निर्भया के दोषियों की मौत की तारीख तय होते ही भड़क गए वकील, कहा, कितनी बार मारोगे
नई दिल्ली. निर्भया के चारों दोषियों की मौत के लिए फाइनल डेथ वॉरंट जारी हो गया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे चारों दोषियों को फांसी देने का वक्त तय किया है। दोषियों की फांसी की तारीख तय होने पर वकील एपी सिंह बौखला गए। उन्होंने कहा कितनी बार मारोगे। चार बार डेथ वॉरंट देकर मार चुके हो। ज्यूडिशियल कीलिंग मत कीजिए। यह पहला मौका नहीं है जब वकील एपी सिंह ने पब्लिक में अपना गुस्सा जाहिर किया। उससे पहले भी वह अपने बयानों को लेकर विवादों पर रहे हैं। एपी सिंह ने कहा, आज चौथा वॉरंट जारी हुआ है। तीन बार पहले भी उन्हें फांसी दे चुके हैं और कितनी बार उनको फांसी दोगे? उन्होंने कहा कि ये आतंकवादी नहीं हैं यह पढ़े लिखे हैं। ये जेल में सुधर रहे हैं।
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एपी सिंह ने कहा, आज चौथा वॉरंट जारी हुआ है। तीन बार पहले भी उन्हें फांसी दे चुके हैं और कितनी बार उनको फांसी दोगे?
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दोषियों के पास अब भी कोई कानूनी विकल्प बचे हैं? - नहीं, चारों दोषियों के क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका के विकल्प खत्म हो चुके हैं। हां, बाकी तीन दोषियों को तरह ही दोषी पवन भी दया याचिका खारिज होने के खिलाफ कोर्ट जा सकता है।
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दया याचिका खारिज होने के बाद दोषी को 14 दिन का वक्त दिया जाता है। इसके पीछे की वजह है साल 2014 का शत्रुघ्र चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामला है। इस केस में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि मौत की सजा पाने वाले कैदी को फांसी के लिए मानसिक रूप से तैयार होने के लिए कम से कम 14 दिन का वक्त दिया जाए।
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निर्भया के पहले दोषी का नाम अक्षय ठाकुर है। यह बिहार का रहने वाला है। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है।
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दूसरे दोषी को नाम मुकेश सिंह है। यह बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था। गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था।
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तीसरा दोषी पवन गुप्ता है। पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है।
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चौथा दोषी विनय शर्मा है। विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन बच गया।
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3 मार्च को फांसी क्यों नहीं हुई?- दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी कर 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी की तारीख तय की थी। लेकिन दोषी पवन ने 2 मार्च को दया याचिका लगा दी। इस वजह से कोर्ट ने डेथ वॉरंट को रद्द कर दिया।
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7 जनवरी को पहला डेथ वॉरंट जारी हुआ था, जिसके मुताबिक 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया।
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दूसरा डेथ वॉरंट 17 जनवरी को जारी हुआ, दूसरे डेथ वॉरंट के मुताबिक, 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी देना का आदेश था। फिर 31 जनवरी को कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए फांसी टाली दी।
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तीसरा डेथ वॉरंट 17 फरवरी को जारी हुआ। इसके मुताबिक 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी का आदेश दिया गया।
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क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड?- दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया।
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13वें दिन निर्भया ने सिंगापुर में दम तोड़ दिया था: बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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एपी सिंह ने आरोप लगाता था कि दोषियों के हस्ताक्षर के बिना ही दया याचिका भेज दी गई थी।
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वकील एपी सिंह ने गृह मंत्री की फर्जी साइन का भी आरोप लगाया था।
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एपी सिंह का व्यक्तिगत रूप से मानना है कि लड़कियों की छेड़छाड़ के पीछे पाश्चात सभ्यता एक बड़ी वजह है। इस बयान पर काफी हंगामा भी हुआ था।
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एपी सिंह ने कहा था कि निर्भया का भाई तो पायलट बन गया, लेकिन दोषियों को परिवार को क्या मिला?
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एपी सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि केस लड़ते लड़ते दोषियों का परिवार बर्बाद हो गया।
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निर्भया गैंगरेप पर एपी सिंह ने कहा था कि चींटी को भी नहीं मारना चाहिए।
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एपी सिह ने कहा था कि चारों दोषी सात साल से सजा काट रहे हैं।
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