इसी गांव में पलक झपकते फूलन ने बिछा दी थीं 22 लाशें
यह दिल दहलाने वाली कहानी है कानपुर देहात के गांव बेहमई की। यहां 14 फरवरी, 1981 को दस्यु सुंदरी कही जाने वालीं फूलन देवी ने 22 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था। फूलन देवी 1963 में 10 अगस्त को यूपी के एक छोटे-से गांव गोरहा का पूर्वा में पैदा हुई थीं। जानिए इस गांव की कहानी...
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दिल्ली. 'दस्यु सुंदरी' कही जाने वाली फूलन देवी के बारे में कई कहानियां हैं। लेकिन यह वो घटना है, जिसने चंबल की घाटी में फूलन के आतंक को हवा दी। जब-जब फूलन का नाम आएगा, बेहमई नरसंहार सिहरन पैदा करता रहेगा। इसी गांव में फूलन देवी ने 14 फरवरी, 1981 को 22 ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था। इसी हत्याकांड का बदला लेने 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा ने फूलन देवी की हत्या कर दी थी। उसके बाद से यानी करीब 17 साल से इस गांव में शेर सिंह को किसी 'हीरो' की तरह पूजा जाता है। आइए आपको सुनाते हैं चंबल घाटी के एक कलंकित इतिहास बेहमई नरसंहार की कहानी।
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मरने वालों की याद में बना दिया गया स्मारक : 14 फरवरी 1981 को डकैत फूलन देवी का कहर बेहमई गांव पर टूटा था। नदी किनारे बसे इस आखिरी गांव में करीब दोपहर 2.30 बजे फूलन अपने साथियों के साथ घुसी थी। इस कां में मारे गए सुरेन्द्र सिंह की विधवा विद्यावती उस मंजर को याद करते हुए कहती हैं कि फूलन के साथी हर घर में घुस कर लोगों को पकड़ रहे थे। विद्यावती कहती हैं हमारा पूरा परिवार घर में ही मौजूद था। जैसे ही फूलन के साथी घर की तरफ बढे़, हमें आभास हो गया कि कुछ गलत होगा। मेरे ससुर मेरे छोटे से बेटे को गोद में लेकर भागे। हम अलग भागे और पति अलग, लेकिन उन्हें डकैतों ने पकड़ लिया। डकैत कई घरों से लोगों को पकड़ कर पीपल के पास ले गए। तब गांव में सिर्फ डकैत थे या फिर जिन 22 लोगों को पकड़ा गया वो। बाकी सब भाग गए थे। उन्हें एक लाइन में खड़ा कर मार दिया गया।
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बेहमई हत्याकांड के करीब 6 से 7 महीने बाद मरने वालों की याद में एक स्मारक बनाया गया। हालांकि उस पर 20 लोगों के नाम लिखे गए हैं। सुबह-शाम उनकी पूजा की जाती है। बेहमई कांड के गवाह राजाराम सिंह कहते हैं कि अब तो किसी के घर पर रामायण या भगवद गीता भी होती है, तो उसे स्मारक पर ही करवाते हैं। पूरा गांव वहां जुटता है।
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फूलन की हत्या: 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में सरकारी आवास पर फूलन की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में राजस्थान के राजपूत परिवार के शेर सिंह राणा का नाम आया था। बेहमई गांव के रामनरेश बताते हैं कि फूलन की हत्या के बाद से गांव में खुशियां मनाई जाती हैं।
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बेहमई गांव के लोगों ने स्मारक में शेर सिंह राणा की तस्वीर लगा रखी है। राजाराम सिंह कहते हैं कि पता नहीं किसने यह तस्वीर लगाई। पर अब कोई उसे हटाता नहीं है। कुछ लोग शेर सिंह को गांव का हीरो मानते हैं। हालांकि कोई स्वीकार नहीं करता। कानपूर देहात के सीनियर जर्नलिस्ट वीरेंदर गुप्ता कहते हैं कि फूलन की हत्या के छह महीने या साल भर बाद ही शेर सिंह राणा की यहां तस्वीर लगा दी गई थी। लोग शेर सिंह की पूजा करते हैं।
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शेर सिंह गांव आ चुके हैं: गांव के मोनू बताते हैं कि कि शेर सिंह राणा अपनी मां के साथ बेहमई गांव आ चुके हैं। जर्नलिस्ट वीरेंदर गुप्ता ने बताया इसकी खबर मीडिया को भी लगी थी, लेकिन गांववालों ने किसी को कवरेज नहीं करने दिया था।
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बेहमई की कहानी: फूलन देवी ने अपनी किताब में ज्यादतियों की दास्तां बयां की थी। डकैत गिरोह का मुखिया विक्रम मल्लाह फूलन देवी से प्यार करता था। फूलन ने अपनी किताब में विक्रम मल्लाह के साथ बिताई अंतिम रात और उनके साथ हुए गैंगरेप की डिटेल्स बताई थी।फूलन ने किताब में लिखा है -'पहली बार मैं विक्रम के साथ पति-पत्नी की तरह सोई थी।' गोली चलने की आवाज से फूलन देवी की नींद खुली। श्रीराम ने विक्रम मल्लाह को गोलियों से भून डाला और फूलन को साथ ले गया। फूलन ने अपनी किताब में कुसुम नाम की महिला का जिक्र किया है, जिसने श्रीराम की मदद की थी। 'उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए और आदमियों के सामने नंगा छोड़ दिया।' श्रीराम और उसके साथी फूलन को नग्न अवस्था में ही रस्सियों से बांधकर नदी के रास्ते बेहमई गांव ले गए। फूलन ने अपनी किताब में लिखा था कि श्रीराम और उसके साथियों ने मिलकर उसे पूरे गांव में नंगा घुमाया। 'सबसे पहले श्रीराम ने मेरा रेप किया। फिर बारी-बारी से गांव के लोगों ने मेरे साथ रेप किया। वे मुझे बालों से पकड़कर खींच रहे थे।' श्रीराम और उसके साथियों ने फूलन देवी को लाठियों से घायल किया और फिर रेप किया। जिसके बाद 14 फरवरी 1981 को बेहमई में फूलन ने अपना बदला लेने के लिए 20 लोगों की हत्या कर दी थी।
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गांव वाले खारिज करते हैं आरोप: -गांव वाले फूलन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि फूलन सिर्फ लूटपाट के इरादे से गांव में आई थी। जब लोगों ने विरोध किया, तो गुस्से में 22 लोगों की हत्या कर दी। फूलन सिर्फ डकैत और हत्यारी थी। गांव के राजाराम सिंह कहते हैं कि अगर फूलन को ठाकुरों से बदला लेना था, तो नजीर खान और रामऔतार को क्यों मारा जोकि दूसरे गांव के थे।
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