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तमिलनाडु में कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा, 22 जिले हॉटस्पॉट, जानिए किस लिस्ट में है आपका शहर
देश में कोरोना को रोकने के लिए सभी राज्यों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। हॉटस्पॉट जिले, नॉन-हॉटस्पॉट जिले और तीसरा ग्रीन जोन जिला। 170 जिलों को हॉटस्पॉट (रेड जोन) घोषित किया गया है। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 12 हजार 370 तक पहुंच गई है। अब तक 422 लोग लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अब तक 1508 लोग ठीक हो चुके हैं। तमाम अस्पतालों में 10 हजार से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।
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दिल्ली के सभी 9 जिले हॉटस्पॉट शहरों में शामिल किए गए हैं। मध्य प्रदेश के 5 और गुजरात के 5 जिले भी हॉटस्पॉट में शामिल हैं।
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हॉटस्पॉट, नॉन-हॉटस्पॉट और ग्रीन जोन का क्या मतलब?- देश के वह जिले जो सबसे ज्यादा संक्रमित है। जहां जहां ज्यादा मामले आ रहे हैं या मामलों की बढ़ने की गति तेज है। इसमें उन शहरों को शामिल किया गया है जहां से देश या राज्य के 80% से ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आए। इसके साथ ही ऐसी जगह जहां पर संक्रमण का स्तर अधिक है और 4 दिन से कम समय में केस दोगुना हो रहे हैं।
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नॉन हॉटस्पॉट वह जिले हैं जहां कोरोना के मामले सामने आ तो रहे हैं, लेकिन बहुत धीरे-धीरे। इन जिलों में संक्रमण की गति बहुत धीमी है। इन जिलों को व्हाइट जोन जिला भी कहा जाएगा।
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ग्रीन जोन जिले वह हैं, जहां कोई मामला सामने नहीं आया है। देश के 359 जिलों को व्हाइट जोन जिला घोषित किया गया है।
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देश के 170 हॉटस्पॉट जिले- देश के हॉटस्पॉट जिलों में तमिलनाडु के 22, राजस्थान के 11, महाराष्ट्र के 11, आंध्रप्रदेश के 11, दिल्ली के 9, उत्तर प्रदेश के 9, तेलंगाना के 8, कर्नाटक के 8, जम्मू-कश्मीर के 6, केरल के 6, मध्य प्रदेश के 5, गुजरात के 5, हरियाणा के 4, पंजाब के 4, पश्चिम बंगाल के 4, ओडिशा के 1, बिहार के 1, चंडीगढ़ के 1, छत्तीसगढ़ के 1 और उत्तराखंड का 1 जिला शामिल है।
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कैबिनेट सेक्रेटरी ने सभी मुख्य सचिवों, डीजीपी, स्वास्थ्य सचिवों, कलेक्टरों, एसपी, नगर आयुक्तों और सीएमओ के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की, जिसमें हॉटस्पॉट्स पर चर्चा की गई। लव अग्रवाल ने बताया, वीडियो कॉन्फ्रेंस में जमीनी स्तर पर कंटेनमेंट की रणनीति को लेकर चर्चा हुई।
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कोरोना प्रभावित जिलों को भी दो हिस्सों में बांटा जाएगा। कंटेनमेंट जोन और बफर जोन। कंटेनमेंट जोन को भी सेक्टर में बांटा जाएगा, जिसमें एक सेक्टर में 50 घर होंगे। लोकल ट्रांसमिशन पर निगरानी और कोरोना को फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा।
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आरआटी (रैपिड रिस्पॉन्स टीम) कंटेनमेंट जोन की पहचान कोरोना के केस, उनके संपर्क के आधार पर करेगी।
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लव अग्रवाल ने बताया, जिलों को बताया गया है कि वो कोविड डेडिकेटिड अस्पताल, माइल्ड केस के लिए कोविड केयर सेंटर और गंभीर मामलों के लिए कोविड हेल्थ सेंटर, नाजुक मामलों के लिए कोविड अस्पताल बनाएं, जहां वेंटिलेटर भी मौजूद हो।- लव अग्रवाल ने बताया, सभी जिलों को कहा है कि वो जिला स्तर पर कोरोना के लिए एक संकट प्रबंधन प्लान बनाएं। जिलों को कहा है कि एक की असफलता पूरे देश की असफलता का कारण हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि कंटेनमेंट प्लान पूरे देश में हर जिले में समान रूप से लागू हो।
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