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चार साल के बेटे ने शहीद पिता को दी मुखाग्नि, पत्नी बोली- पति की शहादत पर है फक्र; बेटे को भी सेना में भेजूंगी

First Published Jun 24, 2020, 11:14 AM IST
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गोरखपुर(Uttar Pradesh). जम्मू कश्मीर के नौशेरा सेक्टर पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग का जवाब देने के दौरान शहीद हुए गोरखा रेजीमेंट के जवान हवलदार दीपक कार्की का मंगलवार की रात राजघाट पर सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। शहीद की अंतिम यात्रा में गोरखपुर जीआरडी के जवानों से लेकर ब्रिगेडियर तक सभी शामिल हुए। सबने उनकी शहादत को सलाम किया। नेपाल के रहने वाले दीपक का शव पहुंचने के पहले ही परिजन गोरखपुर पहुंच गए थे। पूर्व निर्धारित समय शाम सात बजे दीपक कार्की का शव विशेष विमान से गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से शव जैसे ही बाहर निकला परिजन शव को देखते ही बिलख पड़े। 

गोरखपुर जिले के राजघाट के बैकुंठधाम में गोरखा रेजीमेंट के शहीद हवलदार दीपक कार्की के अंतिम संस्कार के समय मौजूद सभी की आंखें नम थीं। सब ने उनके जज्बे को सलाम किया। चार वर्ष के बेटे एंजल कार्की ने जब पिता की चिता को मुखाग्नि दी तब शायद ही कोई ऐसा रहा हो जिसकी आंखें नम न हुईं हो। 
 

गोरखपुर जिले के राजघाट के बैकुंठधाम में गोरखा रेजीमेंट के शहीद हवलदार दीपक कार्की के अंतिम संस्कार के समय मौजूद सभी की आंखें नम थीं। सब ने उनके जज्बे को सलाम किया। चार वर्ष के बेटे एंजल कार्की ने जब पिता की चिता को मुखाग्नि दी तब शायद ही कोई ऐसा रहा हो जिसकी आंखें नम न हुईं हो। 
 

पत्नी प्रतिमा कार्की को शहीद की भाभी ढांढस बंधा रही थीं। प्रतिमा ने कहा, मुझे पति की शहादत पर फक्र है। बेटे को भी सेना में भेजूंगी।
 

पत्नी प्रतिमा कार्की को शहीद की भाभी ढांढस बंधा रही थीं। प्रतिमा ने कहा, मुझे पति की शहादत पर फक्र है। बेटे को भी सेना में भेजूंगी।
 

शहीद दीपक कार्की नेपाल राष्ट्र के भुटवल स्थित सालिकग्राम के रहने वाले थे। उनकी मां का पहले ही देहांत हो चुका था। परिवार में पत्नी प्रतिमा, दो बेटियां कपिला और कुंजला व चार साल का बेटा एंजल है। निधन की खबर परिवार वालों को सोमवार की सुबह हुई। लॉकडाउन की वजह से पार्थिव शरीर नेपाल नहीं ले जाया गया।
 

शहीद दीपक कार्की नेपाल राष्ट्र के भुटवल स्थित सालिकग्राम के रहने वाले थे। उनकी मां का पहले ही देहांत हो चुका था। परिवार में पत्नी प्रतिमा, दो बेटियां कपिला और कुंजला व चार साल का बेटा एंजल है। निधन की खबर परिवार वालों को सोमवार की सुबह हुई। लॉकडाउन की वजह से पार्थिव शरीर नेपाल नहीं ले जाया गया।
 

जैसे ही शहीद दीपक कार्की का पार्थिव शरीर राजघाट परिसर में प्रवेश किया वैसे ही वाद्य यंत्र बजने लगे। जीआरडी के जवान कंधे पर शहीद दीपक का शव लेकर घाट तक पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद परिवारीजनों के साथ ही जीआरडी के अफसर, नगर विधायक, सैनिक कल्याण बोर्ड के अफसर, डीएम, एसएसपी और एडीएम सिटी ने पुष्प अर्पित कर नमन किया।

जैसे ही शहीद दीपक कार्की का पार्थिव शरीर राजघाट परिसर में प्रवेश किया वैसे ही वाद्य यंत्र बजने लगे। जीआरडी के जवान कंधे पर शहीद दीपक का शव लेकर घाट तक पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद परिवारीजनों के साथ ही जीआरडी के अफसर, नगर विधायक, सैनिक कल्याण बोर्ड के अफसर, डीएम, एसएसपी और एडीएम सिटी ने पुष्प अर्पित कर नमन किया।

शहीद दीपक अपने पीछे 14 व 9 साल की बेटी और महज चार साल के बेटे एंजल को छोड़ गए हैं। दोनों बेटियों का रो-रो कर बुरा हाल था। गम के बीच भी 14 साल की बेटी ने कहा कि उसे अपने पिता पर गर्व है।
 

शहीद दीपक अपने पीछे 14 व 9 साल की बेटी और महज चार साल के बेटे एंजल को छोड़ गए हैं। दोनों बेटियों का रो-रो कर बुरा हाल था। गम के बीच भी 14 साल की बेटी ने कहा कि उसे अपने पिता पर गर्व है।
 

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