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अमेरिकी एक्ट्रेस जैसी हष्ट-पुष्ट दिखती थी यह भेड़, इसलिए नाम रख दिया डॉली, दुनिया की पहली क्लोन भेड़ की कहानी
यह कहानी दुनिया की पहली सरोगेसी से पैदा हुई मादा भेड़ डॉली की है। वैज्ञानिक हमेशा से ही जीवों को लेकर कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते हैं। ऐसा ही एक प्रयोग किया गया 5 जुलाई, 1996 में। स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग स्थित रोस्लिन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों की एक टीम ने क्लोन से मादा भेड़ डॉली को पैदा किया था। हालांकि इसकी घोषणा 22 फरवरी, 1997 को की गई थी। करीब 227 बार फेल होने और कई सालों के प्रयोग के बाद डॉली का जन्म हुआ था। डॉली की 14 फरवरी, 2003 को मौत हो गई थी।

दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ था, जब वैज्ञानिकों ने कोशिका से क्लोन बनाया था। इसके लिए न्यूक्लियस ट्रांसफर की तकनीक अपनाई गई। यानी इसमें दो भेड़ें ली गईं। एक काले और एक सफेद मुंह वालीं। इसमें सफेद भेड़ की कोशिकाओं से न्यूक्लियस निकाला और उसे काले मुंह वाली भेड़ के अंडे में डाल दिया। इससे डॉली पैदा हुई। यह पूरी सफेद थी। 2 साल की उम्र में डॉली ने एक मेमने को जन्म दिया। इसका नाम बोनी रखा गया। डॉली ने कुल 5 मेमने पैदा किए।
डॉली ऐसी पहली भेड़ थी, जो मां की कोख से नहीं, लैब में जन्मी थी। इस भेड़ का नाम अमेरिकी सिंगर और एक्ट्रेस डॉली पार्टन के नाम पर रखा गया था। यह भेड़ इस एक्ट्रेस की तरह हष्ट-पुष्ट दिखती थी, इसलिए डॉली नाम रखा गया। इसे बनाया था वैज्ञानिक इयान विलमट और केथ कैंपबेल ने।
(डॉली के साथ इयान)
डॉली ने अपना पूरा जीवन रॉस्लिन इंस्टीट्यूट में ही गुजारा। 2001 में डॉली को आर्थराइटिस की बीमारी हो गई। उसे ठीक कर दिया गया। लेकिन उसकी तबीयत फिर खराब रहने लगी। जब वो काफी बीमार रहने लगी, तो 14 फरवरी, 2003 को उसे यूथेनिशिया(इच्छामृत्यु) दी गई। उसे दवाओं का ओवरडोज देकर मौत की नींद सुला दिया गया।
डॉली की बॉडी स्कॉटलैंड के नेशनल म्यूजियम को डोनेट कर दी गई थी। डॉली के भरे हुए अवशेष आज भी इसी म्यूजियम में रखे हुए हैं। मीडिया डॉली को दुनिया की सबसे अधिक पॉपुलर भेड़ कहते थे।
क्या है क्लोन
क्लोन एक जैविक प्रक्रिया है। इसमें मादा या नर में से किसी एक की कोशिकाओं को निकालकर लैब में उसकी संतति को जन्म दिलाया जाता है। यह अपने माता या पिता की हूबहू कॉपी होती है। यानी क्लोन के डीएनए का हर भाग एक समान होता है। डीएनए एक तरह का आनुवांशिक कोड है।
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