Asianet News Hindi

देश के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया की तस्वीरें, कोरोना के कारण अब नहीं आता कोई ग्राहक, सेक्स वर्कर ने बताया हाल

First Published Apr 24, 2020, 4:59 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

हटके डेस्क: चीन के वायरस ने दुनिया को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पूरी दुनिया इस वायरस की चपेट में आ गई है। इस वायरस का कोई इलाज नहीं मिला है, इस कारण इससे बचाव का एक ही तरीका है लॉकडाउन। भारत को भी 24 मार्च से लॉकडाउन किया गया है। आज इसके पुरे एक महीने हो गए। इन दिनों में गरीब तबके के लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। आज हम आपको भारत के  सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में गिने जाने वाले कमाठीपुरा की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं। इस रेड लाइट एरिया में रहने वाली सेक्स वर्कर्स के सामने अब खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं। देखिए लॉकडाउन में कैसा है इसका हाल... 

मुंबई के कामाथीपुरा इलाके में सेक्स वर्कर्स को लॉकडाउन के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

मुंबई के कामाथीपुरा इलाके में सेक्स वर्कर्स को लॉकडाउन के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

दक्षिण मुंबई में कमाठीपुरा देश के सबसे बड़े रेड-लाइट क्षेत्रों में से एक है। COVID-19 के कारण हुए लॉकडाउन के बाद अब यहाँ कोई ग्राहक नहीं आता। ये वर्कर्स सेविंग भी नहीं कर पाती। ऐसे में अब उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है।  

दक्षिण मुंबई में कमाठीपुरा देश के सबसे बड़े रेड-लाइट क्षेत्रों में से एक है। COVID-19 के कारण हुए लॉकडाउन के बाद अब यहाँ कोई ग्राहक नहीं आता। ये वर्कर्स सेविंग भी नहीं कर पाती। ऐसे में अब उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है।  

कमाठीपुरा की सेक्स वर्कर्स को  कोरोना  के खतरे के बारे में बताया गया। साथ ही इससे बचाव का तरीका भी। अब यहां कोई कस्टमर नहीं आता। 

कमाठीपुरा की सेक्स वर्कर्स को  कोरोना  के खतरे के बारे में बताया गया। साथ ही इससे बचाव का तरीका भी। अब यहां कोई कस्टमर नहीं आता। 

सेक्स वर्कर्स के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। कुछ एनजीओ कभी-कभी राशन बांटते हैं। उसी से इनके घरों का चूल्हा जल रहा है।  

सेक्स वर्कर्स के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। कुछ एनजीओ कभी-कभी राशन बांटते हैं। उसी से इनके घरों का चूल्हा जल रहा है।  

कमाठीपुरा मुंबई के दो पॉश एरिया के बीच पड़ता है। मालाबार हिल, कोलाबा, वर्ली और मझगांव के ठीक बीच में ये बसा है। अभी तक इस एरिया का डेवलपमेंट नहीं हुआ है। 

कमाठीपुरा मुंबई के दो पॉश एरिया के बीच पड़ता है। मालाबार हिल, कोलाबा, वर्ली और मझगांव के ठीक बीच में ये बसा है। अभी तक इस एरिया का डेवलपमेंट नहीं हुआ है। 

ये एरिया 14 गलियों में बांटा गया है। सेक्स वर्कर्स के धर्म के हिसाब से गलियां बांटी गई है। यहां भारत के कई राज्यों के अलावा बांग्लादेश और नेपाल से भी लड़कियां आकर रहती हैं। 

ये एरिया 14 गलियों में बांटा गया है। सेक्स वर्कर्स के धर्म के हिसाब से गलियां बांटी गई है। यहां भारत के कई राज्यों के अलावा बांग्लादेश और नेपाल से भी लड़कियां आकर रहती हैं। 

पहले इस एरिया को लाल बाजार कहते थे। लेकिन फिर तेलंगाना के मजदूर वर्क कमाठिस के कारण इसका नाम बदल गया। इस एरिया का इतिहास काफी पुराना है। यहां काफी समय से तवायफों का नाच भी करवाया जाता है। 

पहले इस एरिया को लाल बाजार कहते थे। लेकिन फिर तेलंगाना के मजदूर वर्क कमाठिस के कारण इसका नाम बदल गया। इस एरिया का इतिहास काफी पुराना है। यहां काफी समय से तवायफों का नाच भी करवाया जाता है। 

ये इलाका बॉम्बे ,म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के अंदर में आता है। अगर यहां इस वायरस का संक्रमण  फैला, तो तंग गलियों में तबाही आ जाएगी। 

ये इलाका बॉम्बे ,म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के अंदर में आता है। अगर यहां इस वायरस का संक्रमण  फैला, तो तंग गलियों में तबाही आ जाएगी। 

लेकिन फिलहाल तो यहां रहने वाली महिलाएं  कोरोना के कारण भूखे मरने को मजबूर हैं। 

लेकिन फिलहाल तो यहां रहने वाली महिलाएं  कोरोना के कारण भूखे मरने को मजबूर हैं। 

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios