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योग से लेकर स्ट्रिक्ट डाइट तक...पीएम मोदी की तरह, इन 8 तरीकों से खुद को रख सकते हैं फिट और हेल्दी
नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी का 17 सितंबर को 71वां जन्मदिन है। वडनगर में जन्में नरेंद्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उनके ऊपर पूरे देश की जिम्मेदारी है। पूरा दिन व्यस्तता में ही गुजरता है, लेकिन इसके बाद भी वे अपनी सेहत को लेकर कभी भी लापरवाही नहीं करते हैं। यही वजह है कि 70 साल की उम्र में भी उनके चेहरे पर कभी भी थकान नहीं दिखती। हर वक्त ऊर्जा से भरे रहते हैं। रात के वक्त भी कोई कार्यक्रम हो तो उनमें वही सुबह वाली ताजगी दिखती है। लेकिन ऐसा कैसे संभव है? आखिर पीएम मोदी इतनी व्यस्तता और बड़ी जिम्मेदारी के बीच खुद को कैसे फिट रखते हैं। इसी को बताने के लिए Asianet News hindi ने "मोदी, एक सीख" नाम से सीरीज की शुरुआत की है, जिसकी दूसरी कड़ी में बता रहे हैं कि कैसे जिंदगी की भागदौड़ के बीच खुद को फिट और पॉजिटिव रख सकते हैं?

पीएम मोदी की जिंदगी में योग का बहुत महत्व है। उनके दिन की शुरुआत योग से ही होती है। वे हर दिन सुबह वॉकिंग, योग और मेडिटेशन जरूर करते हैं। सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और फिर दूसरे योगासन करते हैं। पीएम मोदी का मानना है कि योग से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है। मांसपेशियों में ताकत आती है। तनाव-अनिद्रा दूर होती है। मोदी का कहना है कि योग निगेटिव से पॉजिटिव की तरफ जाने का रास्ता है। कोई नेगेटिव एनर्जी हमें तोड़ नहीं सकती है। योग स्ट्रेस से स्ट्रेंथ की ओर ले जाता है।
पीएम मोदी अपनी डाइट को लेकर बहुत स्ट्रिक्ट हैं। वे साधारण गुजराती खाना पसंद करते हैं। खिचड़ी उनका पसंदीदा खाना है। हर रोज एक कप दही भी लेते हैं। इसके अलावा मोरिंगा पराठा लेते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि इस पराठे को साप्ताहिक रूप से लेते हैं क्योंकि इसमें पौष्टिकता होती है। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मशरूम का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि मैं योग तो करता ही हूं, लेकिन अच्छी सेहत के लिए हिमाचल प्रदेश का मशरूम भी खाता हूं। ये अनेक गुणों से भरपूर है। पीएम मोदी ने जिस मशरूम का जिक्र किया था, उसका वैज्ञानिक नाम माकरुला एक्स्यूलेंटा है। ये हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होता है।
पीएम मोदी अपनी जिंदगी में उपवास को काफी महत्व देते हैं। 2012 में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया था कि वे 35 सालों से नवरात्रि के दौरान उपवास करते हैं। साल 2014 में अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी परंपरा को नहीं तोड़ा और केवल नींबू पानी लिया। उनका मानना है कि उपवास शरीर को शुद्ध करने का एक बहुत अच्छा तरीका है।
पीएम मोदी के दिन का एक फिक्स रूटीन है, जिसका वे सख्ती से पालन करते हैं। अक्षय कुमार के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, आंख खुलते ही मेरे पैर जमीन पर आ जाते हैं। ये मेरे जीवन का हिस्सा बन गया है। मेरी बॉडी साइकिल ही ऐसी है कि मुझे 3 घंटे से ज्यादा नींद नहीं आती है। वे सुबह 5 बजे उठते हैं और दिन की शुरुआत 30-45 मिनट योग और ध्यान से करते हैं। इसके बाद सुबह 9 बजे तक नाश्ता करते हैं। अपने मंत्रियों को 18 घंटे काम करने की सलाह के साथ ही वह उनके काम की निगरानी भी करते हैं। नरेंद्र मोदी शाम 7:30 बजे तक घर पहुंचने के बाद भी फोन के जरिए अपने मंत्रियों के संपर्क में रहते हैं।
पीएम मोदी बीमारियों से दूर रहने के लिए ज्यादातर योग, आयुर्वेद और शाकाहारी खाने को प्राथमिकता देते हैं। पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा था, मैंने इतना कठिन जीवन जिया, लेकिन कभी डॉक्टर और महंगी दवाओं पर निर्भर नहीं रहा। अगर उन्हें सर्दी होती है तो गर्म पानी पीते हैं। दो दिन तक उपवास करते हैं। इसके अलावा सरसों के तेल को गर्म करते हैं और रात में अपनी नाक में कुछ बूंद डाल लेते हैं।
चुनाव में रैलियों के अलावा पीएम मोदी ने खूब पैदल यात्राएं की हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि लंबी दूरी के वक्त वे हमेशा अपने पास एक असमिया गमोचा या गामुसा (लाल बॉर्डर वाला एक पारंपरिक कपड़ा) रखते थे। दर्द से राहत के लिए इस कपड़े को अपने पैरों के चारों ओर लपेट लेते थे। पीएम ने अरंडी के तेल का भी महत्व बताया था। उन्होंने कहा था, मैं कुछ साल पहले कैलाश यात्रा पर गया था। कुल दूरी लगभग 1000 किलोमीटर थी। मेरे साथ कई लोग थे। उन्होंने अपनी स्किन की देखभाल के लिए बहुत महंगे प्रोडक्ट रखे हुए थे। मेरे पास सिर्फ कच्चा अरंडी का तेल था और बस इसे अपनी स्किन पर लगाया। 6 दिनों के बाद उनकी स्किन जलने लगी, लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ। उस दिन से हर रात साथी ट्रेकर्स मुझसे अरंडी के तेल की कुछ बूंदें लेते थे।
पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आराम और तनाव मुक्त रहने के लिए दिन में कई बार गहरी सांस लेना चाहिए। ध्यान करने से मन को शांति मिलती है। इसके अलावा आध्यात्मिक किताबें पढ़ने से जीवन में पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। वे कहते हैं कि आत्म-प्रेरणा और कड़ी मेहनत स्वस्थ जीवन शैली की कुंजी है।
पीएम मोदी ने कहा था, कोरोना वायरस के दौरान फिटनेस को एक नई परिभाषा मिली है। यह एक जन आंदोलन बन गया है, जो हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी है। पीएम ने कहा था, फिटनेस की डोज आधा घंटा रोज। एक परिवार जो एक साथ खेलता है और व्यायाम करता है, उसमें भावनात्मक जुड़ाव होता है जो COVID-19 के दौरान साबित हुआ है।
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