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Fact Check: नवरात्रि में जिस दिल्ली में पसरा था सन्नाटा रमजान में लॉकडाउन तोड़ टूट पड़ी भीड़, जानें सच

First Published Apr 29, 2020, 6:21 PM IST
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नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर रमजान शुरू होने के बाद से एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है। दो तस्वीरों और हालातों को तुलना हो रही है। लोगों ने तस्वीर शेयर करके दावा किया है कि रमजान में लोग कैसे लॉकडाउन फॉलो न करके नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जबकि नवरात्रि में दिल्ली में पूरी तरह देशबंदी रही थी। 

 

फैक्ट चेकिंग में आइए जानते हैं कि इन दोनों तस्वीर का सच क्या है?

दो फोटोज वाला एक कोलाज वायरल हो रहा है। दावा है कि यह दिल्ली की फोटो हैं। एक फोटो में सुरक्षा जवान खड़ा नजर आ रहा है और पूरी रोड सूनी पड़ी है। इसे नवरात्री का बताया जा रहा है। वहीं दूसरी फोटो में कई लोग सड़क पर दिख रहे हैं जो रजमान के दौरान की बताई जा रही है।

दो फोटोज वाला एक कोलाज वायरल हो रहा है। दावा है कि यह दिल्ली की फोटो हैं। एक फोटो में सुरक्षा जवान खड़ा नजर आ रहा है और पूरी रोड सूनी पड़ी है। इसे नवरात्री का बताया जा रहा है। वहीं दूसरी फोटो में कई लोग सड़क पर दिख रहे हैं जो रजमान के दौरान की बताई जा रही है।

वायरल पोस्ट क्या है? 

 

एक यूजर ने इस कोलाज को शेयर करते हुए लिखा कि, 'ये हैं अरविंद केजरीवाल की दिल्ली की तस्वीरें, जो आज न्यूज एजेंसी एएनआई ने पब्लिश की हैं।' कई यूजर्स इन फोटोज को इसी दावे के साथ सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। 

वायरल पोस्ट क्या है? 

 

एक यूजर ने इस कोलाज को शेयर करते हुए लिखा कि, 'ये हैं अरविंद केजरीवाल की दिल्ली की तस्वीरें, जो आज न्यूज एजेंसी एएनआई ने पब्लिश की हैं।' कई यूजर्स इन फोटोज को इसी दावे के साथ सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। 

क्या दावा किया जा रहा है/

 

दावा है कि लॉकडाउन के दौरान सड़क पर इतनी भीड़ दिख रही है और नवरात्रि पर सड़कें सूनी करवा दी गईं।

क्या दावा किया जा रहा है/

 

दावा है कि लॉकडाउन के दौरान सड़क पर इतनी भीड़ दिख रही है और नवरात्रि पर सड़कें सूनी करवा दी गईं।

क्या है सच्चाई

 

 

जिस फोटो को नवरात्री का दिल्ली का फोटो बताया जा रहा है, वो जम्मू की फोटो है। वहीं दूसरी फोटो जरूर दिल्ली की है।  सोशल मीडिया का ये दावा भी गलत है कि ये दोनों फोटो एएनआई द्वारा शेयर किए गए। एक फोटो एएनआई ने जबकि दूसरा पीटीआई ने शेयर किया था। 

 

 

इमेज : 2

यह फोटो न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा 24 अप्रैल को शेयर की गई थी। यह दिल्ली के शास्त्री पार्क एरिया में स्थित मार्केट की है। इस बार रमजान 23 अप्रैल से शुरू हुए हैं। 

क्या है सच्चाई

 

 

जिस फोटो को नवरात्री का दिल्ली का फोटो बताया जा रहा है, वो जम्मू की फोटो है। वहीं दूसरी फोटो जरूर दिल्ली की है।  सोशल मीडिया का ये दावा भी गलत है कि ये दोनों फोटो एएनआई द्वारा शेयर किए गए। एक फोटो एएनआई ने जबकि दूसरा पीटीआई ने शेयर किया था। 

 

 

इमेज : 2

यह फोटो न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा 24 अप्रैल को शेयर की गई थी। यह दिल्ली के शास्त्री पार्क एरिया में स्थित मार्केट की है। इस बार रमजान 23 अप्रैल से शुरू हुए हैं। 

इमेज 1 :

 

रिवर्स सर्चिंग में हमें यह फोटो इंडिया टुडे के एक लेख में मिली। लेख में बताया गया कि 1 अप्रैल को न्यूज एजेंसी पीटीआई द्वारा यह फोटो ली गई थी। यह जम्मू-कश्मीर का लॉकडाउन के दौरान का नजारा है। इस इमेज को ध्यान से देखने पर इस पर जेएमसी (जम्मू म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) लिखा नजर आता है। इससे भी कंफर्म होता है कि यह जम्मू की ही तस्वीर है।

इमेज 1 :

 

रिवर्स सर्चिंग में हमें यह फोटो इंडिया टुडे के एक लेख में मिली। लेख में बताया गया कि 1 अप्रैल को न्यूज एजेंसी पीटीआई द्वारा यह फोटो ली गई थी। यह जम्मू-कश्मीर का लॉकडाउन के दौरान का नजारा है। इस इमेज को ध्यान से देखने पर इस पर जेएमसी (जम्मू म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) लिखा नजर आता है। इससे भी कंफर्म होता है कि यह जम्मू की ही तस्वीर है।

ये निकला नतीजा 

 

पड़ताल से स्पष्ट होता है कि जम्मू और दिल्ली की अलग-अलग तस्वीरों को दिल्ली का बताकर वायरल किया गया है। इस फोटो के साथ सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग देकर नफरत फैलाई जा रही है। 

 

तो देखा न आपने कि कैसे हमारे समाज से तेजी से फेक न्यूज वायरल हो रहा है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि लोगों तक इसके सच को पहुंचाए। ऐसे में पढ़ें-लिख वर्ग को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि बिना जांचे परखे कोई खबर, वीडियो फॉरवर्ड न करें। आपका एक गैर-जिम्मेदारना हरकत समाज की शांति को भंग कर सकती है। वहीं किसी भी खबर पर संदेह हो तो उसे किसी विश्ववसनीय जगह, संस्थान या लोगों से एक बार जरूर कंफर्म करें। आप खुद भी एक बार गूगल पर चेक कर सकते हैं।

ये निकला नतीजा 

 

पड़ताल से स्पष्ट होता है कि जम्मू और दिल्ली की अलग-अलग तस्वीरों को दिल्ली का बताकर वायरल किया गया है। इस फोटो के साथ सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग देकर नफरत फैलाई जा रही है। 

 

तो देखा न आपने कि कैसे हमारे समाज से तेजी से फेक न्यूज वायरल हो रहा है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि लोगों तक इसके सच को पहुंचाए। ऐसे में पढ़ें-लिख वर्ग को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि बिना जांचे परखे कोई खबर, वीडियो फॉरवर्ड न करें। आपका एक गैर-जिम्मेदारना हरकत समाज की शांति को भंग कर सकती है। वहीं किसी भी खबर पर संदेह हो तो उसे किसी विश्ववसनीय जगह, संस्थान या लोगों से एक बार जरूर कंफर्म करें। आप खुद भी एक बार गूगल पर चेक कर सकते हैं।

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