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क्या पाकिस्तान से मिलकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा चीन? खुली पोल

First Published Sep 3, 2020, 1:50 PM IST
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नई दिल्ली. लद्दाख सीमा पर चीन लगातार चालबाजी कर रहा है और हर बार उसकी कोशिश नाकाम हो जा रही है। भारतीय सैनिक भी चीन की चालबाजी का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। इस बीच अब चीन की एक और चाल का खुलासा हुआ है। चीन VT-4 टैंक की नई टेक्नोलॉजी पाकिस्तान को दे रहा है। इसके साथ ही करीब 350 से ज्यादा टैंकों को बेहतर करने के लिए इससे जुड़ी आधुनिक टैक्नोलॉजी चीन पाकिस्तान को देगा। ऐसे में अब सवाल खड़ा हो रहा है, क्या चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ को कोई बड़ी साजिश रच रहा है? इससे पहले भी कई मोर्चों पर चीन पाकिस्तान का साथ देता आया है और अब एक बार फिर से वही बात साबित हुई है। 
 

खबरों की मानें तो VT-4 मेन बैटल टैंक हैं, जिसे MBT-300 भी कहते हैं। चीन के बने इस टैंक को थर्ड जेनरेशन टैंक माना जाता है, इसका इस्तेमाल PLA करती है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि चीनी कंपनी पाकिस्तान के लिए 120 अल-खालिद-1 टैंक बनाने में मदद कर रही है। 

खबरों की मानें तो VT-4 मेन बैटल टैंक हैं, जिसे MBT-300 भी कहते हैं। चीन के बने इस टैंक को थर्ड जेनरेशन टैंक माना जाता है, इसका इस्तेमाल PLA करती है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि चीनी कंपनी पाकिस्तान के लिए 120 अल-खालिद-1 टैंक बनाने में मदद कर रही है। 

इसके अलावा कहा जा रहा है कि पाक की सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए चीन हर साल 25 टैंक अल-खालिद-1 टैंक पाकिस्तान को तैयार कराने में मदद करेगा। चीन की कंपनी चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NORINCO) पाकिस्तान की T-85 टैंक का अपग्रेडेशन करेगी। इसके लिए PAK और चीन की बड़ी सहमति हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि 90 से ज्यादा तकनीकी रूप से खराब पाकिस्तान के T-85 टैंक की मरम्मत चीन करेगा।

इसके अलावा कहा जा रहा है कि पाक की सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए चीन हर साल 25 टैंक अल-खालिद-1 टैंक पाकिस्तान को तैयार कराने में मदद करेगा। चीन की कंपनी चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NORINCO) पाकिस्तान की T-85 टैंक का अपग्रेडेशन करेगी। इसके लिए PAK और चीन की बड़ी सहमति हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि 90 से ज्यादा तकनीकी रूप से खराब पाकिस्तान के T-85 टैंक की मरम्मत चीन करेगा।

इतना ही नहीं चीन पाकिस्तान के लिए सिर्फ टैंक अपग्रेडेशन में ही मदद नहीं कर रहा है बल्कि आर्टिलरी को भी बेहतर करने के लिए भी पूरी तरह से मदद कर रहा है। बॉर्डर पर पाकिस्तान हर रोज गोलीबारी के लिए इन्हीं का इस्तेमाल करता है। 

इतना ही नहीं चीन पाकिस्तान के लिए सिर्फ टैंक अपग्रेडेशन में ही मदद नहीं कर रहा है बल्कि आर्टिलरी को भी बेहतर करने के लिए भी पूरी तरह से मदद कर रहा है। बॉर्डर पर पाकिस्तान हर रोज गोलीबारी के लिए इन्हीं का इस्तेमाल करता है। 

पाकिस्तान चीन की SH-15 ट्रैक माउंटेड गन (MSG) को खरीदने की फिराक में है। जानकार ये कहते हैं कि चीन पाकिस्तान को चुपचाप कम पैसों में इस तरीके की गन बेच रहा है। इसका इस्तेमाल पाकिस्तान POK में कई जगह कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान 236 के करीब SH-15 हॉवित्जर खरीदना चाहता है। पिछले साल पाक सेना ने इस सिलसिले में चीन से इसके लिए 512 मिलियन डॉलर की डिफेंस डील भी की थी। इन गनों को पाक सेना की 13 आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया जाएगा। 

पाकिस्तान चीन की SH-15 ट्रैक माउंटेड गन (MSG) को खरीदने की फिराक में है। जानकार ये कहते हैं कि चीन पाकिस्तान को चुपचाप कम पैसों में इस तरीके की गन बेच रहा है। इसका इस्तेमाल पाकिस्तान POK में कई जगह कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान 236 के करीब SH-15 हॉवित्जर खरीदना चाहता है। पिछले साल पाक सेना ने इस सिलसिले में चीन से इसके लिए 512 मिलियन डॉलर की डिफेंस डील भी की थी। इन गनों को पाक सेना की 13 आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया जाएगा। 

बता दें कि SH-15 आर्टिलरी गन को चीनी ट्रक शांक्सी के जरिए जरुरत के मुताबिक, LOC के नजदीक डिप्लॉय करने की योजना बना रहा है। चीन,पाकिस्तान को A-100 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर की एक खेप दे चुका है और एक बड़ी खेप 2022 तक देने की तैयारी कर रहा है। 

बता दें कि SH-15 आर्टिलरी गन को चीनी ट्रक शांक्सी के जरिए जरुरत के मुताबिक, LOC के नजदीक डिप्लॉय करने की योजना बना रहा है। चीन,पाकिस्तान को A-100 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर की एक खेप दे चुका है और एक बड़ी खेप 2022 तक देने की तैयारी कर रहा है। 

जानकारी के मुताबिक, चीन की मदद से पाकिस्तान अपना साइबर विंग मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान चीन की मदद से VOIP यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए खुफिया मॉनिटरिंग करना चाहता है। यही नहीं पाकिस्तान को साइबर वॉर फेयर के लिए उसको अलग से इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी लैब स्थापित करने के लिए फंडिंग करने में जुटा है।

जानकारी के मुताबिक, चीन की मदद से पाकिस्तान अपना साइबर विंग मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान चीन की मदद से VOIP यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए खुफिया मॉनिटरिंग करना चाहता है। यही नहीं पाकिस्तान को साइबर वॉर फेयर के लिए उसको अलग से इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी लैब स्थापित करने के लिए फंडिंग करने में जुटा है।

पिछले कुछ महीनों में लगातार यह देखा जा रहा है कि चीन पाकिस्तान को लगातार आधुनिक और हाईटेक हथियारों की सप्लाई करने में लगा हुआ है। कई बार इन हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तानी आर्मी के जरिए जैश और लश्कर के आतंकी कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में करते रहते हैं।

पिछले कुछ महीनों में लगातार यह देखा जा रहा है कि चीन पाकिस्तान को लगातार आधुनिक और हाईटेक हथियारों की सप्लाई करने में लगा हुआ है। कई बार इन हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तानी आर्मी के जरिए जैश और लश्कर के आतंकी कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में करते रहते हैं।

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