हैं, वो निश्चिंत और निर्भीक होकर यहां रहें। डरने की कोई बात नहीं है। हम आपका पूरा ध्यान रख रहे हैं। जो लोग इस पूरे मामले को लेकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं, वो ध्यान से सुन लें, इस तरह आग से ना खेलें। ये राजनीति करने का वक्त नहीं है। जो लोग अफवाह फैला रहे हैं वो भी समझ लें। उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में एबीपी माझा के एक पत्रकार को फेक न्यूज फैलाने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया है।अब सोशल मीडिया पर इन मजदूरों की फोटोज और वीडियोज वायरल हो रहे हैं। लोग इन्हें 'दूसरा तब्लीगी जमात' वायरस कह रहे हैं। फैक्ट चेकिंग में आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है? 

5 Min read
Author : Asianet News Hindi
| Updated : Apr 15 2020, 08:11 PM IST
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ब्रांद्रा में जमा हुए मजदूरों को  रेलवे अधिकारियों और पुलिस वालों ने कई बार समझाया। देश में मौजूद लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है, इसलिए वे वापस अपने-अपने स्थानों को लौट जाएं, लेकिन मजदूर मानने को तैयार नहीं हुए। वे मुंबई में भूखमरी से मरने की बजाय घर जाना चाहते थे।

बेकाबू भीड़ को काबू करने और सोशल डिस्टेंशिंग को फॉलो करवाने के लिए पुलिस मजदूरों पर लाठीचार्ज भी किया। कोरोना, लॉकडाउन और भुखमरी झेल रहे रहे मजदूरों की इस भीड़ को लोगों ने विशेष समुदाय का बताकर सांप्रदायिक रंग दे दिया है।
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वायरल पोस्ट क्या है? 

मुंबई में जमा मजदूरों को लेकर न सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि मीडिया संस्थानों ने भी सांप्रदायिक रंग देकर माहौल बनाने की कोशिश की। ट्विटर पर अशोक पंडित नाम के यूजर्स ने लिखा कि, मुंबई में मजदूर अल्लाह के नाम पर जमा हुए थे। ये सभी एक विशेष समुदाय से थे। ये लोग कोरोना संक्रमण को रोकने की लॉकडाउन आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। 
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क्या दावा किया जा रहा है? 

शेफाली वैद्या ने मुंबई मजदूरों को दूसरा तब्लीगी जमात वायरस कहा और ये सभी लोग लॉकडाउन का उलंघन कर कोरोना फैला रहे हैं। 
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कई लोगों सुन्नी मस्जिद पर जमा भीड़ को बांद्रा स्टेशन पर मौजूद मजदूरों की भीड़ बताया और इसको कोरोना और लॉकडाउन से जोड़कर सवाल भी उठाए।  
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सच्चाई क्या है? 

सोशल मीडिया और मीडिया में मुंबई मजदूरों को वहां के स्थानीय मुस्लिमों वाले वीडियो के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल मुंबई में बांद्रा स्टेशन पर मजदूर जमा हुए थे, लाठीचार्ज भी हुआ। मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। बांद्रा में जहां लोगों की भीड़ थी वहीं पास में एक मस्जिद है।

भीड़ को संबोधित करने के लिए पुलिस मस्जिद के अंदर गई और अनाउंसमेंट करने लगी कि लोग वापस अपने घर चले जाएं। भीड़ पास की एक मस्जिद के पास इकट्ठा हो गई और जल्द ही ट्विटर यूजर्स ने इसे मुस्लिम समुदाय की साजिश और तब्लीगी जमात जैसे नाम के साथ सांप्रदायिक एंगल देकर वायरल कर दिया।  
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भीड़ को पुलिस ने मस्जिद से अनाउंस करके समझाया- 

इस मामले में मुंबई पुलिस के एक प्रवक्ता ने अपना बयान जारी किया। उनके मुताबिक, प्रवासी मजदूरों और स्थानीय लोगों को समझाने के लिए मस्जिद से अनाउंसमेंट किया गया था। इसी का वीडियो शेयर किया जा रहा है इसमें स्थानीय लोगों की भीड़ को समझाने के लिए मौलाना लॉकडाउन और कोरोना आपदा को अल्लाह की हिदायत कह रहे हैं। और डरा रहे हैं कि हमें खुदा का ये आदेश मानना  होगा और अभी लॉकडाउन का पालन करके अपने घरों में रहें।

पुलिस के मुताबिक, इसी वीडियो को लोग सांप्रदायिक एंगल देकर वायरल कर रहे हैं जबकि इस मामले में कोई भी हिंदू मु्स्लिम एंगल नहीं है। सोशल मीडिया पर मुंबई के मजदूरों को लेकर फैलाई जा रहीं इन अफवाहों पर यकीन न करें। 
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स्टेशन पर क्यों जमा हुए मजदूर

दरअसल मजदूरों के स्टेशन पर मजा होने में भी फेक खबरों और अफवाहों का हाथ है। उन्हें खबर मिली थी कि 14 अप्रेल को उनके लिए मुंबई से खास जनसाधारण ट्रेन चलाई जाएगी। ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पर 4 घंटे पहले पहुंचना होगा। एबीपी माझा ने ये खबर प्रकाशित की थी। महाराष्ट्र पुलिस ने एबीपी माझा के रिपोर्टर राहुल कुलकर्णी को फेक खबर प्रकाशित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

रेलवे ने भी अपना स्पष्टीकरण दिया
 
लेटर जारी कर कहा, वेब मीडिया के एक वर्ग ने गलत खबर चलाई कि दक्षिण मध्य रेलवे ने अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों के लिए जनसधारण ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है। ये खबर उस लेटर पर आधारित है जो इंटरनल कम्युनिकेशन के लिए कमर्शियल डिपार्टमेंट को भेजा गया था। इस संबंध में, यह स्पष्ट किया जाता है कि फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों के लिए कोई भी जनसधारण स्पेशल ट्रेन चलाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बताए गए तथ्यों के मद्देनजर, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया ध्यान दें, कृपया इस मामले पर कोई गलत खबर न चलाएं।
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हालांकि हिंदुस्तान अखबार में ये खबर छपी दिखाई गई। वहीं विनय दुबे नाम के एक शख्स ने भी सोशल मीडिया पर मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की भड़काऊ पोस्ट डाली थी। दावा किया गया कि उसने स्टेशन पर भीड़ जुटाई थी। 
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विनय दुबे की वायरल पोस्ट।
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ये निकला नतीजा

मुंबई में मजदूरों के इस मामले की पूरी छानबीन के बाद हमने पाया कि इसमें कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है। मजदूरों की भीड़ विनय दुबे की भड़काऊ पोस्ट और स्पेशल जनसाधारण ट्रेन मिलने की खबर के कारण जुटी थी। रेलवे ने भी 15 अप्रेल के लिए बुक हुए 30 लाख से ज्यादा टिकिट कैंसिल करने की बाद कही है। वहीं मुंबई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, " बांद्रा में मौजूद वो मस्जिद हमेशा से ही रही है। इसका उस भीड़ से कोई संबंध नहीं है जो इकट्ठा हुई थी। हम ऐसे मामलों में भीड़ के धर्म को नहीं देखते हैं।" 

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