कलियुग में आधे किलो काजू से भी महंगी बिक रही है 'बेकार' राख, इसलिए Online खरीद रहे हैं लोग
हटके डेस्क: एक समय था जब लोग बर्तन धोने के लिए मिट्टी और राख का इस्तेमाल करते थे। उस समय बर्तन धोने के लिए साबुन का प्रयोग नहीं होता था। आज के समय में मार्केट में डिशवाश के नाम पर कई तरह के बार और लिक्विड्स मौजूद हैं। ये सभी बर्तनों की चिकनाई हटाकर उसे साफ़ करने का दावा करते हैं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि पुराना समय फिर से लौटकर आ रहा है। तभी तो एक बार फिर मार्केट में बर्तन धोने के लिए राख मिलने लगी है। अन्तर बस इतना है कि अब इसे आकर्षक तरीके से पैक कर बेचा जा रहा है। कलियुग की है माया...

कुछ सालों पहले तक लोगों के घरों में बर्तन धोने के लिए चारकोल यानी राख का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन इसके बाद आधुनिकता के नाम पर मार्केट में कई तरह के डिश बार उतार दिए गए।
लोगों के घर से राख का नामो-निशान खत्म हो गया। हालांकि, आज भी पिछड़े इलाकों में बर्तन की धुलाई राख से की जाती है। ये राख लकड़ी या कोयले के जलने के बाद बचे ऐशेस होते हैं।
शहरों में डिश वाश के नाम पर कई साबुन उतार दिए गए। अब तो लिक्विड वाश भी मौजूद हैं। इनसे बर्तन साफ़ किये जाते हैं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि पुराना समय फिर से लौट कर आ रहा है।
ऑनलाइन राख बिक रहा है वो भी काफी महंगे दाम पर। जी हां, ऐसे कई ऑनलाइन पोर्टल्स हैं, जिसपर राख बेचे जा रहे हैं। वो भी आकर्षक तरीके से पैक कर। इन्हें नाम भी काफी आकर्षक दिया गया है।
अमेज़ॉन पर राख के डिब्बे को डिश वाशिंग वुड ऐश के नाम से बेचा जा रहा है। नाम और पैकिंग चकाचक कर इसकी कीमत रखी गई है 650 रूपये।
ऑनलाइन अगर आप काजू का दाम सर्च करें तो आधे किलो का दाम 400 से 500 के बीच आपको मिल जाएगा। लेकिन मार्केटिंग के एक्सपर्ट्स ने अब राख को ही काजू से महंगा बना दिया है।
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