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लोगों को सुकून की मौत दे रहा 60 साल का रिटायर्ड एम्बुलेंस ड्राइवर, 14 हजार अंतिम इच्छा कर चुका है पूरा
हटके डेस्क। दुनिया में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जो बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी लोगों की भलाई के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। 2 लाख से भी ज्यादा लोग इस महामारी की वजह से मौत के मुंह में जा चुके हैं, वहीं करीब 30 लाख इससे इन्फेक्टेड हैं। इस संकट के समय में नीदरलैंड्स के रहने वाले 60 साल के एक रिटायर्ड एम्बुलेंस ड्राइवर कीस वेल्डर कोरोना के हजारों ऐसे मरीजों की अंतिम इच्छा पूरी करने में लगे हैं, जिन्हें बचाया नहीं जा सकता है। कीस वेल्डर एम्बुलेंस विश फाउंडेशन चलाते हैं। इसके जरिए वे कोरोना को मरीजों को उनकी मनपसंद जगह पर ले जाते हैं। नीदरलैंड्स में मार्च में लॉकडाउन लगाया गया था। लेकिन वहां लॉकडाउन के नियम यूरोप के दूसरे देशों की तरह सख्त नहीं हैं। कीस वेल्ड कोरोना के मरीजों को उनके अंतिम समय में ट्यूलिप्स के बगीचे में ले जाते हैं। अगर किसी की इच्छा अपने घोड़े को देखने की होती है, तो उसे वहां ले जाते हैं। कोई आखिरी बार अपनी बोट देखना चाहता है तो कोई किसी स्टेडियम में जाना चाहता है। सबों को कीस वेल्ड उनकी मनपसंद जगह पर ले जाते हैं। अब तक वे करीब 14 हजार से भी ज्यादा लोगों की अंतिम इच्छा पूरी कर चुके हैं। देखें इससे जुड़ी तस्वीरें।

मौत के आगोश में जाने से पहले कोरोना की शिकार एक उम्रदराज महिला। इसे अपने एम्बुलेंस के जरिए कीस वेल्डर ने ट्यूलिप की फील्ड में पहुंचाया है। हॉस्पिटल के बेड पर पड़ी यह महिला मुस्कुरा रही है।
कोरोना से पीड़ित इस शख्स को कीस ने मौत के पहले उसके घोड़े से मिलवाया। यह उस शख्स की अंतिम इच्छा थी।
कोरोना की शिकार यह महिला मरने के पहले ट्यूलिप फील्ड में अपने घर के एक छोटे बच्चे के साथ आई है। इसे यहां तक कीस ने पहुंचाया।
कीस 60 साल की उम्र में खुद एम्बुलेंस चला कर मौत के मुंह में पहुंचने जा रहे कोरोना मरीजों को उनकी मनपसंद जगह पर ले जाते हैं। इस मरीज की इच्छा थी कि मरने के पहले वह अपने बोट को देख सके। कीस उसे यहां ले आए।
कोरोना की शिकार इस महिला को कीस इस बगीचे में ले आए, जहां हर तऱफ हरियाली फैली है और फूल खिले हैं। यहां यह महिला सुकून से अंतिम सांसें ले सकेगी।
कीस जरूरत पड़ने पर कोरोना मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भी अपनी एम्बुलेंस से ले जाते हैं। इस दौरान कोरोना से पीड़ित एक शख्स एक फील्ड में उगे ट्यूलिप के फूलों की तस्वीर ले रहा है। यूरोप में यह ट्यूलिप के खिलने का मौसम है।
कोरोना के एक मरीज की इच्छा थी कि उसे स्टेडियम में ले जाया जाए। लॉकडाउन में ऐसी जगहों पर जाना मना है और अगर कोई ऐसी जगहों पर जाता है तो उसे दूसरे लोगों से 1-5 मीटर का फासला बना कर रखना होता है। फिर भी मरीज की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए कीस उसे यहां ले आए।
कीस वेल्डर रिटायरमेंट के बाद भी पैरामेडिक के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कोरोना के एक गंभीर मरीज को उसके रिलेटिव के साथ नीदरलैंड्स के इस खूबसूरत ग्रामीण इलाके में लेकर आए। मौत के करीब पहुंच चुकी इस महिला की यह अंतिम इच्छा थी।
स्टिचिंग एम्बुलेंस वेन्स (एम्बुलेंस विश फाउंडेशन) बना कर कीस वेल्डर कोरोना मरीजों की अंतिम इच्छा पूरी करने में लगे हैं। 60 साल की उम्र में भी कीस पूरी तरह फिट हैं और खुद एम्बुलेंस चला कर मरीजों को उनकी मनपसंद जगहों पर ले जाते हैं।
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