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कभी कानपुर वाले विकास दुबे का बेहद खास था 'कलुआ', गैंगस्टर के एनकाउंटर के बाद आवारा हुई जिंदगी
कानपुर(Uttar Pradesh). बीती 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास दुबे का जुर्म का साम्राज्य पुलिस लगभग ढहा चुकी है। डर और दहशत के इस साम्राज्य को बनाने वाला विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है। यही नहीं उसकी गैंग में उसके कई ख़ास साथी या तो पुलिस एनकाउंटर में मार दिए गए या फिर सलाखों के पीछे पहुंच गये। लेकिन इन सब के बीच आज भी कोई है जो गैंगस्टर विकास दुबे के लौटने का इन्तजार कर रहा है। ये कोई और नहीं बल्कि विकास दुबे का पालतू कुत्ता 'कलुआ' है।

ग्रामीणों की मानें तो कलुआ विकास दुबे की उसी कोठी में पला बढ़ा जिसे अब पुलिस ने जमींदोज कर दिया है। खंडहरों के बीच पड़ी एक चारपाई पर कलुआ बैठ कर पूरी रात अपने मालिक का इन्तजार करता है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर विकास दुबे का मकान ढहाने के साथ ही उसका घर भी उजड़ गया। हालांकि वह अब भी उस कोठी से अलग नहीं हो सका है। वह मलबे में और उसके बाहर पड़ी खाट पर बैठकर ढहाई गई कोठी को देखता रहता है।
ग्रामीण बताते हैं कि कलुआ इतना समझदार है कि जब गांव में पुलिस टीम या अधिकारी जांच करने पहुंचते हैं तो वह गांव में निकल जाता है और जब अधिकारी और टीमें निकल जाती हैं तो वह वापस कोठी के मलबे में पहुंच जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक वह रात में मलबे में ही रहता है।
ग्रामीणों के मुताबिक कलुआ को विकास ने काफी लाड से पाला था, वह इसी कोठी में बड़ा हुआ, कलुआ हमेशा गैंगस्टर विकास दुबे के आसपास ही रहता था। जब भी विकास दुबे बिकरू गांव आता कलुआ हमेशा विकास के साथ ही रहता था।
अब विकास दुबे का घर पुलिस ढहा चुकी है, वहां एक पुरानी चारपाई, कबाड़ में बदल चुकी गाड़ियां और घर के मलबे के अलावा कुछ भी नहीं है। बताते हैं को रात होते ही कलुआ सीधे अपने घर पहुंचता है और चारपाई पर अपनी जगह ले लेता है।
वह लगातार रास्ते की ओर देखता रहता था मानों उसे अभी भी इन्तजार है कि एक दिन उसका मालिक घर जरूर आएगा। फिलहाल अभी कलुआ की जिन्दगी गांव के लोगों द्वारा दिए जा रहे भोजन पर आश्रित है।
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