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गर्भवती की चीखें सुनकर दहल उठे लोग, जैसे बना उन्हें उठाकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन कोई बची और कोई 'चल बसी'

First Published Sep 11, 2020, 9:33 AM IST
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बैतूल, मध्य प्रदेश. देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े सुधार की जरूरत है। खासकर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत बुरी स्थिति है। पहली तस्वीर बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के भंडारपानी गांव की है। यह गांव 1800 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर बसा है। यहां  जाने के कोई रोड नहीं है। लोग पहाड़ी कच्चे रास्ते से होकर आते-जाते हैं। पोटली में एक प्रसूता की लाश है। 28 वर्षीय जग्गोबाई डिलीवरी के तीन दिन पहले अपने मायके आई थीं। जहां उसने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। लेकिन पहाड़ी से उतरकर नीचे आना उसके लिए संभव नहीं था। परिजन उसे जैसे-तैसे नीचे लाए। फिर एम्बुलेंस नहीं  मिलने पर उसे प्राइवेट वाहन के जरिये अस्पताल लेकर निकले, लेकिन बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। पढ़िए इसके आगे कहानी और देखिए ऐसे ही कुछ और मामले...

कॉल सेंटर ने कहा कि ढाई घंटे इंतजार करना होगा
जग्गोबाई को तकलीफ होने पर परिजन उसे पोटली में बैठाकर पहाड़ी से 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा तक लाए। यहां से भोपाल फोन किया, तो जवाब मिला कि एम्बुलेंस ढाई घंटे बाद मिलेगी। इसके बाद गांव के सरपंच साबूलाल ने प्राइवेट वाहन का इंतजाम किया। फिर प्रसूता को घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए लेकर रवाना हुए। लेकिन उसने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन उसी पोटली में लाश लेकर लौट आए।

आगे पढ़ें-जिनके पास खाने को पैसे नहीं, उनसे आप 4000 रुपए मांग रहे... 70 क्या, 700 किमी भी होता, तो ये पैदल घर जाते
 

कॉल सेंटर ने कहा कि ढाई घंटे इंतजार करना होगा
जग्गोबाई को तकलीफ होने पर परिजन उसे पोटली में बैठाकर पहाड़ी से 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा तक लाए। यहां से भोपाल फोन किया, तो जवाब मिला कि एम्बुलेंस ढाई घंटे बाद मिलेगी। इसके बाद गांव के सरपंच साबूलाल ने प्राइवेट वाहन का इंतजाम किया। फिर प्रसूता को घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए लेकर रवाना हुए। लेकिन उसने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन उसी पोटली में लाश लेकर लौट आए।

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कांकेर, छत्तीसगढ़.  6 सितंबर को कोयलीबेड़ा विकासखंड के गांव गट्टाकाल निवासी 45 वर्षीय अमलूराम उईके पर बैल ने हमला कर दिया था। उसकी दायीं आखं में चोट आई है। इससे उसे दिखना बंद हो गया। उसे तुरंत कोयलीबेड़ा अस्पताल लाया गया। वहां से उसे कांकेर जिला अस्पताल रेफर किया गया। संजीवनी ने उसे कांकेर अस्पताल छोड़ दिया। यहां उसे रायपुर के लिए रेफर किया गया। लेकिन पैसे नहीं होने पर उसने घर लौटना मुनासिब समझा। तब एम्बुलेंस  वाले ने 4000 रुपए मांग लिए। लिहाजा घायल और परिजन 70 किमी पैदल चलकर अपने घर पहुंचे।

आगे पढ़ें..पिता को खाट पर लिटाकर 5 किमी भागते रहे बेटा, आगे ऐसी और भी तस्वीरें हैं

कांकेर, छत्तीसगढ़.  6 सितंबर को कोयलीबेड़ा विकासखंड के गांव गट्टाकाल निवासी 45 वर्षीय अमलूराम उईके पर बैल ने हमला कर दिया था। उसकी दायीं आखं में चोट आई है। इससे उसे दिखना बंद हो गया। उसे तुरंत कोयलीबेड़ा अस्पताल लाया गया। वहां से उसे कांकेर जिला अस्पताल रेफर किया गया। संजीवनी ने उसे कांकेर अस्पताल छोड़ दिया। यहां उसे रायपुर के लिए रेफर किया गया। लेकिन पैसे नहीं होने पर उसने घर लौटना मुनासिब समझा। तब एम्बुलेंस  वाले ने 4000 रुपए मांग लिए। लिहाजा घायल और परिजन 70 किमी पैदल चलकर अपने घर पहुंचे।

