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एक गर्दन, एक पैर और झोला में भरी हड्डियां...अभी भी कर रही अपनों का इंतजार, दिल्ली हिंसा की दर्दनाक कहानी
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में दिल दहला देने वाली हालत में कई शव अभी भी अपने परिजनों के इंतजार में पड़े हुए हैं। हिंसा इतनी भयावह थी कि मरने वालों के शरीर के हिस्से तक अलग हो चुके हैं। स्थिति यह है कि एक पैर, एक गर्दन और थैले में भरी हड्डियां मोर्चरी में रखी हैं। डॉक्टरों के अनुसार, थैले में जिस शख्स की हड्डियां हैं, उसकी पहचान मोसीन के रूप में हुई है, जबकि पैर और गर्दन किसकी है, इसके बारे में उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
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अस्पताल के फोरेंसिक जानकारों ने दोनों का सैंपल सुरक्षित रख लिया है, ताकि डीएनए जांच के जरिये शिनाख्त किया जा सके। बताया जा रहा कि इन दोनों अंगों की स्थिति अब बिगड़ने लगी है। यानी बॉडी डिकंपोज होने लगी है अगले तीन दिन तक ही इन्हें मोर्चरी में रखा जा सकता है। अगर इस बीच भी कोई परिजन इनकी शिनाख्त के लिए नहीं पहुंचे, तो डॉक्टरों के पास डिस्पोज करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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जीटीबी हॉस्पिटल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि मोर्चरी में एक पैर और एक गर्दन के अलावा दिल्ली पुलिस एक थैले में हड्डियां लाई थी। हड्डियां देखकर हर कोई दंग रह गया था। पुलिस की मदद से शव की शिनाख्त तो कर दी गई है, लेकिन पोस्टमार्टम मंगलवार को हो सकेगा। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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अब फोरेंसिक विशेषज्ञों के आगे सबसे बड़ी चुनौती है कि आखिर ऐसा कौन सा हथियार या रसायन इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से मौसीन की हड्डियां अलग-अलग हो गई और पुलिस को उसे झोले में भरकर लाना पड़ा। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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दिल्ली हिंसा की आग अब ठंडी हो चुकी है। स्थितियां पटरी पर लौट रही हैं। इन सब के इतर आरएमएल हॉस्पिटल की मोर्चरी में भी पांच शवों रखे गए हैं। जिनकी अभी तक पोस्टमॉर्टम नहीं किया जा सका है। पांच में से एक शव की शिनाख्त सोमवार को हो चुकी है, जिसका नाम आफताब है। बाकी चार शवों की पहचान अभी भी नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि शवों की पहचान के बाद ही पोस्टमार्टम किया जा सकेगा। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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जीटीबी अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि मोर्चरी में जो दो अंग हैं, उनमें से एक गर्दन शाहबाज की हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि डीएनए जांच पूरी होने के बाद ही संभव है। शाहबाज हिंसा के दिन से लापता है। मंगलवार को उसके परिजन जीटीबी आकर अपना सैंपल देंगे, जिनके आधार पर डीएनए जांच की जा सकेगी। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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फोरेंसिक साइंस के इतिहास में दिल्ली की हिंसा एक गंभीर अपराध के रूप में दर्ज हुई है। इस हिंसा में जिस तरह की मौतें देखने को मिली हैं उनसे अपराध की गंभीरता और उपद्रवियों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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मरने वालों की संख्या हुई 47: दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में 23, 24 और 25 फरवरी को हिंसा हुई थी। इसमें अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। 300 से ज्यादा जख्मी हैं। रविवार को दिल्ली पुलिस ने गोकुलपुरी के दो नहरों से 4 शव बरामद किया था। बताया जा रहा कि 47 शवों में से अभी भी 7 शवों की पहचान नहीं हो सकी है। (फोटोः हिंसा के दौरान सदस्य की मौत पर रोते परिजन)
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25 फरवरी की शाम से शांतिः नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध करने वाले गुटों के आमने सामने आने के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली इलाके में हिंसा शुरू हुई थी।
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हिंसा में मुख्य रूप से जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग, खुरेजी खास, गोकुलपुरी और भजनपुरा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दिल्ली में 25 फरवरी की शाम के बाद से हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई। हालांकि, हिंसा को लेकर रविवार शाम को अफवाह जरूरी फैली थीं। (फाइल फोटोः दिल्ली हिंसा)
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