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इस खदान में है 3000 टन सोना, पास में है दुनिया के सबसे जहरीले सांपों का बसेरा

First Published Feb 22, 2020, 2:01 PM IST
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सोनभद्र (Uttar Pradesh) । सोनभद्र में मिले सोने की खदान के पास दुनिया के सबसे जहरीले सांपों का बसेरा है। पहाड़ियों में विश्व के सबसे जहरीले सांपों की प्रजातियों में से तीन प्रजाति रसेल वाइपर, कोबरा व करैत का डेरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार सोनभद्र के सोन पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाने वाली सांप की तीनों प्रजातियां इतने जहरीले हैं कि किसी को काट ले तो उसे बचाना संभव नहीं है। बता दें कि यहां 3000 टन सोना मिला मिला है, जिसकी कीमत तकरीबन 12 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है। वहीं डीएफओ वाइल्ड लाइफ संजीव कुमार ने बताया कि जब वन विभाग से अनापत्ति लेने की प्रक्रिया होगी, उस दौरान हम जांच के बाद बता पाएंगे की इन इलाकों में कितने जहरीले सांपों का डेरा है। 

विश्व के सबसे जहरीले सांपों में जाने, जाने वाले रसेल वाइपर की प्रजाति सोनभद्र में ही पाई जाती है। पिछले दिनों सोनभद्र के पकरी गांव में हवाई पट्टी पर रसेल वाइपर को देखा गया था। रसेल वाइपर जिले के बभनी म्योरपुर व राबर्ट्सगंज में देखा गया है। इसके अलावा दक्षिणांचल में भी यह नजर आया था। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विश्व के सबसे जहरीले सांपों में जाने, जाने वाले रसेल वाइपर की प्रजाति सोनभद्र में ही पाई जाती है। पिछले दिनों सोनभद्र के पकरी गांव में हवाई पट्टी पर रसेल वाइपर को देखा गया था। रसेल वाइपर जिले के बभनी म्योरपुर व राबर्ट्सगंज में देखा गया है। इसके अलावा दक्षिणांचल में भी यह नजर आया था। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सांपों पर अध्ययन कर चुके डॉक्टर अरविंद मिश्रा ने बताया कि रसेल वाइपर विश्व के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसका जहर हीमोटॉक्सिन होता है, जो खून को जमा देता है। काटने के दौरान यदि यह अपना पूरा जहर शरीर में डाल देता है तो मनुष्य की घंटे भर से भी कम समय में मौत हो सकती है। यही नहीं यदि जहर कम जाता है तो काटे स्थान पर घाव हो जाता है, जो खतरनाक साबित होता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सांपों पर अध्ययन कर चुके डॉक्टर अरविंद मिश्रा ने बताया कि रसेल वाइपर विश्व के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसका जहर हीमोटॉक्सिन होता है, जो खून को जमा देता है। काटने के दौरान यदि यह अपना पूरा जहर शरीर में डाल देता है तो मनुष्य की घंटे भर से भी कम समय में मौत हो सकती है। यही नहीं यदि जहर कम जाता है तो काटे स्थान पर घाव हो जाता है, जो खतरनाक साबित होता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोबरा और करैत के जहर न्यूरोटॉक्सिन होते हैं, स्नायु तंत्र को शून्य कर देते हैं और मनुष्य की मौत हो जाती है। कोबरा के काटे स्थान पर सूजन हो जाती है और करैत का दंश देखने से पता नहीं चलता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोबरा और करैत के जहर न्यूरोटॉक्सिन होते हैं, स्नायु तंत्र को शून्य कर देते हैं और मनुष्य की मौत हो जाती है। कोबरा के काटे स्थान पर सूजन हो जाती है और करैत का दंश देखने से पता नहीं चलता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विश्व के सबसे जहरीले सांपों की कई प्रजातियां आस्ट्रेलिया के जंगलों में भी पाई जाती हैं। वन्य जीव प्रतिपालक संजीव कुमार के मुताबिक दुर्लभ प्राजति के सांपों के अस्तित्व को देखते हुए आस्टे्रलियां में भी कोयले की खदान खनन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। माना गया कि यदि खनन पर रोक नहीं लगाई तो यहां मौजूद दुर्लभ प्रजति के सापों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विश्व के सबसे जहरीले सांपों की कई प्रजातियां आस्ट्रेलिया के जंगलों में भी पाई जाती हैं। वन्य जीव प्रतिपालक संजीव कुमार के मुताबिक दुर्लभ प्राजति के सांपों के अस्तित्व को देखते हुए आस्टे्रलियां में भी कोयले की खदान खनन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। माना गया कि यदि खनन पर रोक नहीं लगाई तो यहां मौजूद दुर्लभ प्रजति के सापों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सोनभद्र के चोपन ब्लाक के सोन पहाड़ी में सोने के भंडार मिलने के बाद इसकी जियो टैगिंग कराकर ई टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की तैयारी है। ऐसे में विश्व के सबसे जहरीले सांपों की प्रजातियों के बसेरे पर संकट मंडराना तय है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सोनभद्र के चोपन ब्लाक के सोन पहाड़ी में सोने के भंडार मिलने के बाद इसकी जियो टैगिंग कराकर ई टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की तैयारी है। ऐसे में विश्व के सबसे जहरीले सांपों की प्रजातियों के बसेरे पर संकट मंडराना तय है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बता दें कि सोने का भंडार पता चलने के बाद सरकार ने इन खदानों को लीज पर देने की प्रक्रिया में तेजी ला दी है। इनके खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया से पूर्व जिओ टैगिंग की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में जीएसआई खदान के इलाके का हवाई सर्वेक्षण करा रही है। इसके लिए दो हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

बता दें कि सोने का भंडार पता चलने के बाद सरकार ने इन खदानों को लीज पर देने की प्रक्रिया में तेजी ला दी है। इनके खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया से पूर्व जिओ टैगिंग की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में जीएसआई खदान के इलाके का हवाई सर्वेक्षण करा रही है। इसके लिए दो हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

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