लॉकडाउन की दर्दनाक तस्वीरः बुरे हालात में किसान ने बेटों को बैल बनाकर जोता खेत, पढ़िए बेबसी की कहानी

First Published 24, May 2020, 8:58 AM

छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश). कोरोना वायरस के कहर को खत्म करने के लिए लागू हुए लॉकडाउन ने देश के लाखों लोगों की खुशहाल जिंदगी बदल कर रख दी है। रोज इसकी वजह से हो रही परेशानियों की मार्मिक काहानियां सामने आ रही हैं।  ऐसे ही एक मध्य प्रदेश के किसान की बेबसी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जो आपको हिलाकर रख देगी। जब किसान का एक बैल बीमार पड़ा तो मजबूरी में उसने अपने बेटों को ही बैल बनाकर हल में जोत दिया।

<p>दरअसल, बेबसी की यह तस्वीर छिंदवाड़ा जिले में के सावलेवाड़ी गांव में &nbsp;दिखने को मिली है। जहां जयदेव दास नाम के किसान को अपने दोनों बेटे राजेश और देव को अपने परिवार का पेट पालने के लिए बैल बनाना पड़ा।&nbsp;</p>

दरअसल, बेबसी की यह तस्वीर छिंदवाड़ा जिले में के सावलेवाड़ी गांव में  दिखने को मिली है। जहां जयदेव दास नाम के किसान को अपने दोनों बेटे राजेश और देव को अपने परिवार का पेट पालने के लिए बैल बनाना पड़ा। 

<p>किसान के पास दो बैल थे जिसमें से एक की मौत हो गई और दूसरा कुछ समय बाद बीमार हो गया। किसान ने खेत में भिंड़ी लगाना की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन उसके सामने समस्या थी कि वह कैसे जुताई करे। लॉकडाउन की वजह से ना तो किसी का ट्रैक्टर मिल पा रहा था और ना ही किसी के बैल। ऐसे में जयदेव दास ने हल को पकड़ा और उसके दोनों बेटे बैल बनकर खेत जोतने चल पड़े।</p>

किसान के पास दो बैल थे जिसमें से एक की मौत हो गई और दूसरा कुछ समय बाद बीमार हो गया। किसान ने खेत में भिंड़ी लगाना की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन उसके सामने समस्या थी कि वह कैसे जुताई करे। लॉकडाउन की वजह से ना तो किसी का ट्रैक्टर मिल पा रहा था और ना ही किसी के बैल। ऐसे में जयदेव दास ने हल को पकड़ा और उसके दोनों बेटे बैल बनकर खेत जोतने चल पड़े।

<p>बता दें कि किसान जयदेव दास के पास &nbsp;2.15 एकड़ जमीन है, जिसमें वह सब्जियां उगाते हैं। लेकिन लॉकडाउन में सब्जियों की फसल खराब होने के चलते उनकी माली हालत खराब हो गई।</p>

बता दें कि किसान जयदेव दास के पास  2.15 एकड़ जमीन है, जिसमें वह सब्जियां उगाते हैं। लेकिन लॉकडाउन में सब्जियों की फसल खराब होने के चलते उनकी माली हालत खराब हो गई।

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&nbsp;जयदेव के दोनों बेटे पिता के साथ सब्जी उगाने का काम करते हैं। जब सब्जी का सीजन नहीं उगा पाते तो वह मजदूरी करके अपने घर का खर्चा चलाते हैं। किसान के एक बेटे ने बताया कि सब्जी बोने का समय निकल चुका था, बड़ी मुश्किल से बीच मिला है, अगर ऐसे में हम देरी करते तो हमारी पूरी साल बर्बाद हो जाती। इसलिए हमने &nbsp;खुद ही मजबूरी में आकर बैल बनने का फैसला किया।</p>


 जयदेव के दोनों बेटे पिता के साथ सब्जी उगाने का काम करते हैं। जब सब्जी का सीजन नहीं उगा पाते तो वह मजदूरी करके अपने घर का खर्चा चलाते हैं। किसान के एक बेटे ने बताया कि सब्जी बोने का समय निकल चुका था, बड़ी मुश्किल से बीच मिला है, अगर ऐसे में हम देरी करते तो हमारी पूरी साल बर्बाद हो जाती। इसलिए हमने  खुद ही मजबूरी में आकर बैल बनने का फैसला किया।

<p>किसान ने बताया कि उसने कभी कोई कर्जा नहीं लिया है और ना ही नहीं उसने सरकार की भी कोई मदद ली है। &nbsp;मामला सामने आने के बाद नगरनिगम, राजस्व विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और किसान की मदद के बारे में बात की।</p>

किसान ने बताया कि उसने कभी कोई कर्जा नहीं लिया है और ना ही नहीं उसने सरकार की भी कोई मदद ली है।  मामला सामने आने के बाद नगरनिगम, राजस्व विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और किसान की मदद के बारे में बात की।

<p>तस्वीर में आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि मजबूर होकर एक पिता को अपने बेटों को बैल बनाकर जोतन पड़ रहा है।</p>

तस्वीर में आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि मजबूर होकर एक पिता को अपने बेटों को बैल बनाकर जोतन पड़ रहा है।

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