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मुस्लिमों का त्योहार नहीं है मुहर्रम, जानिये इससे जुड़ी 8 बातें

First Published Sep 10, 2019, 2:07 PM IST
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नई दिल्ली: पूरी दुनिया में आज यानी 10 सितंबर को मुहर्रम मनाया जा रहा है। कई लोग इसे मुस्लिमों को त्योहार मानते हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। मुहर्रम कोई त्योहार नहीं है। बल्कि ये मुस्लिमों के लिए मातम का दिन है। इस दिन इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन की याद में मातम मनाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस दिन से जुड़ी 10 बातें, जिनके बारे में अन्य धर्म के लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। 

मुहर्रम महीने की पहली तारीख से मुसलमानों के नए साल की शुरुआत होती है। उनके न्यू ईयर को हिजरी कहा जाता है।

मुहर्रम महीने की पहली तारीख से मुसलमानों के नए साल की शुरुआत होती है। उनके न्यू ईयर को हिजरी कहा जाता है।

मुस्लिम समुदाय हर काम हिजरी कैलेंडर के मुताबिक करते हैं। ये एक ऐसा कैलेंडर है, जो चांद के हिसाब से चलता है। इसे ज्यादातर मुस्लिम देशों में इस्तेमाल किया जाता है।

मुस्लिम समुदाय हर काम हिजरी कैलेंडर के मुताबिक करते हैं। ये एक ऐसा कैलेंडर है, जो चांद के हिसाब से चलता है। इसे ज्यादातर मुस्लिम देशों में इस्तेमाल किया जाता है।

दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के लोग हिजरी कैलेंडर के मुताबिक त्योहार मनाते हैं। इसी के जरिए वो किसी त्योहार की डेट भी फाइनल करते हैं।

दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के लोग हिजरी कैलेंडर के मुताबिक त्योहार मनाते हैं। इसी के जरिए वो किसी त्योहार की डेट भी फाइनल करते हैं।

इस दौरान मुस्लिमों में मुहर्रम पर सुन्नी समुदाय ताजिया निकालते हैं। शिया समुदाय के लोग 10 दिन तक इमाम हुसैन को याद कर शोक मनाते हैं।

इस दौरान मुस्लिमों में मुहर्रम पर सुन्नी समुदाय ताजिया निकालते हैं। शिया समुदाय के लोग 10 दिन तक इमाम हुसैन को याद कर शोक मनाते हैं।

मुहर्रम के महीने को इस्लाम के सबसे पवित्र 4 महीने में शामिल किया जाता है। इसे अल्लाह का महीना भी कहा जाता है।

मुहर्रम के महीने को इस्लाम के सबसे पवित्र 4 महीने में शामिल किया जाता है। इसे अल्लाह का महीना भी कहा जाता है।

इस्लाम धर्म में मुहर्रम का खासा महत्व है। साल 680 में इसी महीने में कर्बला से एक धर्म युद्ध हुआ था।

इस्लाम धर्म में मुहर्रम का खासा महत्व है। साल 680 में इसी महीने में कर्बला से एक धर्म युद्ध हुआ था।

इस युद्ध में हजरत साहब की जीत हुई थी। लेकिन इसमें उनके परिवार के सभी लोगों की मौत हो गई थी। इसलिए इस पूरे महीने मुसलमान इनकी शहादत का गम मानते हुए उन्हें याद करते हैं।

इस युद्ध में हजरत साहब की जीत हुई थी। लेकिन इसमें उनके परिवार के सभी लोगों की मौत हो गई थी। इसलिए इस पूरे महीने मुसलमान इनकी शहादत का गम मानते हुए उन्हें याद करते हैं।

इस दिन को मुहर्रम के अलावा यौमे आशुरा भी कहते हैं।

इस दिन को मुहर्रम के अलावा यौमे आशुरा भी कहते हैं।

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