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दावाः चीन के लैब से ही फैला कोरोना, वहीं काम करने वाला वर्कर बना था पहला मरीज, 2018 से ही चल रही थी साजिश
कोरोना वायरस के कहर से पूरी दुनिया तबाह है। इस वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 20 लाख 83 हजार से ज्यादा हो चुकी है, वहीं अब तक इससे कुल एक लाख 34 हजार 616 लोग मौत के शिकार हो चुके हैं। अमेरिका में कोरोना से अब तक कुल 28 हजार 529 लोगों की मौत हुई है। इसी बीच, अमेरिका ने चीन पर वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में इस वायरस को विकसित करने और दुनिया भर में फैलाने का आरोप लगया है। वुहान में दो बड़े लैब हैं। दूसरे लैब का नाम वुहान सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चीन ने इन्हीं लैब में कोरना वायरस को विकसित किया, ताकि अमेरिका को बता सके कि उसके वैज्ञानिक अमेरिकी वैज्ञानिकों से कहीं बहुत ज्यादा आगे हैं। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पॉम्पियो ने कहा है कि चीन को इस मुद्दे पर सच्चाई को सामने रखना होगा। वहीं प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बुधवार को कहा कि अमेरिका इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी लैब में चमगादड़ों पर जो एक्सपेरिमेंट किया जा रहा था, उस दौरान कोरोना वायरस किसी दुर्घटनावश लोगों में फैला या इसे जानबूझ कर फैलाया गया।यह भी कहा जा रहा है कि इन लैब में काम करने वाले स्टाफ को ही सबसे पहले कोरोना का संक्रमण हुआ और उसके बाद यह दूसरे लोगों में फैला। अमेरिका का कहना है कि कोरोना वायरस के फैलते ही चीन ने इसका ठीकरा वुहान के वेट मार्केट पर फोड़ा, जहां वाइल्ड एनिमल्स के मीट का व्यापार होता है और उन्हें जिंदा भी बेचा जाता है। पोम्पियो का कहना है कि वुहान का वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट इस मार्केट से कुछ ही मील की दूरी पर है। वहीं, उनका यह भी कहना है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने भी चीन के इस दावे का समर्थन किया है कि यह वायरस वुहान के वेट मार्केट से ही फैला है। अमेरिका का मानना है कि भले कोरोना बायोलॉजिकल वेपन न हो, लेकिन इसे चीन ने लैब में डेवलप किया है। इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अभी यही कहानी सामने आ रही है। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें।
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यही है वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी। यह चीन के सबसे बड़े रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में एक है। कहा जा रहा है कि इसी इंस्टीट्यूट में कोरोना वायरस को बनाया गया।
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वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में साइंटिस्ट्स एक्सपेरिमेंट मे लगे हैं। यहां काम करने वालों को बेहद कड़ी सुरक्षा में रहना होता है।
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काफी ताकतवर माइक्रोस्कोप से कोरोना वायरस को देखा जा सकता है। यह कुछ इस तरह का दिखता है। अमेरिका को यह संदेह है कि इसे चीन ने किसी खास मकसद से बनाया है।
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वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में लैब में एक्सपेरिमेंट में लगी एक साइंटिस्ट। ये वैज्ञानिक कई तरह के सुरक्षा उपकरणों से लैस रहते हैं।
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अमेरिका का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोरोना के खतरे के बारे में दुनिया के दूसरे देशों को देर से जानकारी दी।
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अमेरिका की आर्मी के ज्वाइंट चीफ चेयरमैन जनरल मार्क मिले वर्जीनिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए। उनके साथ डिफेंस सेक्रेटरी मार्क एस्पर दिख रहे हैं। इनका मानना है कि चीन ने कोरोना के बारे में सच्चाई दुनिया से छिपाई है।
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वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में एक्पेरिमेंट का काम कर रहे दो साइंटिस्ट। कहा जा रहा है कि इन वैज्ञानिकों ने ही कोरोना वायरस को लैब में बनाया।
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वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में एक्सपेरिमेंट में लगा एक साइंटिस्ट। इन लोगों को काफी सावधानी के साथ काम करना पड़ता है और पूरी सेक्रेसी मेंटेन करनी होती है।
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वुहान के इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में काम कर रही दो महिला वैज्ञानिक। इन्हें अपनी सुरक्षा के लिए कई तरह के उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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लैब में हर काम बहुत ही गोपनीय तरीके से किया जाता है। वहां से किसी जानकारी का बाहर निकल पाना आसान नहीं।
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वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी चीन के सबसे बड़े संस्थानों में से एक है। इसे बनाने में 15 साल का समय लगा और अरबों रुपए खर्च किए गए।
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