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4300 किमी प्रति घंटा स्पीड...भारत ने किया इस खतरनाक हथियार का सफल परीक्षण, जानिए क्या है इसकी खासियत

First Published Nov 24, 2020, 1:34 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान और चीन से विवाद के बीच भारत ने मंगलवार को अपनी सबसे खतरनाक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह लैंड अटैक वर्जन है। इसका परीक्षण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एक अज्ञात द्वीप से किया गया। मिसाइल ने सफलता पूर्वक एक अन्य वीरान द्वीप पर लगाए गए टारगेट को ध्वस्त कर दिया। इस परीक्षण के जरिए मिसाइल की रेंज भी बढ़ाई गई है। आईए जानते हैं इसकी खासियतें...

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लैंड अटैक वर्जन का परीक्षण किया। जमीन से जमीन पर मार करने वाले इस मिसाइल की रेंज अब बढ़कर 400 किमी हो गई है। भारत ने पिछले कुछ महीनों में विवाद के बीच कई मिसाइलों, टॉरपीडो, एंटी-मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है।

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लैंड अटैक वर्जन का परीक्षण किया। जमीन से जमीन पर मार करने वाले इस मिसाइल की रेंज अब बढ़कर 400 किमी हो गई है। भारत ने पिछले कुछ महीनों में विवाद के बीच कई मिसाइलों, टॉरपीडो, एंटी-मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है।

ब्रह्मोस मिसाइल 28 फीट लंबी है। इसका वजन 3000 किग्रा है। इसमें  200 किलोग्राम के पारंपरिक और परमाणु हथियार लगाए जा सकते हैं। यह 400 किमी दूर तक बैठे दुश्मन पर अचूक निशाना लगा सकती है। 

ब्रह्मोस मिसाइल 28 फीट लंबी है। इसका वजन 3000 किग्रा है। इसमें  200 किलोग्राम के पारंपरिक और परमाणु हथियार लगाए जा सकते हैं। यह 400 किमी दूर तक बैठे दुश्मन पर अचूक निशाना लगा सकती है। 

 ब्रह्मोस मिसाइल की गति इसे घातक बनाती है। यह 4300 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हमला करती है। इसके छूटने के बाद दुश्मन को बचने या हमला करने का मौका भी नहीं बचता। 

 ब्रह्मोस मिसाइल की गति इसे घातक बनाती है। यह 4300 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हमला करती है। इसके छूटने के बाद दुश्मन को बचने या हमला करने का मौका भी नहीं बचता। 

हाल ही में वियतनाम ने भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जताई थी। हालांकि, इसमें रूस की अनुमति की भी जरूरत थी। क्योंकि इसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है। लेकिन अब रूस ने भी इसकी अनुमति दे दी है। ऐसे में ये मिसाइल वियतनाम में भी तैनात हो सकेगी। यह चीन के लिए नई चुनौती साबित होगी। 
 

हाल ही में वियतनाम ने भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जताई थी। हालांकि, इसमें रूस की अनुमति की भी जरूरत थी। क्योंकि इसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है। लेकिन अब रूस ने भी इसकी अनुमति दे दी है। ऐसे में ये मिसाइल वियतनाम में भी तैनात हो सकेगी। यह चीन के लिए नई चुनौती साबित होगी। 
 

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