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प्रियंका गांधी ने लगाई संगम में डुबकी,हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की बारिश,बेटी ने भी किया गंगा स्नान

First Published Feb 11, 2021, 11:49 AM IST
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प्रयागराज (Uttar Pradesh) ।  पिछले दो दिन से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं। गुरुवार दोपहर उन्होंने मौनी अमावस्या के मौके पर गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। उनके साथ बेटी मिराया ने भी डुबकी लगाई। बता दें कि इससे पहले उन्होंने अरैल घाट का दौरा किया था। फिर यहां से वह मंदिर में पूजा अर्चना के बाद वह द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात करने पहुंची हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अरैल घाट पर स्नान की। इसके बाद उन्होंने पूजा पाठ भी किया।
 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अरैल घाट पर स्नान की। इसके बाद उन्होंने पूजा पाठ भी किया।
 

प्रियंका गांधी ने नाव विहार भी किया। इसके पहले भीड़ में से सीमा सिंह निवासी नैनी ने जब आवाज दी तो प्रियंका सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए उसके पास पहुंच गईं और बातचीत करते हुए उसे अपने साथ अपनी गाड़ी तक ले आईं। यह लड़की बीटीसी कर रही है।

प्रियंका गांधी ने नाव विहार भी किया। इसके पहले भीड़ में से सीमा सिंह निवासी नैनी ने जब आवाज दी तो प्रियंका सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए उसके पास पहुंच गईं और बातचीत करते हुए उसे अपने साथ अपनी गाड़ी तक ले आईं। यह लड़की बीटीसी कर रही है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आनंद भवन पहुंची। जहां संगम विसर्जन से पूर्व रखी गई पंडित जवाहरलाल नेहरू की अस्थियों के स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आनंद भवन पहुंची। जहां संगम विसर्जन से पूर्व रखी गई पंडित जवाहरलाल नेहरू की अस्थियों के स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
 

प्रियंका गांधी आनंद भवन स्थित अनाथालय में गई। जहां अनाथ बच्चों के साथ समझ गुजारी। इस दौरान फोटो भी खींचवाई। 


 

प्रियंका गांधी आनंद भवन स्थित अनाथालय में गई। जहां अनाथ बच्चों के साथ समझ गुजारी। इस दौरान फोटो भी खींचवाई। 


 

खुद को हिंदुत्व से जोड़ रही प्रियंका
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद को हिंदुत्व से जोड़ने का प्रियंका गांधी पूरा प्रयास कर रही हैं। एक दिन पहले किसान पंचायत में हिस्सा लेने के लिए देहरादून के एयरपोर्ट से बाहर निकलीं तो हाथ में रुद्राक्ष की माला लिए नजर आईं थी।

खुद को हिंदुत्व से जोड़ रही प्रियंका
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद को हिंदुत्व से जोड़ने का प्रियंका गांधी पूरा प्रयास कर रही हैं। एक दिन पहले किसान पंचायत में हिस्सा लेने के लिए देहरादून के एयरपोर्ट से बाहर निकलीं तो हाथ में रुद्राक्ष की माला लिए नजर आईं थी।

प्रयागराज की सियासत को देंगी नया संकेत
संगम में डुबकी लगाने के बाद प्रियंका तीन किलोमीटर पैदल चलेंगी। वह त्रिवेणी मार्ग से द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिविर पहुंचेंगी। यहां कुछ देर शंकराचार्य से बात करेंगी। फिर वापस अरैल पहुंचेंगी। इसके बाद काफिले के साथ आनंद भवन पहुंचेंगी। आनंद भवन में विश्राम के बाद प्रियंका वापस दिल्ली के लिए निकलेंगी। साथ वह प्रयागराज की सियासत को नया संकेत भी दे जाएंगी। 

