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यहां खुदाई में मिला 52806.25 टन स्वर्ण अस्यक, जानिए अब इससे कितना सोना बनेगा

First Published Feb 22, 2020, 5:58 PM IST
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सोनभद्र (Uttar Pradesh)। देश के सबसे बड़े सोने की खदान पर हर किसी की नजर है। अब जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने यह दावा किया कि इस सोने की खदान में 52806.25 टन स्वर्ण अस्यक मिलेगा। जानकारों के मुताबिक स्वर्ण अयस्क से सिर्फ 3.03 ग्राम प्रति टन ही सोना निकलेगा। 

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर डॉक्टर जी.एस तिवारी ने बताया कि सोनभद्र की खदान में 3000 टन सोने मिलने की जीएसआई पुष्टि नहीं करता है। एक न्यूज चैनल के मुताबिक जीएसआई के डायरेक्टर के कहा कि सोनभद्र में सिर्फ 52806.25 टन स्वर्ण अस्यक मिला है न कि शुद्ध सोना।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर डॉक्टर जी.एस तिवारी ने बताया कि सोनभद्र की खदान में 3000 टन सोने मिलने की जीएसआई पुष्टि नहीं करता है। एक न्यूज चैनल के मुताबिक जीएसआई के डायरेक्टर के कहा कि सोनभद्र में सिर्फ 52806.25 टन स्वर्ण अस्यक मिला है न कि शुद्ध सोना।

सोनभद्र में मिले स्वर्ण अयस्क से सिर्फ 3.03 ग्राम प्रति टन ही सोना निकलेगा, जिसके तहत सोनभद्र की खदान से सिर्फ 160 किलो सोना ही निकलेगा। जीएसआई के डायरेक्टर डॉ जी.एस तिवारी ने कहा है कि सोनभद्र में सोने की तलाश के लिए जीएसआई का सर्वे अभी जारी है। इसलिए सोनभद्र की पहाड़ियों में और अधिक सोने की संभावनाओ से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सोनभद्र में मिले स्वर्ण अयस्क से सिर्फ 3.03 ग्राम प्रति टन ही सोना निकलेगा, जिसके तहत सोनभद्र की खदान से सिर्फ 160 किलो सोना ही निकलेगा। जीएसआई के डायरेक्टर डॉ जी.एस तिवारी ने कहा है कि सोनभद्र में सोने की तलाश के लिए जीएसआई का सर्वे अभी जारी है। इसलिए सोनभद्र की पहाड़ियों में और अधिक सोने की संभावनाओ से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जीएसआई के डायरेक्टर ने कहा कि लगातार सोने की तलाश के लिए सोनभद्र की पहाड़ियों की सर्वे कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल जो स्वर्ण अयस्क मिला है, उससे सिर्फ करीब 160 किलो ही सोना निकलेगा। हालांकि और अधिक सोने की संभावनाओ से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जीएसआई के डायरेक्टर ने कहा कि लगातार सोने की तलाश के लिए सोनभद्र की पहाड़ियों की सर्वे कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल जो स्वर्ण अयस्क मिला है, उससे सिर्फ करीब 160 किलो ही सोना निकलेगा। हालांकि और अधिक सोने की संभावनाओ से इनकार नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि इस खदान के ब्लॉक में 90 टन एंडालुसाइट, 9 टन पोटाश, 18.87 टन लौह अयस्क और करीब 10 लाख सिलेमिनाइट के भंडार की भी खोज की गई है। अब केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग, दिल्ली की टीम ने हेलीकॉप्टर से एरो मैग्नेटिक सिस्टम के जरिए कुदरी के अलावा सोनभद्र जिले से सटे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जंगलों और पहाड़ों में यूरेनियम की खोज कर रही है।

बता दें कि इस खदान के ब्लॉक में 90 टन एंडालुसाइट, 9 टन पोटाश, 18.87 टन लौह अयस्क और करीब 10 लाख सिलेमिनाइट के भंडार की भी खोज की गई है। अब केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग, दिल्ली की टीम ने हेलीकॉप्टर से एरो मैग्नेटिक सिस्टम के जरिए कुदरी के अलावा सोनभद्र जिले से सटे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जंगलों और पहाड़ों में यूरेनियम की खोज कर रही है।

कुदरी पहाड़ी क्षेत्र में करीब 100 टन यूरेनियम मिलने की उम्मीद है। वहीं, बीएचयू के भूवैज्ञानिक डॉ. वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि एक किलो यूरेनियम से 24 मेगावॉट तक बिजली पैदा की जा सकती है।

कुदरी पहाड़ी क्षेत्र में करीब 100 टन यूरेनियम मिलने की उम्मीद है। वहीं, बीएचयू के भूवैज्ञानिक डॉ. वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि एक किलो यूरेनियम से 24 मेगावॉट तक बिजली पैदा की जा सकती है।

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