पूरी रात कटी टांग के साथ पटरी पर पड़ी थी, चूहे कुतर रहे थे पैर
अरुणिमा सिन्हा दुनिया की वह पहली अपंग महिला हैं, जिन्होंने अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सन पर चढ़ कर विजय पताका फहराने में सफलता पाई। इसके पहले साल 2013 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट को फतह करने में भी सफलता पाई थी। बता दें कि उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर की रहने वाली अरुणिमा साल 2011 में पद्मावती ट्रेन से सफर कर रही थीं। ट्रेन में चेन स्नेचर्स से वह अकेली भिड़ गईं। बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया था। इस घटना के बाद ही उन्होंने पर्वतारोहण में करियर बनाने का फैसला किया। अरुणिमा की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मे ट्वीट कर उन्हें बधाई दी।
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अरुणिमा सिन्हा ने अपंग हो जाने के बावजूद अद्भुत साहस का प्रदर्शन करते हुए पर्वतारोहण के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उसकी मिसाल दुनिया में शायद ही मिलती है।
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अरुणिमा राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल की खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मे उन्हें उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए उन्हें देश का गौरव बतलाया।
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साल 2011 में चलती ट्रेन से जब बदमाशों ने उन्हें बाहर फेंक दिया तो इसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण में आगे बढ़ने का फैसला किया।
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साल 2011 में वह पद्मावती एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं। उसी दौरान ट्रेन की बोगी में बदमाश घुस आए और उन्होंने यात्रियों को लूटना शूरू कर दिया। अरुणिमा उनसे अकेले भिड़ गईं। बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। उन्हें ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया। उन्हें ठीक होने में 4 महीने लगे। इसके बाद रेलवे ने उन्हें नौकरी दी।
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दुर्घटना में अपंग हो जाने के बावजूद अरुणिमा ने दुनिया की कई ऊंची चोटियों पर चढ़ाई की। इनमें अफ्रीका का माउंट किलिमानजारो, यूरोप का एल्ब्रस, ऑस्ट्रेलिया का कोस्किउस्ज्को, अर्जेंटीना का आकोंकागुआ, इंडोनेशिया का पुन्काक जया और माउंट एवरेस्ट शामिल है। साल 2015 में अरुणिमा को पद्मश्री और तेनजिंग नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड भी मिला।
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