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पिता को कंधा तक नहीं दे सके बेटे, पिता कहता था-'मैं डॉक्टर हूं...मुझे कोरोना से क्या खतरा'
इंदौर, मध्य प्रदेश. उन बेटों के दिल पर क्या बीतती होगी, जो अंतिम समय में भी अपने पिता के पास न हों..सबसे बड़ी बात, वे उन्हें कंधा तक नहीं दे सकें। यह तस्वीर कोरोना संक्रमण से पैदा हुई रिश्तों की दूरियों को दिखाती है। यह हैं इंदौर के 62 वर्षीय डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी के बेटे। डॉ. पंजवानी का गुरुवार सुबह कोरोना संक्रमण से निधन हो गया था। इनके तीन बेटे हैं, जो इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं। लॉक डाउन के चलते वे इंडिया नहीं आ सके। जब उन्हें पिता की मौत की खबर पता चली..तो उनका कलेजा फट पड़ा। वे सोचने लगे कि काश! उनके पंख होते..तो उड़कर पापा के अंतिम दर्शन करने आ जाते। लेकिन कोरोना संक्रमण ने मानों लोगों की आजादी के पर काटकर रख दिए हैं। वीडियो कॉल के जरिये तीनों बेटों ने पापा के अंतिम दर्शन किए। बता दें कि मध्य प्रदेश में इंदौर सबसे खतरनाक हालत में है। यहां गुरुवार को ही अकेले 22 नये पॉजिटिव केस मिले। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग ही एक मात्र उपाय है, बावजूद लोगों में इसे लेकर लापरवाही देखने को मिल रही है।
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इंदौर के रूपराम नगर निवासी डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी जनरल फिजिशियन थे। वे प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। CMHO डॉ. प्रवीण जड़िया ने कहा कि प्रशासन पता कर रहा है कि उन्हें संक्रमण कैसे हुआ? डॉ. पंजवानी को 4 अप्रैल को एमआर टीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी एक नेक इंसान के तौर पर जाने जाते थे। जिस दिन उन्हें कोरोना के लक्षण दिखे, उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया था। लेकिन मास्क न लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करना उन्हें भारी पड़ गया। डॉ. पंजवानी के पारिवारिक दोस्त श्याम राजदेव ने बताया कि उन्होंने डॉ. पंजवानी मास्क नहीं लगाते थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं कर रहे थे। जब मैंने उन्हें सलाह दी, तो वे मुस्कराते हुए बोले कि यह उनका कैबिन है। यानी उनका क्लिनिक है। उन्हें किसी से क्या खतरा..वो डॉक्टर हैं। यही लापरवाही भारी पड़ गई।
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यह तस्वीर भोपाल की है। सरकार यहां गरीब परिवारों को 5 किलो आटा मुफ्त दे रही है। लेकिन जिस तरह यह काम किया गया, वो हैरान करता है। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया। इसी बीच भोपाल में पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 99 हो गई है। समीपवर्ती विदिशा में 12 संक्रमित मिल चुके हैं।
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यह तस्वीर गुरुग्राम की है। ऐसी कैसी मदद? खाना बांटने के दौरान अगर ऐसी भीड़ रही, तो संक्रमण से कैसे बचेंगे?
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कोलकाता के पार्क में खेलते बच्चे। इन बच्चों को नहीं मालूम कि कोरोना कितना खतरनाक है, लेकिन इनके अभिभावकों की लापरवाही इनकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
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यह तस्वीर नोएडा की है। सोशल डिस्टेंसिंग का यही पालन कोरोना को हराएगा।
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यह तस्वीर कोलकाता की है। सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर यही घोर लापरवाही कोरोना संक्रमण के फैलने की वजह बनी।
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