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महिला दिवस पर कोर्ट ने 11 साल की बच्ची को दिया इंसाफ, दरिंदें को मौत की सजा, पढ़िए पूरा मामला
जौनपुर (Uttar Pradesh) । महिला दिवस अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम रवि यादव ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 11 साल की बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी को मौत की सजा दी है। सरकारी वकील राजेश उपाध्याय के मुताबिक न्यायाधीश ने इसे विरलतम श्रेणी के अपराध की संज्ञा दी है। साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा कि दुष्कर्मी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मौत न हो जाए। यह पूरा मामला मड़ियाहूं थाना क्षेत्र के एक गांव का है।

सरकारी वकील राजेश के अनुसार चंदौली निवासी बाल गोविंद उर्फ गोविंदा अपनी ससुराल में रहता था। वो 6 अगस्त 2020 को पड़ोस में रहने वाली दो बहनों को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था।
टॉफी दिलाने के बाद छोटी बहन को उसने वापस भेज दिया। जबकि 11 साल की बड़ी बहन को खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद उसकी हत्या कर दी फिर उसके शव को खेत में ही छिपा दिया था।
किशोरी घर नहीं पहुंची तो उसके परिवार वालों ने खोजबीन शुरू किए। लेकिन, उसका कुछ पता नहीं चला। 8 अगस्त को बालिका का शव खेत से बरामद हुआ। इस प्रकरण में पिता ने आरोपी पर केस दर्ज कराया था।
पुलिस ने जांच के बाद दरिंदे बाल गोविंद को चंदौली से गिरफ्तार किया था। विशेष लोक अभियोजक राजेश उपाध्याय और शासकीय अधिवक्ता वीरेंद्र मौर्य ने 11 गवाहों का बयान दर्ज कराया।
विशेष लोक अभियोजक राजेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट ने छह मार्च को आरोपी बाल गोविंद को दोषी करार दिया था। सोमवार को कोर्ट खुलने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम रवि यादव ने दोषी गोविंदा को मृत्यु दंड और 10000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
फोटो-बादल चक्रवर्ती
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