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कौन हैं IPS अमिताभ यश, जिन्होंने विकास दुबे के लिए रचा चक्रव्यूह, एनकाउंटर को किया लीड
नई दिल्ली. कानपुर में 8 पुलिसवालों की हत्या के आरोपी विकास दुबे का एनकाउंटर हो गया। पूरे ऑपरेशन में एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश का बड़ा रोल है। उन्होंने ही पूरे ऑपरेशन को हैंडल किया। बता दें कि अमिताभ यश 1996 बैच के आईपीएस अफसर हैं और वह फिलहाल एसटीएफ के मुखिया भी हैं। शुक्रवार की सुबह 6.30 बजे एटीएस ने विकास दुबे का एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के मुताबिक, जिस गाड़ी से विकास को लाया जा रहा था, उसका एक्टिडेंट हो गया। इसके बाद विकास ने भागने की कोशिश की। उसने पुलिसवाले की बंदूक भी छीन ली। इसी दौरान पुलिस ने आत्मरक्षा में उसे गोली मार दी।

कानपुर के बिकरु में 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद पुलिस की काफी आलोचना की गई। इसके बाद विकास और उसके साथियों की तलाश के लिए एसटीएफ को लगाया गया। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने मोर्चा संभाला। पूरा अभियान अमिताभ यश के निर्देश पर चलाया जा रहा था।
अमिताभ ने बुंदेलखंड के डकैतों का अंत किया था
आईपीएस अधिकारी आईजी अमिताभ यश हैं, जिनकी पहचान बुंदेलखंड के बीहड़ में डकैतों का अंत करने के लिए जाना जाता है। इन्हीं की टीम विकास दुबे को उज्जैन से लेकर कानपुर आ रही थी।
केमेस्ट्री में एमएससी है अमिताभ
अमिताभ यश केमेस्ट्री में एमएससी कर चुके हैं और पुलिस विभाग में उन्हें उस अफसर के रूप में जाना जाता है जो अपनी टीम पर बहुत भरोसा करते हैं।
विकास दुबे की तलाश में लगे थे अमिताभ
अमिताभ यश कानपुर में हुए कांड के बाद से ही पुलिस विभाग, इंटेलिजेंस और लोकल यूनिट एसटीएफ के साथ विकास दुबे की तलाश कर रहे थे।
मूल रूप से बिहार के रहने वाले अमिताभ यश अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये के लिए जाने जाते हैं। अमिताभ एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी प्रसिद्ध हैं।
अमिताभ यश ने ही 21 जुलाई 2007 को ददुआ का एनकाउंटर किया था। इसके बाद उन्होंने कुख्यात डकैत ठोकिया को भी मार गिराया। ददुआ को मारने के लिए अमिताभ यश अपनी टीम के साथ जंगल में 50 किमी तक पैदल चले गए थे।
विकास दुबे को क्यों मारी गई गोली
उत्तर प्रदेश के एडीजी प्रशांत कुमार का विकास दुबे के एनकाउंटर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, विकास दुबे ने घायल पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने पीछा किया और उसे घेरकर आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन वह नहीं माना। उसने पुलिस टीम पर जान लेने की लिए फायरिंग की। आत्मरक्षा के लिए पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें वह घायल हो गया। इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
- घटना में चार पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त एसटीएफ के दो लोग घायल हैं। कानपुर मुठभेड़ में कुल 21 अभियुक्त नामजद थे और 60 से 70 अन्य अभियुक्त थे। जिसमें से अब तक 3 लोग गिरफ्तार हुए हैं, 6 मारे गए हैं और 120 बी के अंदर 7 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। 12 इनामी बदमाश वांछित चल रहे हैं।
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