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मुंबई, गुजरात बनारस से लेकर असम तक... देश के इतिहास में सबसे दर्दनाक दंगे, जिन्हें याद कर कांप जाती है रूह
नई दिल्ली. संशोधित नागरिकता कानून को लेकर दिल्ली में जारी हिंसा में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 190 से अधिक लोग घायल है। दंगाईयों को काबू में करने के लिए पुलिस द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि दिल्ली के मौजपुर में 23 फरवरी को हिंसा की चिंगारी भड़की जो फैलते-फैलते बाबरपुर, गोकुलपुरी, ब्रह्मपुरी, करदमपुर, मौदपुर, चांदबाग, भजनपुर, जाफराबाद, करावल नगर तक पहुंच गई। इस हिंसा में जहां एक पुलिस कांस्टेबल दंगाईयों की गोली से शहीद हो गया है। तो वहीं, एक आईबी अफसर का शव बरामद किया गया है। आइए आपको बताते हैं भारत के 11 ऐसे दंगों के बारे में जिन्होंने देश को झंकझोर कर रख दिया।
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अलीगढ़ दंगाः 5 अप्रैल 2006 को हिन्दुओं के पवित्र पर्व रामनवमी के अवसर पर हिंदू और मुसलमानों के बीच बहुत हिंसक दंगा हुआ, जिसमें 6-7 लोगों की मौत हो गई। यहां अकसर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। (फाइल फोटो)
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असम दंगाः असम के कोकराझार में रह रहे बोडो जनजाती और बांग्लादेशी घुसपैठियों के बीच 2012 में दंगा हुआ था। इस दंगे में करीब 80 लोगों की मौत हुई और लाखों लोगों का घर से बेघर होना पड़ा था। (फाइल फोटो)
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भागलपुर दंगाः आजादी के बाद, भारतीय इतिहास के सबसे क्रूर दंगों में से एक था भागलपुर का दंगा। यह दंगा अक्टूबर 1989 को मुख्य रूप से हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच में शुरू हुआ। इस दंगे में तकरीबन 1000 से ज़्यादा निर्दोषों को अपनी जानें गंवानी पड़ी थी। (फाइल फोटो)
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देगंगा दंगाः पश्चिम बंगाल के देगंगा में 2010 कुछ अराजकतत्वों ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ दिया, और मंदिर के खजाने को लूट लिए। जिसके बाद कई लोगों की हत्याएं हुईं और कई लोगों को बेघर होना पड़ा। (फाइल फोटो)
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गुजरात दंगाः देश के सबसे भयंकर दंगों में शामिल गुजरात दंगा 2002 में हुआ था। जब कारसेवक अयोध्या से गुजरात साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से लौट रहे थे। इसी बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने इस ट्रेन की कई बोगियों को गोधरा में आग के हवाले कर दिया था। इस घटना में 59 कारसेवकों की मौत हो गई। बाद में प्रतिकार के रूप में यह घटना एक बड़े दंगे के रूप में तब्दिल हो गयी, जिसमें करीब 2000 लोगों की जानें गईं और लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा। (फाइल फोटो)
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कश्मीर दंगाः 1986 में कश्मीर में मुस्लिम कट्टरपंथी द्वारा कश्मीरी पंडितों को राज्य से बाहर निकालने के कारण दंगा हुआ था। इस दंगे में 1000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गयी थीं और कई हज़ार कश्मीरी पंडित बेघर हो गये थे। (फाइल फोटो)
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कलकत्ता दंगाः सन 1946 में कलकत्ता में हुए इन दंगों को “डायरेक्ट एक्शन दिवस” के नाम से भी जाना जाता है। इसमें 4,000 लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी, और 10,000 से भी ज़्यादा लोग घायल हुए थे। (फाइल फोटो)
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मुज़फ्फरनगर दंगाः 2013 में हिंदू और मुसलमान समुदाय के बीच भयानक दंगा हुआ जिसमें 48 लोगों की जानें गईं और 93 लोग घायल हुए। (फाइल फोटो)
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मुंबई दंगाः इस दंगे की मुख्य वजह बाबरी मस्जिद का विध्वंस था। दिसंबर 1992 में शुरू हुआ दंगा जनवरी 1993 तक चला। इसमें लगभग सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इस दंगे ने हर आदमी की रूह कंपा दी थी। (फाइल फोटो)
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सिख-विरोधी दंगाः 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी की मौत पर इस दंगे की शुरुआत हुई थी। इंदिरा गांधी के सिख अंगरक्षकों ने ही उनकी हत्या कर दी। जिसके बाद अगले ही दिन इस दंगे की शुरुआत हुई जो कई दिनों तक चली। इसमें 800 से ज़्यादा सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था। (फाइल फोटो)
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वाराणसी दंगाः काशी विश्वनाथ की धरती पर 1989, 1990 और 1992 में भयंकर दंगे हुए थे। यह दंगे मुख्यत: हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच पूजा विवाद के कारण हुए थे। इसमें भारी मात्रा में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। (फाइल फोटो)
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