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धनबाद, झारखंड. लिट्टीपाड़ा प्रखंड के जोराडीहा गांव के रहने वाले 50 साल के बीमार टुयलो मुर्मू की जान बचाने उसके बेटे और परिजन उन्हें खटिया पर लिटाकर अस्पताल भागे। शर्मनाक बात यह है कि ब्लॉक मुख्यालय से यह गांव सिर्फ 5 किमी दूर है। परिजनों ने कई बार 108 को कॉल किया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं आनी थी, सो नहीं आई। सबसे बड़ी बात राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसी इलाके से आते हैं। 

आगे पढ़ें 20 साल की दिव्यांग गर्भवती को गठरी की तरह कंधे पर उठाकर कीचड़ में भागे लोग

धनबाद, झारखंड. लिट्टीपाड़ा प्रखंड के जोराडीहा गांव के रहने वाले 50 साल के बीमार टुयलो मुर्मू की जान बचाने उसके बेटे और परिजन उन्हें खटिया पर लिटाकर अस्पताल भागे। शर्मनाक बात यह है कि ब्लॉक मुख्यालय से यह गांव सिर्फ 5 किमी दूर है। परिजनों ने कई बार 108 को कॉल किया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं आनी थी, सो नहीं आई। सबसे बड़ी बात राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसी इलाके से आते हैं। 

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बड़वानी, मध्य प्रदेश. यह मामला बड़वानी जिले के जनपद धनोरा से 35 किमी दूर चाचरिया पंचायत के नवाड़ फलिया गांव में देखने को मिला था। 20 साल की गायत्री दिव्यांग है। रविवार को उसे लेबर पेन होने पर परिजन इस तरह पोटली में बैठाकर अस्पताल पहुंचे। करीब 3 किमी इस तरह उन्हें पैदल जाना पड़ा। 

आगे पढ़िए...बहू को दर्द से तड़पता देखकर सास के निकल पड़े आंसू, फिर 5 लोग गर्भवती को ऐसे लटकाकर अस्पताल की ओर भागे

बड़वानी, मध्य प्रदेश. यह मामला बड़वानी जिले के जनपद धनोरा से 35 किमी दूर चाचरिया पंचायत के नवाड़ फलिया गांव में देखने को मिला था। 20 साल की गायत्री दिव्यांग है। रविवार को उसे लेबर पेन होने पर परिजन इस तरह पोटली में बैठाकर अस्पताल पहुंचे। करीब 3 किमी इस तरह उन्हें पैदल जाना पड़ा। 

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रोहतक, हरियाणा. यह दृश्य पिछले दिनों कनीना कस्बे में देखने को मिला था। यहां के वार्ड-8 में रहने वालीं सुषमा को प्रसव पीड़ा होने पर उनकी सास ने एम्बुलेंस को कॉल किया। सुषमा के पति कृष्ण कुमार ने बताया था कि जब 102 पर एम्बुलेंस के लिए कॉल नहीं उठाया गया, तो उनकी मां लक्ष्मी देवी पैदल ही सुषमा को लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़ीं। 

आगे पढ़ें...बर्तन में बैठकर गर्भवती ने पार की उफनती नदी..फिर दर्द से कराहते हुए हॉस्पिटल तक पहुंची, लेकिन मिली बुरी खबर

रोहतक, हरियाणा. यह दृश्य पिछले दिनों कनीना कस्बे में देखने को मिला था। यहां के वार्ड-8 में रहने वालीं सुषमा को प्रसव पीड़ा होने पर उनकी सास ने एम्बुलेंस को कॉल किया। सुषमा के पति कृष्ण कुमार ने बताया था कि जब 102 पर एम्बुलेंस के लिए कॉल नहीं उठाया गया, तो उनकी मां लक्ष्मी देवी पैदल ही सुषमा को लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़ीं। 

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यह मामला पिछले महीने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सामने आया था। बीजापुर जिले के मिनकापल्ली निवासी हरीश यालम की पत्नी लक्ष्मी को प्रसव पीड़ा होने पर 4 लोग बर्तन में बैठाकर चिंतावागु नदी पार कराकर पहले गोरला लाए थे। वहां से भोपालपट्टनम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया।

आगे पढ़ें 28 किमी पैदल चली गर्भवती और फिर नवजात को लेकर इसी तरह लौटी...

यह मामला पिछले महीने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सामने आया था। बीजापुर जिले के मिनकापल्ली निवासी हरीश यालम की पत्नी लक्ष्मी को प्रसव पीड़ा होने पर 4 लोग बर्तन में बैठाकर चिंतावागु नदी पार कराकर पहले गोरला लाए थे। वहां से भोपालपट्टनम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया।

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गढ़चिरौली, महाराष्ट्र. यह मामला भामरागढ़ तहसील में पिछले दिनों सामने आया था। इस महिला का नाम है रोशनी। इसके गांव में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जब इसे प्रसव पीड़ा हुई, तो 6 जुलाई को यह एक आशाकर्मी के साथ 28 किमी दूर लाहिरी हॉस्पिटल पहुंची। वहां से उसे हेमलकसा स्थित लोक बिरादरी अस्पताल पहुंचा गया। यहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। यहां से भी यह महिला अपनी बच्ची को गोद में लेकर पैदल ही गांव लौटी।

आगे पढ़िए ऐसी ही कुछ अन्य घटनाएं...

