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100 साल पहले इस 1 गलती से फैला था 'कोरोना', गई थी 10 करोड़ लोगों की जान, कई देशों में गिरी थी सरकार
हटके डेस्क: आज दुनिया में कोरोना ने कोहराम मचाया हुआ है। इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस वायरस ने अभी तक करीब 42 लाख 55 हजार से अधिक लोगों को संक्रमित कर दिया है। वहीं मरने वालों का आंकड़ा 2 लाख 87 हजार पार कर चुका है। हाल ही में इस वायरस की शुरुआत को लेकर खुलासा हुआ कि चीन में कोरोना सितंबर से शुरू हुआ था। साथ ही चमगादड़ और सांप जैसे जानवरों का मांस खाने से ये वायरस इंसानों में आया। जबसे कोरोना दुनिया में फैला तब से ही आज से करीब 102 साल पहले दुनिया में फैले स्पेनिश फ्लू की भी चर्चा शुरू हो गई। ये फ्लू बिलकुल कोरोना जैसा ही था। इसमें भी लोगों को मास्क पहनना था। साथ ही इसने भी महामारी का रूप ले लिया था, जिसमें करीब 10 करोड़ लोगों की जान गई थी। इस बार कोरोना फ़ैलाने का आरोप चीन पर लगा है, जिसने अपने देश में चमगादड़ के मांस से कोरोना फैलाया। उसके बाद फ्लाइट्स बंद नहीं की और इसे पूरी दुनिया में फैलाया। साथ ही अमेरिका में ट्रंप को कोरोना फैलाने का जिम्मेदार बताया जा रहा है। साथ ही यूएस बैंक ने स्पेनिश फ्लू के हवाले से कहा कि उस समय इस महामारी के बाद सत्ता पलट गई थी। लोगों ने तानाशाह हिटलर का साथ दिया क्यूंकि उसने इस कठिन वक्त पर लोगों का साथ दिया था। न्यूयॉर्क के फ़ेडरल रिज़र्व बैंक का दावा है कि आज से सौ साल पहले स्पेनिश फ्लू ने नाजी पार्टी को मजबूती से दुनिया में इस्टेब्लिश किया था। इस बार कोरोना के बाद कई देशों में भी सत्ता पलट सकती है।

100 साल पहले जब स्पेनिश फ्लू फैला था, उस समय लॉकडाउन के बारे में किसी ने नहीं सोचा। इस कारण ये वायरस तेजी से पूरी दुनिया में फैला। कई देशों की सरकार ने अपने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया। तब नाजी पार्टी ने सबकी मदद की। इस कारण फ्लू खत्म होने के बाद लोगों ने हिटलर का साथ दिया।
स्पेनिश फ्लू ने रिकॉर्ड मामलों में करीब 5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। लेकिन लोगों का कहना है कि कई ऐसे केसेस थे जो रजिस्टर नहीं हुए थे। इस कारण मौत का आंकड़ा 10 करोड़ तक होने की संभावना थी।
स्पेनिश फ्लू की कोई दवा या इंजेक्शन नहीं बन पाई। समय के साथ जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी, ये वायरस अपने आप खत्म हो गया। हाल ही में सोशल मीडिया पर स्पेनिश फ्लू की कलर तस्वीरें सामने आई। इसमें इस फ्लू की भयावहता साफ़ देखी जा सकती है। बता दें कि स्पेनिश फ्लू H1N1 इन्फ्लुएंजा A वायरस से हुआ था।
स्पेनिश फ्लू के दौरान दुनिया के लगभग हर अस्पताल भर गए थे। यही स्थिति आज कोरोना के कारण हो गई है। कई देशों ने खासकर कोरोना के लिए नए अस्पताल बनाए।
स्पेनिश फ्लू के दौरान पुलिस वाले भी सबसे ज्यादा इस वायरस के चपेट में आए थे।
ऑफिस में काम करने वाले लोग भी कुछ इस तरह दिखाई देते थे। चेहरे पर मास्क लगाना अनिवार्य था। ताकि इस वायरस से जान बचाई जा सके।
स्पेनिश फ्लू के दौरान हवा को जहरीला और जानलेवा घोषित कर दिया गया था। रईस लोग कुछ इस तरह साफ़ हवा लेते थे।
उस समय भी फ्रंटलाइन वर्कर्स ने अपनी जान खतरे में डालकर लोगों को सर्विस दी थी। इसमें डॉक्टर्स, पोस्टमैन भी थे। पोस्टमैन लोगों के सन्देश ऐसी स्थिति में भी पहुंचा रहे थे।
कहा जाता है कि स्पेनिश फ्लू से दुनिया में कुल 5 सौ मिलियन लोग संक्रमित हुए थे। आज कोरोना ने 38 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर दिया है। ये आंकड़ा तेजी से बढ़ता ही जा रहा है।
स्पेनिश फ्लू के दौरान एक अस्पताल में खींची गई तस्वीर। ऐसे ही हालात आज भी दिखाई दे रहे हैं।
स्पेनिश फ्लू के दौरान फेस मास्क जरुरी हो गया था, ताकि ये एक से दूसरे में ना फैले। कोरोना में भी लोगों से मास्क लगाने की अपील की गई है।
स्पेनिश फ्लू के दौरान भी लोगों से आज ही की तरह सोशल डिस्टेंसिंग करने को कहा गया था। इस फ्लू के दौरान नर्सों को भी सोशल डिस्टेंसिंग करते हुए देखा गया था।
स्पेनिश फ्लू ने दुनिया के हर देश को अपनी चपेट में लिया था। सबसे हैरत की बात ये है कि उस समय फ्लाइट की सर्विस नहीं थी, फिर भी ये दुनिया में फ़ैल गया था। इस हालत में आज तो कोरोना चीन से प्लेन से हर देश में फ़ैल गया है।
कहा जाता है कि इस वायरस से करीब 17 से 50 मिलियन यानी 5 करोड़ लोग मारे गए थे। लेकिन विकिपीडिया के मुताबिक, कई केस तो रिकॉर्ड में आए ही नहीं थे। ऐसे में मरने वालों का आंकड़ा 10 करोड़ हो सकता है।
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