क्या बंगाल में TMC नेताओं पर लगातार हमले बढ़ती राजनीतिक हिंसा का संकेत हैं? क्या चंडीतला में कल्याण बनर्जी पर हमला जनता का गुस्सा था या सुनियोजित विरोध? अभिषेक बनर्जी के बाद एक और सांसद पर हमला क्यों हुआ? क्या “चोर-चोर” के नारे सत्ता-विरोधी लहर को दर्शाते हैं या राजनीतिक टकराव को?
West Bengal Political Violence: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा और तनाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को हुए जानलेवा हमले के ठीक 24 घंटे बाद, रविवार सुबह हुगली में पार्टी के एक और कद्दावर सांसद को उग्र भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा।

दूसरा हमला, दूसरा सांसद: 24 घंटे के भीतर बंगाल फिर दहल उठा
शनिवार को कोलकाता के पास सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए पत्थरों और अंडों के हमले की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि रविवार सुबह हुगली का चंडीतला इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी जब अपने ही संसदीय क्षेत्र के दौरे पर निकले, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि एक और खौफनाक वारदात होने वाली है। अचानक सैकड़ों लोगों की उग्र भीड़ ने उनके काफिले को घेर लिया। हवा में काले झंडे लहराने लगे और पूरा इलाका "चोर-चोर" के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत सांसद को चारों तरफ से घेर लिया, लेकिन भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
अचानक हुआ वार: जब लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे कल्याण बनर्जी
सस्पेंस और दहशत तब और गहरा गई जब सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए भीड़ में से कुछ अज्ञात चीजें सांसद की तरफ फेंकी गईं। इसी अफरा-तफरी के बीच अचानक एक भारी वस्तु सीधे कल्याण बनर्जी के सिर पर जा लगी। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सिर पर चोट लगते ही सांसद दर्द से कराह उठे। उन्होंने तुरंत अपने दोनों हाथ सिर पर रखे और देखते ही देखते वो वहीं ज़मीन पर ढह गए। सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में उन्हें भीड़ के चंगुल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
सोची-समझी साजिश या जनता का गुस्सा?
इस बैक-टू-बैक हमले ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में एक गहरा सस्पेंस पैदा कर दिया है। ठीक एक दिन पहले सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी को भी उग्र भीड़ के बीच क्रिकेट हेलमेट पहनकर जान बचानी पड़ी थी और आज कल्याण बनर्जी के साथ भी हूबहू वही पटकथा दोहराई गई। टीएमसी ने इस घटना के पीछे सीधे तौर पर विपक्षी दलों की गहरी साजिश और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का सुनियोजित प्रयास बताया है। वहीं दूसरी ओर, विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के बाद भड़की इस चिंगारी के पीछे का रहस्य बेहद संवेदनशील है। यह हमला राजनीतिक प्रतिशोध है या जमीन पर पनप रहा कोई बड़ा जन-आक्रोश, इसकी असल सच्चाई अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि बंगाल में सांसदों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है।