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र. यह मामला भामरागढ़ तहसील में पिछले दिनों सामने आया था। इस महिला का नाम है रोशनी। इसके गांव में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जब इसे प्रसव पीड़ा हुई, तो 6 जुलाई को यह एक आशाकर्मी के साथ 28 किमी दूर लाहिरी हॉस्पिटल पहुंची। वहां से उसे हेमलकसा स्थित लोक बिरादरी अस्पताल पहुंचा गया। यहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। यहां से भी यह महिला अपनी बच्ची को गोद में लेकर पैदल ही गांव लौटी।

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कोंडागांव, छत्तीसगढ़. यह तस्वीर पिछले दिनों सामने आई थी। बल्लियों के सहारे बनाई गई पालकी पर लटकाकर इस गर्भवती को किमी दूर खड़ी एम्बुलेंस तक लाया गया। क्योंकि गांव तक रास्ता इतना ऊबड़-खाबड़ था कि एम्बुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकती थी। यह अच्छी बात रही कि एम्बुलेंस का ड्राइवर और नर्स अच्छे लोग निकले और उन्होंने गर्भवती को लाने के लिए यह रास्ता निकाला। मामला कोंडागांव माकड़ी विकासखंड के मोहन बेडा गांव का है।

आगे पढ़िए..ऐसी ही कुछ अन्य घटनाएं..जो सरकारी खामियों या महिलाओं की परेशानी को दिखाती हैं..

कोंडागांव, छत्तीसगढ़. यह तस्वीर पिछले दिनों सामने आई थी। बल्लियों के सहारे बनाई गई पालकी पर लटकाकर इस गर्भवती को किमी दूर खड़ी एम्बुलेंस तक लाया गया। क्योंकि गांव तक रास्ता इतना ऊबड़-खाबड़ था कि एम्बुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकती थी। यह अच्छी बात रही कि एम्बुलेंस का ड्राइवर और नर्स अच्छे लोग निकले और उन्होंने गर्भवती को लाने के लिए यह रास्ता निकाला। मामला कोंडागांव माकड़ी विकासखंड के मोहन बेडा गांव का है।

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यह मामला छत्तीसगढ़ के कांकेर में पिछले दिनों सामने आया था। 12 साल की यह लड़की मानकी कांकेर जिले की ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांव आलदंड की रहने वाली है। उसके गांव में कोई स्वास्थ्य सेवा नहीं है। लिहाजा, मजबूरी में मानकी को परिजन उसे कंधों पर टांगकर इलाज के लिए लेकर गए। करीब 5 किमी उसे ऐसे ही लटकाकर नदी तक ले गए। वहां, उन्हें घंटेभर तक नाव का इंतजार करना पड़ा। नदी पार करके 6 किमी दूर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उनके गांव से उपस्वास्थ्य केंद्र की दूरी करीब 14 किमी है। इसके बाद उसे इलाज मिल सका।

आगे पढ़िए...खटिया को 'एम्बुलेंस' बनाया

यह मामला छत्तीसगढ़ के कांकेर में पिछले दिनों सामने आया था। 12 साल की यह लड़की मानकी कांकेर जिले की ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांव आलदंड की रहने वाली है। उसके गांव में कोई स्वास्थ्य सेवा नहीं है। लिहाजा, मजबूरी में मानकी को परिजन उसे कंधों पर टांगकर इलाज के लिए लेकर गए। करीब 5 किमी उसे ऐसे ही लटकाकर नदी तक ले गए। वहां, उन्हें घंटेभर तक नाव का इंतजार करना पड़ा। नदी पार करके 6 किमी दूर छोटेबेठिया उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उनके गांव से उपस्वास्थ्य केंद्र की दूरी करीब 14 किमी है। इसके बाद उसे इलाज मिल सका।

आगे पढ़िए...खटिया को 'एम्बुलेंस' बनाया

यह शर्मनाक तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम से सामने आई थी। यह मामला बिशुनपुर प्रखंड के गढ़ा हाडुप गांव का है। यहां रहने वाले बलदेव ब्रिजिया के पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा हुई। उस हॉस्पिटल तक ले जाने का जब कोई दूसरा साधन नहीं दिखा, तो खटिया को लोगों ने 'एम्बुलेंस' बना लिया। 

यह शर्मनाक तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम से सामने आई थी। यह मामला बिशुनपुर प्रखंड के गढ़ा हाडुप गांव का है। यहां रहने वाले बलदेव ब्रिजिया के पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा हुई। उस हॉस्पिटल तक ले जाने का जब कोई दूसरा साधन नहीं दिखा, तो खटिया को लोगों ने 'एम्बुलेंस' बना लिया। 

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