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कोवैक्सीन और कोविशील्ड के क्या हैं साइड इफेक्ट और खासियत, दोनों एक-दूसरे कितने अलग..दूर करें अपना कन्फ्यूजन

First Published May 3, 2021, 1:50 PM IST
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नई दिल्ली। देश में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीनेट करने का महाभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान लोगों को कोवैक्सीन या कोविशील्ड के डोज दिए जा रहे हैं। ये दोनों ही वैक्सीन हाथ की मांसपेशियों में इंजेक्ट किए जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, कोवैक्सीन की दूसरी डोज की जरूरत 4-6 सप्ताह के बाद होती है। जबकि कोविशील्ड की दूसरी डोज 6-8 सप्ताह के बाद दी जानी चाहिए। ऐसे में लोग इसलिए भी कन्फ्यूज हैं कि वे कौन सी वैक्सीन लें। साथ ही वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर लोग भी घबराए हुए हैं। इस स्थिति में हम आपको इन दोनों वैक्सीन के डिजाइन, फायदे और साइड इफेक्ट्स के बारे में बता रहे हैं।

कोवैक्सीन को भारत बायोटक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और और पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर डेवलप किया है। एक्सपर्ट बताते हैं कि व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइज एंथॉनी फाउची ने खुद एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कोवैक्सीन B.1.617 वेरिएंट यानी भारत के डबल म्यूटेंट वेरिएंट को बेअसर करने में कारगर है।

कोवैक्सीन को भारत बायोटक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और और पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर डेवलप किया है। एक्सपर्ट बताते हैं कि व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइज एंथॉनी फाउची ने खुद एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कोवैक्सीन B.1.617 वेरिएंट यानी भारत के डबल म्यूटेंट वेरिएंट को बेअसर करने में कारगर है।

कोविशील्ड चिम्पैंजी एडेनोवायरस वेक्टर पर आधारित वैक्सीन है। इसमें चिम्पैंजी को संक्रमित करने वाले वायरस को आनुवांशिक तौर पर संशोधित किया गया है, ताकि ये इंसानों में ना फैल सके। इस संशोधित वायरस में एक हिस्सा कोरोना वायरस का है, जिसे स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है। ये वैक्सीन शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स बनाती है जो स्पाइक प्रोटीन पर काम करता है। ये वैक्सीन एंटीबॉडी और मेमोरी सेल्स बनाती है जिससे के वायरस को पहचानने में मदद मिलती है।

कोविशील्ड चिम्पैंजी एडेनोवायरस वेक्टर पर आधारित वैक्सीन है। इसमें चिम्पैंजी को संक्रमित करने वाले वायरस को आनुवांशिक तौर पर संशोधित किया गया है, ताकि ये इंसानों में ना फैल सके। इस संशोधित वायरस में एक हिस्सा कोरोना वायरस का है, जिसे स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है। ये वैक्सीन शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स बनाती है जो स्पाइक प्रोटीन पर काम करता है। ये वैक्सीन एंटीबॉडी और मेमोरी सेल्स बनाती है जिससे के वायरस को पहचानने में मदद मिलती है।

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन का प्रभाव काफी अच्छा बताया गया है। ये दोनों ही WHO के स्टैंडर्ड को मैच करती हैं। कोवैक्सीन ने अपना बड़ा ट्रायल इस साल फरवरी के अंत में पूरा किया गया था। क्लीनिकल स्टडीज के मुताबिक, भारत बायोटेक की इस वैक्सीन का एफिकेसी रेट 78 प्रतिशत है। स्टडी के मुताबिक, कोवैक्सीन घातक इंफेक्शन और मृत्यु दर के जोखिम को 100 फीसद तक कम कर सकती है।

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन का प्रभाव काफी अच्छा बताया गया है। ये दोनों ही WHO के स्टैंडर्ड को मैच करती हैं। कोवैक्सीन ने अपना बड़ा ट्रायल इस साल फरवरी के अंत में पूरा किया गया था। क्लीनिकल स्टडीज के मुताबिक, भारत बायोटेक की इस वैक्सीन का एफिकेसी रेट 78 प्रतिशत है। स्टडी के मुताबिक, कोवैक्सीन घातक इंफेक्शन और मृत्यु दर के जोखिम को 100 फीसद तक कम कर सकती है।

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही रिएक्टोजैनिक साइड इफेक्ट के साथ आती हैं। इसमें इंजेक्शन साइट पर दर्द, बुखार, ठंड लगना,कंपकंपी, चक्कर आना मतली, सिर दर्द या पेट दर्ज जैसे साधारण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि कोवैक्सीन में अभी तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखने को मिला है।
 

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही रिएक्टोजैनिक साइड इफेक्ट के साथ आती हैं। इसमें इंजेक्शन साइट पर दर्द, बुखार, ठंड लगना,कंपकंपी, चक्कर आना मतली, सिर दर्द या पेट दर्ज जैसे साधारण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि कोवैक्सीन में अभी तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखने को मिला है।
 

कोवैक्सीन और कोविशील्ड एक दूसरे से एकदम अलग हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोविशील्ड वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी जेनरेट करने का काम करती है। हालांकि इन दोनों ही वैक्सीन की खूबियां इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती हैं। 

(फोटो सोर्स  आजतक)

कोवैक्सीन और कोविशील्ड एक दूसरे से एकदम अलग हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोविशील्ड वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी जेनरेट करने का काम करती है। हालांकि इन दोनों ही वैक्सीन की खूबियां इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती हैं। 

(फोटो सोर्स  आजतक)

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