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शॉकिंग: हाइवे बनाने के लिए खुदाई कर रहे थे मजदूर, अचानक पत्थर की जगह निकलने लगी खोपड़ियां

First Published Jun 30, 2020, 1:50 PM IST
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हटके डेस्क: दुनिया में अचानक कुछ ऐसी चीजें सामने आती हैं, जिनपर यकीन करना मुश्किल होता है। अब जरा उन मजदूरों की हालत के बारे में सोचिये जो हाइवे बनाने के लिए खुदाई कर रहे थे लेकिन अचानक उन्हें एक के बाद एक लाशें मिलने लगी। ये कोई कहानी नहीं बल्कि पोलैंड का मामला है। पोलैंड में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूर खुदाई कर रहे थे तभी उनकी नजर गड्ढों में पड़े कई कंकाल पर गई। इस कब्रिस्तान को 16वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिली 115 लाशों में से 70 से 80 प्रतिशत बच्चों की लाशें हैं। हैरत की बात तो ये है कि इन सब बच्चों के मुंह में एक सिक्का भी रखा हुआ है। ऐसे में अब ये कब्रिस्तान रहस्य का गढ़ बन गया है। 
 

ये कब्रिस्तान ग्रीस से लिथुआनिया के बीच बन रहे रोड में मिला। कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूर खुदाई कर रहे थे तभी उनकी नजर एक कंकाल पर पड़ी। 

ये कब्रिस्तान ग्रीस से लिथुआनिया के बीच बन रहे रोड में मिला। कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूर खुदाई कर रहे थे तभी उनकी नजर एक कंकाल पर पड़ी। 


कंकाल देख सभी डर गए। लेकिन उनकी हैरानी का ठिकाना तब नहीं रहा जब एक के बाद एक उन्हें 115 लाशें मिली। इसमें से 100 बच्चों की लाशें थी। 


कंकाल देख सभी डर गए। लेकिन उनकी हैरानी का ठिकाना तब नहीं रहा जब एक के बाद एक उन्हें 115 लाशें मिली। इसमें से 100 बच्चों की लाशें थी। 

इस कब्रिस्तान को 16वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। इसमें 70 प्रतिशत लाशों के मुंह में सिक्के दबे हुए थे। ये सिक्के प्री-क्रिश्चन रिवाज के हैं। 
 

इस कब्रिस्तान को 16वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। इसमें 70 प्रतिशत लाशों के मुंह में सिक्के दबे हुए थे। ये सिक्के प्री-क्रिश्चन रिवाज के हैं। 
 

गड्ढों में दबे इन कंकालों से घास-फूस भी निकल गए थे। चूंकि सभी कंकालों के मुंह में सिक्के दबे थे इसलिए ये खोज रहस्य्मय बन गई है। ये सभी बॉडीज पीठ के बल थे और उनके हाथ बगल में रखे हुए थे। 

गड्ढों में दबे इन कंकालों से घास-फूस भी निकल गए थे। चूंकि सभी कंकालों के मुंह में सिक्के दबे थे इसलिए ये खोज रहस्य्मय बन गई है। ये सभी बॉडीज पीठ के बल थे और उनके हाथ बगल में रखे हुए थे। 

कहा जा रहा है कि किसी अनुष्ठान के तहत ये लाशें वहां दफनाई गई थी। इन लाशों के मुंह में रखे सिक्कों से ही इनकी उम्र का पता चल पाया। ये सिक्के 1648 से 1668 के बीच के हैं।  
 

कहा जा रहा है कि किसी अनुष्ठान के तहत ये लाशें वहां दफनाई गई थी। इन लाशों के मुंह में रखे सिक्कों से ही इनकी उम्र का पता चल पाया। ये सिक्के 1648 से 1668 के बीच के हैं।  
 

इन लाशों में से चार बच्चों की लाशों ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा। ये चारों लाशें आपस में जुड़ी हुई थी। इनके हाथ आपस में सटे हुए थे। जब मजदूरों को लाशें मिली तो उन्होंने इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी। 

इन लाशों में से चार बच्चों की लाशों ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा। ये चारों लाशें आपस में जुड़ी हुई थी। इनके हाथ आपस में सटे हुए थे। जब मजदूरों को लाशें मिली तो उन्होंने इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी। 

सभी ने बेहद सावधानी से इन लाशों को खोदा। कंकाल को किसी तरह का नुकसान ना हो इसका भी ध्यान रखा गया। टीम का कहना है कि हो सकता है इन बच्चों के माता-पिता की बॉडी आसपास में कहीं दफन की गई होगी। 
 

सभी ने बेहद सावधानी से इन लाशों को खोदा। कंकाल को किसी तरह का नुकसान ना हो इसका भी ध्यान रखा गया। टीम का कहना है कि हो सकता है इन बच्चों के माता-पिता की बॉडी आसपास में कहीं दफन की गई होगी। 
 

इन कंकालों के पास से सिर्फ और सिर्फ एक सिक्का ही मिल पाया। जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि ये बच्चे गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। टीम ने कहा कि जिस एरिया में ये लाशें मिली हैं, वहां सिर्फ बच्चों की बॉडी दफन की जाती होगी। बड़ों का कब्रिस्तान कहीं और होगा। 

इन कंकालों के पास से सिर्फ और सिर्फ एक सिक्का ही मिल पाया। जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि ये बच्चे गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। टीम ने कहा कि जिस एरिया में ये लाशें मिली हैं, वहां सिर्फ बच्चों की बॉडी दफन की जाती होगी। बड़ों का कब्रिस्तान कहीं और होगा। 

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