पालघर में भीड़ ने पीट-पीटकर दो साधुओं की हत्या क्यों की? ऐसे समझिए पूरा घटनाक्रम
मुंबई. एक तरफ देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के पालघर में एक अफवाह के चलते तीन लोगों की हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या के आरोप में 101 लोगों को हिरासत में लिया है। 9 नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया है। महाराष्ट्र के पालघर जिले के कासा इलाके में घटना हुई। कासा पुलिस के मुताबिक, घटना गुरुवार को रात 9.30 से 10 बजे तक बीच हुई। जांच में पता चला है कि तीनों एक कार से मुंबई से आए थे।

रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि पुलिस ने इन आरोपियों को घटना वाले दिन ही पकड़ लिया था।
जिन तीन लोगों की हत्या हुई थी, उनमें से दो की पहचान 35 साल के सुशीलगिरी महाराज और 70 साल के चिकणे महाराज कल्पवृक्षगिरी संत के रूप में हुई है। जबकि तीसरा व्यक्ति उनका ड्राइवर 30 साल का निलेश तेलगड़े था।
जानकारी के मुताबिक, दोनों संत मुंबई से अपने के एक मित्र के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूरत जा रहे थे।
इसी दौरान अचानक रात को कासा पुलिस थाने के पास गडचिंचले गांव मे ग्रामीणों उनकी गाड़ी को रोक दिया। फिर तीनों पर करीब 100 से ज्यादा लोगों ने लाठी-झंडे और पत्थरों से हमला बोल दिया।
बताया जाता है कि घटना के वक्त मौक पर पुलिस भी मौजूद थी। हैरानी की बात यह कि जब पुलिसकर्मियों ने भीड़ को रोकना चाहा तो भीड़ ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया।
पुलिस पर हमला होता देख सिपाही अपनी जीप मौके पर छोड़कर भाग खड़े हुए। हालांकि, बाद में पुलिस ने गांव के करीब 110 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनको हिरासत में ले लिया है।
मामले की जानकारी देते हुए कासा पुलिस स्टेशन प्रभारी आनंदराव काले ने बताया- यह घटना कर्फ्यू के दौरान गुरुवार रात 9:30 से 10 बजे के बीच में हुई थी।
तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए पालघर के सरकारी अस्पताल में भिजवा दिया गया था।
जांच में यह भी सामने आया ही कि ग्रामीणों ने मृतकों को कार से बाहर निकाला और उन पर पत्थर और लाठियों से हमला कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, मरने से पहले तीनों में से किसी एक ने पुलिस स्टेशन में फोन कर इसकी जानकारी दी थी। हालांकि जब तक पुलिस पहुंचती, तब तक वे गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। पुलिस उन्हें हॉस्पिटल ले गई, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र सीएम के बयान को री-ट्वीट करते हुए लिखा, सीएम ने पालघर अपराध में अपना बयान दे दिया है। मैं खासकर सभी राजनीतिक दलों को यह ध्यान दिलाना चाहता हूं कि साधुओं पर हमला करने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार इस तरह के अपराधों को माफ नहीं करेगी।
कुमार विश्वास ने भी इस घटना पर दुख और गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि यह घटना महाराष्ट्र सरकार के माथे पर कलंक है. दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले।
कुमार विश्वास ने ट्वीट किया, महाराष्ट्र शासन के माथे पर कलंक है पालघर की लोमहर्षक घटना! छत्रपति महाराज शिवाजी की धरा पर मित्रता-शत्रुता से उपर उठ चुके साधुओं को अगर उन्मादी जाहिल भीड़ घेर कर मार दें तो यह उस ऐतिहासिक परम्परा पर धब्बा है जिसमें शत्रुपक्ष की महिलाओं तक को आदर दिया जाता है। भीषण दंड मिले।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट किया, महाराष्ट्र के पालघर में 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया। ये घटना गुरुवार की है। आज तक सारे लिबरल्स पूरी तरह से खामोश हैं। कोई लोकतंत्र या संबिधान की दुहाई नहीं दे रहा। देंगे भी क्यों। ये तो संतो की मृत्यु हुई है, कौन पूछता है संतो को?
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, मुंबई से सूरत जाने वाले 3 लोगों की पालघर में हुई हत्याकांड में 101 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। इस घटना को विवादास्पद बनाकर समाज में दरार बनाने वालों पर भी पुलिस नजर रखेगी।
श्री पंचदशानम जूना अखाड़े ने चिट्ठी लिखकर पालघर मॉब लिंचिंग घटना की जांच की मांग की है। चिट्ठी में लिखा है, हमारी अपील है कि कोरोना के इस संकटकाल में अफवाहों से बचिए। ये वक्त मिलकर कोरोना से लड़ने का है।
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