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ये हैं देश के सबसे विवादित एनकाउंटर, किसी में पुलिसवालों को हुई सजा तो कहीं निशाने पर आई सरकार
नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार सुबह मुठभेड़ में मारा गया। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और पुलिस की तारीफ हो रही है, वहीं, दूसरी ओर एनकाउंटर पर सवाल उठने भी शुरू हो गए हैं। यहां तक की कुछ लोग इसे फेक एनकाउंटर तक बता रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई ऐसे पुलिस एनकाउंटर रहे हैं, जिन पर सवाल उठे हैं। आईए जानते हैं कुछ ऐसे ही एनकाउंटर, जिन पर लोगों ने उंगली उठाई हो...

इशरत जहां मामला
गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते कई बड़े एनकाउंटर हुए। अकेले 2002-06 तक 23 एनकाउंटर हुए। 15 जून को पुलिस और आईबी ने इशरत जहां और उसके तीन साथियों को ढेर कर दिया था। इस लोगों ने फर्जी मुठभेड़ बताया था। इस पर पुलिस का कहना था कि इन लोगों का संबंध आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से था। ये लोग गोधरा दंगों का बदला लेने के लिए नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे।
सोहराबुद्दीन शेख मामला
सोहराबुद्दीन शेख अंडरवर्ल्ड का अपराधी था। उस पर आतंकवादियों से संबंध रखने का आरोप था। 22 नवंबर 2005 को सोहराब अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र जा रहा था। इस दौरान पुलिस ने सोहराबुद्दीन , उसकी पत्नी और एक सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया था। गुजरात एटीएस और राजस्थान एटीएस ने अहमदाबाद के नजदीक एक एनकाउंटर में सोहराबुद्दीन को मार गिराया था। 2010 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। इसमें तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को भी आरोप बनाया गया था। सीबीआई की विशेष अदालत ने 2018 में सभी को बरी कर दिया।
तुलसीराम प्रजापति मामला
सोहराबुद्दीन के सहयोगी को पुलिस ने एक मुठभेड़ में दिसंबर 2006 में मार गिराया था। इस एनकाउंटर को भी फर्जी बताया गया था। हालांकि, पुलिस इसे सही करार देती रही।
लखन भैया एनकाउंटर
लखन भैया गैंगस्टर छोटा राजन का गुर्गा था। 11 नवंबर 2006 में वह पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था। लखन के भाई ने दावा किया कि यह एनकाउंटर फर्जी है, उसने तथ्यों के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह एनकाउंटर फेक पाया गया। मुंबई की एक अदालत ने 2013 में 21 लोगों को दोषी पाया। इसमें कई पुलिसवाले भी शामिल थे। इन सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
आंध्र प्रदेश स्मगलर मुठभेड़
आंध्रप्रदेश पुलिस ने 7 अप्रैल 2015 को 20 कथित चंदन तस्करों को मुठभेड़ में मार दिया था। ये एनकाउंटर चित्तूर के जंगलों में हुआ था। पुलिस का आरोप था कि इन लोगों ने पुलिस पर हंसियों, लोहे की छड़ों और कुल्हाड़ियों से हमला किया था। हालांकि, इस थ्योरी पर सवाल उठते रहे।
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