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पाक‍िस्‍तान से भारत आ रहीं 2 दुल्हन, वुमेंस डे पर ससुराल में पहला कदम, शादी के 2 साल पति से होगा दीदार

First Published Mar 8, 2021, 3:03 PM IST
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बाडमेर (राजस्थान). 8 मार्च यानि महिला दिवस जो कि पूरी तरह से महिलाओं के लिए समर्पित है। पूरी दुनिया नारी शक्ति को सलाम करते हुए उनकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट कर रहा है। लेकिन राजस्थान के बाड़मेर जिले में दो परिवार के लिए यह दिन बहुत ही स्पेशल होने जा रहा है। क्योंकि उनके लिए सुखद बात यह है कि शादी के दो साल बाद उनकी बहुओं पाक‍िस्‍तान से भारत आने वाली हैं। ये दोनों दुल्हनें वुमेंस डे के मौके पर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार करते हुए अपनी ससुराल में पहला कदम रखेंगी। इनसे शादी रचाकर हमसफर दूल्हे तो लौट आए, लेकिन दुल्हनों ने ससुराल की चौखट पर कदम नहीं रखा। आइए जानते हैं आखिर किस वजह से वह अपने ससुराल नहीं आ सकीं..

दरअसल, बाड़मेर जिले के रहने वाले महेंद्रसिंह की अप्रैल 2019 में पाकिस्तान के अमरकोट प्रांत के सिणोई गांव में शादी हुई थी। वहीं जैसलमेर जिले के नेपाल सिंह की शादी भी इसी साल जनवरी माह में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुई थी। दोनों दूल्हे थार एक्सप्रेस से बारात लेकर पाकिस्तान पहुंचे थे। शादी के सभी रीति-रिवाज करने के बाद दोनों दूल्हे अपनी दुल्हनों को लाने की तैयारी में थे, लेकिन इसी दौरान पुलवामा की घटना और एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों में तनाव की स्थिति बन गई। जिसके खामियाजा उनको भुगतना पड़ा और वह अपनी हमसफर को साथ नहीं लेकर आ सके। फिर साल 2020 में कोरोना महामारी ने ऐसा कहर बरपाया कि जिसके चलते भी आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया। ( महेंद्र की शादी का फोटो।)

दरअसल, बाड़मेर जिले के रहने वाले महेंद्रसिंह की अप्रैल 2019 में पाकिस्तान के अमरकोट प्रांत के सिणोई गांव में शादी हुई थी। वहीं जैसलमेर जिले के नेपाल सिंह की शादी भी इसी साल जनवरी माह में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुई थी। दोनों दूल्हे थार एक्सप्रेस से बारात लेकर पाकिस्तान पहुंचे थे। शादी के सभी रीति-रिवाज करने के बाद दोनों दूल्हे अपनी दुल्हनों को लाने की तैयारी में थे, लेकिन इसी दौरान पुलवामा की घटना और एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों में तनाव की स्थिति बन गई। जिसके खामियाजा उनको भुगतना पड़ा और वह अपनी हमसफर को साथ नहीं लेकर आ सके। फिर साल 2020 में कोरोना महामारी ने ऐसा कहर बरपाया कि जिसके चलते भी आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया। ( महेंद्र की शादी का फोटो।)

दोनों देशों के तनाव के चलते थार एक्सप्रेस भी बंद कर दी गई। दोनों देशों के बीच रिश्ते टूट गए। हवाई, ट्रेन और बस सेवा बंद कर दी। जिसके कारण भारत के दोनों दूल्हों को  3-4 माह तक वहीं रुकना पड़ा। जब हालत सामन्य हुए तब कहीं जाकर वह अपने देश लौटे। लेकिन दुल्हनों को भारत आने का वीजा नहीं मिला, काफी देर तक वह वीजा मिलने का इंतजार करती रहीं। इतना ही नहीं शादी की सालगिरह भी निकल गईं, पर वह अपने पिया के घर नहीं आ सकीं।  (जैसलमेर के दूल्हा विक्रम सिंह फाइल फोटो)

दोनों देशों के तनाव के चलते थार एक्सप्रेस भी बंद कर दी गई। दोनों देशों के बीच रिश्ते टूट गए। हवाई, ट्रेन और बस सेवा बंद कर दी। जिसके कारण भारत के दोनों दूल्हों को  3-4 माह तक वहीं रुकना पड़ा। जब हालत सामन्य हुए तब कहीं जाकर वह अपने देश लौटे। लेकिन दुल्हनों को भारत आने का वीजा नहीं मिला, काफी देर तक वह वीजा मिलने का इंतजार करती रहीं। इतना ही नहीं शादी की सालगिरह भी निकल गईं, पर वह अपने पिया के घर नहीं आ सकीं।  (जैसलमेर के दूल्हा विक्रम सिंह फाइल फोटो)

मीडिया जानकारी के मुताबिक, दोनों  पाकिस्तानी दुल्हनें 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लाहौर से रवाना हो गई हैं और वाघा अटारी बॉर्डर से भारत की सीमा पर कदम रखते हुए अपनी ससुराल के लिए रवाना होंगी। बताया जा रहा है कि मीडिया और केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी के पैरवी के बाद अब दोनों दुल्हनें भारत आ रही है।

मीडिया जानकारी के मुताबिक, दोनों  पाकिस्तानी दुल्हनें 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लाहौर से रवाना हो गई हैं और वाघा अटारी बॉर्डर से भारत की सीमा पर कदम रखते हुए अपनी ससुराल के लिए रवाना होंगी। बताया जा रहा है कि मीडिया और केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी के पैरवी के बाद अब दोनों दुल्हनें भारत आ रही है।


दोनों देशों के बीच बढ़ी कड़वाहट के चलते इन दो जोड़ों के जीवन में बहुत सारी मुश्किल आई हैं।  शादी रचाकर हमसफर के साथ जिंदगी जीने की कसमें खाई। फेरे लेकर दूल्हे लौट आए, लेकिन दुल्हनों ने एक साल बाद भी ससुराल की चौखट पर कदम नहीं रखा। लंबा इंतजार खत्म होने के बाद पाकिस्तान में अटकी दोनों दुल्हन छगनी बाई और कैलाश बाई अपने पति  महेंद्रसिंह और नेपाल सिंह का दीदार करेंगी।


दोनों देशों के बीच बढ़ी कड़वाहट के चलते इन दो जोड़ों के जीवन में बहुत सारी मुश्किल आई हैं।  शादी रचाकर हमसफर के साथ जिंदगी जीने की कसमें खाई। फेरे लेकर दूल्हे लौट आए, लेकिन दुल्हनों ने एक साल बाद भी ससुराल की चौखट पर कदम नहीं रखा। लंबा इंतजार खत्म होने के बाद पाकिस्तान में अटकी दोनों दुल्हन छगनी बाई और कैलाश बाई अपने पति  महेंद्रसिंह और नेपाल सिंह का दीदार करेंगी।

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