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लद्दाख: गांव वाले कर रहे सेना की मदद, पहाड़ों पर पहुंचाया सामान, बोले-'नहीं सहेंगे चीन का कब्जा'

First Published Sep 6, 2020, 3:32 PM IST
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लद्दाख. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी पर भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच तनातनी है। दोनों देशों के बीच कइयों बार अफसर स्तर की बैठक हो चुकी है, जिसका अभी तक कोई फायदा नजर नहीं आया। क्योंकि, हाल ही में चीन एक बार फिर से एलएसी चुपके से पार करने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना ने उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। इतनी ही नहीं, चीनी सेना का वापस ढकेलने के बाद भारतीय सेना ने बहादुरी का परचम लहराते हुए  पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर स्थित कई ऊंचे पहाड़ों पर कब्जा भी जमा लिया। 
 

इस बड़े ऑपरेशन में भारतीय सेना के साथ-साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर रहने वाले गांव वालों ने भरपूर मदद की। इन दुर्गम इलाकों के हर एक चप्पे से वाकिफ गांव वालों ने सेना का सामान, राशन और दूसरी जरूरी चीजें कंधों पर उठाकर पहाड़ों पर पहुंचा दी है।  

इस बड़े ऑपरेशन में भारतीय सेना के साथ-साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर रहने वाले गांव वालों ने भरपूर मदद की। इन दुर्गम इलाकों के हर एक चप्पे से वाकिफ गांव वालों ने सेना का सामान, राशन और दूसरी जरूरी चीजें कंधों पर उठाकर पहाड़ों पर पहुंचा दी है।  

यहां के स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना को भरोसा दिलाया कि चीन के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में वह भारतीय सेना के साथ खड़े रहेंगे। इन लोगों ने भारतीय सेना की मदद करने के एवज में किसी तरह की मजदूरी लेने से भी इनकार कर दिया। 

यहां के स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना को भरोसा दिलाया कि चीन के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में वह भारतीय सेना के साथ खड़े रहेंगे। इन लोगों ने भारतीय सेना की मदद करने के एवज में किसी तरह की मजदूरी लेने से भी इनकार कर दिया। 

लद्दाख की सीमा पर स्थित गांव वालों ने कहा कि चीन के खिलाफ हर अभियान में वो भारतीय सेना के साथ हैं। 

लद्दाख की सीमा पर स्थित गांव वालों ने कहा कि चीन के खिलाफ हर अभियान में वो भारतीय सेना के साथ हैं। 

दरअसल, चीन की अड़ंगेबाजी से यहां रहने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। चीन की गतिविधियों की वजह से इनकी रोजाना की जिंदगी पर असर पड़ा है। 
 

दरअसल, चीन की अड़ंगेबाजी से यहां रहने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। चीन की गतिविधियों की वजह से इनकी रोजाना की जिंदगी पर असर पड़ा है। 
 

अब उन्हें पहाड़ों पर कहीं भी आने-जाने में सावधानी रखनी पड़ती है। उनका कहना है कि जिन पहाड़ों पर उनके पूर्वज दशकों से मवेशी चराते आए हैं, उन पर वो कभी भी चीन का कब्जा नहीं देखना चाहते हैं। 

अब उन्हें पहाड़ों पर कहीं भी आने-जाने में सावधानी रखनी पड़ती है। उनका कहना है कि जिन पहाड़ों पर उनके पूर्वज दशकों से मवेशी चराते आए हैं, उन पर वो कभी भी चीन का कब्जा नहीं देखना चाहते हैं। 

आम लोगों की तरफ से यह सहयोग मिलने के बाद भारतीय सेना का मनोबल भी काफी बढ़ा हुआ है।  

आम लोगों की तरफ से यह सहयोग मिलने के बाद भारतीय सेना का मनोबल भी काफी बढ़ा हुआ है।  

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