प्रयागराज की सियासत को देंगी नया संकेत
संगम में डुबकी लगाने के बाद प्रियंका तीन किलोमीटर पैदल चलेंगी। वह त्रिवेणी मार्ग से द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिविर पहुंचेंगी। यहां कुछ देर शंकराचार्य से बात करेंगी। फिर वापस अरैल पहुंचेंगी। इसके बाद काफिले के साथ आनंद भवन पहुंचेंगी। आनंद भवन में विश्राम के बाद प्रियंका वापस दिल्ली के लिए निकलेंगी। साथ वह प्रयागराज की सियासत को नया संकेत भी दे जाएंगी। 

हिंदू-मुस्लिम को साध लेकर चलने का दी हैं संदेश
बताते चले कि प्रियंका गांधी एक दिन पहले सहारनपुर में शाकुंभरी देवी और खानकाह रायपुर जाने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जानकार मान रहे हैं कि प्रियंका ने हिंदू और मुस्लिम दोनों को साधने की कोशिश कर रही हैं। बताते चले कि श्री शाकुंभरी देवी पश्चिम यूपी का विख्यात सिद्धपीठ है, वहीं खानकाह रायेपुर भी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। जंग-ए-आजादी में खानकाह की अहम भूमिका रही है, यहीं से तहरीक-ए-रेशमी रुमाल चली थी।
 

हिंदू-मुस्लिम को साध लेकर चलने का दी हैं संदेश
बताते चले कि प्रियंका गांधी एक दिन पहले सहारनपुर में शाकुंभरी देवी और खानकाह रायपुर जाने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जानकार मान रहे हैं कि प्रियंका ने हिंदू और मुस्लिम दोनों को साधने की कोशिश कर रही हैं। बताते चले कि श्री शाकुंभरी देवी पश्चिम यूपी का विख्यात सिद्धपीठ है, वहीं खानकाह रायेपुर भी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। जंग-ए-आजादी में खानकाह की अहम भूमिका रही है, यहीं से तहरीक-ए-रेशमी रुमाल चली थी।
 

किसान पंचायत के माध्यम से कर रही ये कोशिश
किसान पंचायत की शुरुआत भी उन्होंने माता शाकंभरी से किया। उन्होंने मंच से मां शाकंभरी कथा भी सुनाई थीं। इसके पीछे उनकी मंशा हिंदू और मुस्लिमों को किसान आंदोलन में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ जोड़ने की रही।

किसान पंचायत के माध्यम से कर रही ये कोशिश
किसान पंचायत की शुरुआत भी उन्होंने माता शाकंभरी से किया। उन्होंने मंच से मां शाकंभरी कथा भी सुनाई थीं। इसके पीछे उनकी मंशा हिंदू और मुस्लिमों को किसान आंदोलन में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ जोड़ने की रही।

इसलिए पश्चिम से की शुरूआत
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन के समानांतर यूपी में प्रियंका वाड्रा भी चार पंचायतों को संबोधित कर गांव-किसानों के बीच पार्टी की जमीन तैयार करने का प्रयास करेंगी। किसान पश्चिम यूपी की सियासत की दशा और दिशा तय करते हैं, जिसे कांग्रेस बाखूबी तरीके से समझ गई है उसे अब कैश कराने की जुगत में है। 2009 के चुनाव में कांग्रेस को पश्चिम यूपी में अच्छी खासी सीटें मिली थीं, जिसे अब वो दोबारा से हासिल करना चाहती है।

इसलिए पश्चिम से की शुरूआत
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन के समानांतर यूपी में प्रियंका वाड्रा भी चार पंचायतों को संबोधित कर गांव-किसानों के बीच पार्टी की जमीन तैयार करने का प्रयास करेंगी। किसान पश्चिम यूपी की सियासत की दशा और दिशा तय करते हैं, जिसे कांग्रेस बाखूबी तरीके से समझ गई है उसे अब कैश कराने की जुगत में है। 2009 के चुनाव में कांग्रेस को पश्चिम यूपी में अच्छी खासी सीटें मिली थीं, जिसे अब वो दोबारा से हासिल करना चाहती है।

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